नई दिल्ली: आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अमीरी के दिखावे पर तंज कसा है। उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया है, जिसके बाद काफी यूजर्स गोयनका की इस पोस्ट पर भड़क गए हैं। हर्ष गोयनका की यह पोस्ट एक गुजराती लोक गायक के कार्यक्रम से जुड़ी है।
गोयनका ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है- इस बीच दौलत का भद्दा प्रदर्शन जारी है…'। वीडियो में दिखाया गया है कि एक गुजराती लोक गायक के ऊपर लोग नोट बरसा रहे हैं। लोग नोटों से भरी बोरियां मंच पर लाकर गायक पर नोट बरसाते नजर आ रहे हैं। वह गायक नोटों से सिर तक ढंक गया है, लेकिन लगातार गाना गाता रहता है। ऐसे में काफी लोगों ने गोयनका की इस पोस्ट को निशाने पर ले लिया। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक, यह वीडियो मई 2026 में गुजरात के खंभालिया में हुए एक कार्यक्रम का है।
क्या लिखा यूजर्स ने?
Ram नामक एक यूजर ने लिखा है, 'इस अंकल को गुजरात की हर चीज से परेशानी है। पहले गरबा के पीछे पड़ गए थे और अब इस पर सवाल उठा रहे हैं। अरे भाई, यह गुजरात का डायरो (लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम) है। यहां गौशालाओं के लिए चंदा इकट्ठा किया जाता है। पहले इसके बारे में कुछ जानकारी तो हासिल कर लीजिए। सिर्फ अरबपति होने से कोई समझदार नहीं हो जाता।'
वहीं Bansil patel नामक यूजर ने लिखा है, 'कमेंट करने वाले सभी गैर-गुजरातियों को बता दूं कि आप जो नकदी देख रहे हैं, वह गौशालाओं को दान की जाएगी।'
S Murlidharan नामक यूजर ने कमेंट किया है, 'नकदी की इतनी बड़ी मात्रा में बरसात को लेकर कहा जा रहा है कि अक्सर राजनेता रैलियां आयोजित करके अपने काले धन को सफेद करते हैं। ऐसी रैलियों में गांव का प्रधान सबके सामने यह घोषणा करता है कि गांव के लोग नेता को बहुत पसंद करते हैं और सभी मिलकर उन्हें 1 करोड़ रुपये का उपहार दे रहे हैं। यह पूरा दिखावा या नाटक होता है। इसकी सच्चाई तो सीए की पढ़ाई शुरू करने वाला छात्र भी आसानी से समझ सकता है।'
Vipul Shah ने लिखा है, 'सर, यह दौलत का भद्दा प्रदर्शन नहीं है। ज्यादातर मामलों में कलाकारों पर जो नोट उड़ाए जाते हैं, वे किसी अच्छे काम के लिए दान के तौर पर दिए जाते हैं।'
लक्ष्मी का बताया अपमान
एक यूजर ने इस तरह नोटों को बरसाना लक्ष्मी का अपमान बताया। NiteshRunning नामक यूजर ने कमेंट किया कि सर यह तो मां लक्ष्मी का अपमान है।
Ajitsinh Darbar ने लिखा है कि यह पैसा गुजरात के गरीब लोगों का शोषण करके और उनका खून चूसकर कमाया गया है। एक यूजर ने इसकी तुलना अतुल्य भारत से कर दी। Naresh Nambisan ने लिखा कि इसीलिए तो हम अपने देश को 'अतुल्य भारत' कहते हैं!
यूजर ने दिया गोयनका को निमंत्रण
गोयनका की पोस्ट पर एक यूजर ने ऐसे कार्यक्रम में बुलाने का निमंत्रण भी दे दिया। Chetan Dedhia ने लिखा है, 'हर्ष जी, आपके लेख हमेशा निष्पक्ष, अच्छी तरह लिखे हुए और तथ्यों पर आधारित होते हैं। लेकिन इस बार व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी ने आपको गलत जानकारी दे दी है। यह पैसा गौशालाओं और कन्या शालाओं के लिए दिया जाता है। हम आपको मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित करके खुशी महसूस करेंगे, ताकि आप खुद आकर इस बात को देख सकें और इसकी सच्चाई की पुष्टि कर सकें।' इस पोस्ट पर गोयनका ने 'ओह' लिखकर रिप्लाई दिया।
क्या है डायरो?
डायरो (Dayro) गुजरात की एक पारंपरिक लोक कला और सांस्कृतिक सभा है। यह कोई अलग डांस फॉर्म नहीं है। 'डायरो' शब्द गुजराती के 'डायरू' से बना है, जिसका मतलब है लोगों का गोल घेरे में बैठकर इकट्ठा होना।
डायरो की जड़ें गुजरात की सदियों पुरानी लोक परंपराओं से जुड़ी हैं। बरोट, चारण और गढ़वी समुदाय के कलाकार लोककथाएं, इतिहास और कविताएं सुनाते हैं। इसमें कलाकार भजन, लोकगीत और पारंपरिक कविताएं गाते हैं। इसके लिए ढोलक और दूसरे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। कलाकार दोहे और छंद भी सुनाते हैं।