मक्का रक्षा समझौते में क्या होने वाली है ईरान की एंट्री, ये शर्तें रखीं
Updated on
25-08-2026 06:55 PM
ईरान का कहना है कि मक्का रक्षा समझौते पर साइन करने वाले देशों (पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की) ने ईरान को आधिकारिक समझौते में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने सोमवार सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "हमें मक्का समझौते में शामिल होने का कोई निमंत्रण नहीं मिला है. हालांकि, रीज़नल सिक्योरिटी को लेकर इन देशों के साथ बातचीत के प्रस्ताव ज़रूर दिए गए हैं."
ग़ौरतलब है कि इससे पहले, लेबनानी टीवी नेटवर्क 'अल-मायादीन' ने एक अज्ञात ईरानी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट किया था कि "ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का निमंत्रण मिला है और इस मामले पर विचार किया जा रहा है."
ईरान के मक्का समझौते में शामिल होने के बारे में ख़बरों का सिलसिला दो दिन पहले शुरू हुआ जब ईरानी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेज़ाई ने इस बारे में एक बयान दिया.
22 अगस्त को सरकारी न्यूज़ एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में, मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि ईरान मक्का समझौते का हिस्सा तभी बन सकता है, जब उसे समझौते का "को-फ़ाउंडर" माना जाए और इसके बेसिक डॉक्यूमेंट्स तैयार करने में उसको भूमिका दी जाए
मोहसेन रेज़ाई ने कहा है कि ईरान और मिस्र को क्षेत्रीय व्यवस्थाओं (जैसे मक्का समझौते) से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि "ईरान और मिस्र ऐसे समझौतों से ग़ैर-मौजूद नहीं हो सकते, लेकिन उनकी भागीदारी को-फ़ाउंडर के तौर पर होनी चाहिए, यानी ऐसी पार्टियों के तौर पर जिनके विचार और सोच साइन किए गए डॉक्यूमेंट्स को बनाने में शामिल हों."
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते का ज़िक्र करते हुए, मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि यह मंज़ूर नहीं है कि "ये दोस्त देश" पहले आपस में कोई समझौता करें और फिर ईरान से उसके लिए मंज़ूरी या समर्थन की मांग करें.
मोहसेन रेज़ाई, जो सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मोजतबा ख़ामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार भी हैं, उन्होंने यह भी दावा किया कि यह डेवलपमेंट (मक्का समझौता) इस इलाके में अमेरिका की कमज़ोर होती स्थिति का नतीजा है.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब, हमारे दोस्त और भाई जैसे देशों ने एक समझौता किया है. क्यों? क्योंकि अमेरिका ने उनसे कहा है: 'अलविदा, हम जा रहे हैं'."
मोहसेन रेज़ाई के मुताबिक़, इस इलाक़े में अमेरिकी मौजूदगी कम होने से जो ख़ालीपन आया है, उसकी वजह से कई देश नए इंतज़ाम कर रहे हैं. उनके मुताबिक़, यह स्थिति ईरान के वॉशिंगटन के साथ लंबे समय से चले आ रहे झगड़े का नतीजा है.
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