छत्तीसगढ़ के दुर्ग में खून की कमी से युवती की मौत मामले में 9 स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस, कलेक्टर ने मांगा जवाब
Updated on
09-06-2026 09:53 PM
जिला चिकित्सालय दुर्ग में सिकलसेल एनीमिया से पीड़ित 20 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर द्वारा जांच रिपोर्ट के आधार पर सिविल सर्जन आशीष मिंज, शनि, तृप्ति, निखिल अग्रवाल, तीन स्टाफ नर्स तथा दो लैब टेक्निशियन सहित कुल नौ स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सभी संबंधित कर्मचारियों को दो दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि सिकलसेल एनीमिया से पीड़ित दीपिका गाड़ा को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय दुर्ग में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसे तत्काल रक्त की आवश्यकता बताई गई थी। परिजनों का आरोप है कि समय पर पर्याप्त रक्त उपलब्ध नहीं हो सका और उपचार में भी विलंब हुआ।
इसके कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू की गई। जांच अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डा. मनोज दानी तथा एडीएम योगिता देवांगन ने घटना के बाद लगातार चार दिनों तक जिला चिकित्सालय में जांच की। इस दौरान उपचार संबंधी दस्तावेज, ड्यूटी रिकॉर्ड, रक्त उपलब्धता की स्थिति तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की गई। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई।
जांच रिपोर्ट में उपचार प्रक्रिया और रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता बताई गई है। इसी आधार पर संबंधित स्वास्थ्य कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि मरीज के उपचार के दौरान उनकी क्या जिम्मेदारी।
तथा किन परिस्थितियों में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो सकीं। प्राप्त जवाबों का परीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या कर्तव्य निर्वहन में कमी प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
इधर मृतका के स्वजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि यदि समय पर रक्त और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती तो युवती की जान बचाई जा सकती थी। स्वजनों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और रक्त प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत बनाने की मांग की है।
जिला चिकित्सालय दुर्ग में सिकलसेल एनीमिया से पीड़ित 20 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर द्वारा…
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