कपास आयात शुल्क हटाने के निर्णय का CAIT ने स्वागत किया – MSME और निर्यात को मिलेगी नई ऊर्जा : चम्पालाल बोथरा (CAIT)
Updated on
19-08-2025 08:59 PM
कन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी ने केंद्र सरकार द्वारा कच्चे कपास पर आयात शुल्क हटाने के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है। यह कदम भारतीय कपड़ा उद्योग, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (MSME) इकाइयों और निर्यातकों के लिए नई ऊर्जा लेकर आएगा।
पिछले एक वर्ष में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में लगभग 40% तक की वृद्धि ने सूत, कपड़ा और गारमेंट की लागत को बहुत अधिक बढ़ा दिया था। इस वजह से भारतीय टेक्सटाइल MSME, वियतनाम, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों की तुलना में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे। सरकार के इस निर्णय से निम्नलिखित प्रमुख लाभ होंगे:
• लागत में कमी – कपास सस्ता होने से सूत की कीमतों में 10-15% और फैब्रिक की कीमतों में 8-10% तक गिरावट संभव।
• उद्योग को राहत – MSME इकाइयों को उत्पादन लागत में स्थिरता मिलेगी।
• निर्यात एवं त्योहारी मांग को बढ़ावा – यह कदम त्योहारी सीजन में मांग पूरी करने और वैश्विक ऑर्डर प्राप्त करने में मददगार साबित होगा।
साथ ही, CAIT टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी ने सरकार से आग्रह किया है कि यह निर्णय अस्थायी न रहकर दीर्घकालिक नीति बने। इसके लिए:
• कपास, सूत और कपड़े की कीमतों की निगरानी हेतु स्थायी तंत्र स्थापित किया जाए।
• टेक्सटाइल MSME को सस्ती वित्तीय सुविधा और कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति की गारंटी दी जाए।
CAIT टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा:
“कपास पर शुल्क हटाना हमारे उद्योग के लिए बड़ी राहत है। यह कदम MSME, गारमेंट एक्सपोर्टर और व्यापारियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की शक्ति देगा। यह निर्णय ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एक्सपोर्ट बूस्ट’ दोनों के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।”
इस बीच, वित्त मंत्रालय ने सोमवार देर रात जारी अधिसूचना में पुष्टि की कि सरकार ने 19 अगस्त से 30 सितंबर तक (42 दिनों) के लिए कच्चे कपास पर लगने वाले 11% सीमाशुल्क को अस्थायी रूप से हटा दिया है। इसमें Basic Customs Duty और Agriculture Infrastructure and Development Cess (AIDC) दोनों शामिल हैं। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिका ने भारतीय कपड़े पर 50% तक टैरिफ लगाया है, जिससे घरेलू उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यह राहत त्योहारी सीजन और निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत दी गई है।
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