CJP के बाद सोशल मीडिया पर RHA की एंट्री, 46 लाख फॉलोअर्स का दावा; आरक्षण व्यवस्था में बदलाव को लेकर रखीं 5 प्रमुख मांगें
Updated on
28-07-2026 08:21 PM
CJP आंदोलन के बाद RHA की एंट्री
5 दिन में 46 लाख फॉलोअर्स का दावा
क्या है रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (RHA)?
इंस्टाग्राम पर कैसे चल रहा है अभियान?
सीजेपी (CJP) के नेतृत्व में करीब 49 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेजी से चर्चा में आ गया है। रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (Reservation Hatao Movement – RHA) नाम से चल रहा यह अभियान दावा कर रहा है कि उसने महज पांच दिनों के भीतर इंस्टाग्राम पर 46 लाख फॉलोअर्स जोड़ लिए हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी बढ़ती सक्रियता ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है।
यह समूह खुद को किसी राजनीतिक दल से अलग बताते हुए नागरिकों द्वारा चलाया गया अभियान कहता है। इसका मुख्य उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और सार्वजनिक जीवन में जातिगत पहचान के उपयोग को समाप्त करने की मांग उठाना बताया जा रहा है। सीजेपी आंदोलन खत्म होने के बाद अलग-अलग सार्वजनिक नीतियों को लेकर सोशल मीडिया पर नए अभियानों के उभरने के बीच आरएचए भी तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है।
क्या है रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन?
यह अभियान इंस्टाग्राम पर reservationhataomovement नाम से संचालित किया जा रहा है। समूह के अकाउंट पर 100 से अधिक पोस्ट मौजूद हैं और प्रोफाइल में लिखा गया है कि यह उन नागरिकों का अभियान है जो देश में सुधार और समानता की आवाज उठाना चाहते हैं। प्रोफाइल में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे "Educate, Agitate, Organize" का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही हिंदी में लिखा गया है—"सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान" और अंत में "जय हिंद" का संदेश दिया गया है।
समूह का कहना है कि उसका किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं है और वह केवल सामाजिक नीति में बदलाव को लेकर अपनी बात रख रहा है।
आरएचए की पांच प्रमुख मांगें
अभियान से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार समूह ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इन मांगों का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में जातिगत पहचान की भूमिका कम करना बताया गया है।
पहली मांग यह है कि यदि सरकार का लक्ष्य जाति आधारित भेदभाव समाप्त करना है तो सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान का उपयोग भी समाप्त किया जाए।
दूसरी मांग के अनुसार किसी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि केवल भारतीय नागरिक के रूप में होनी चाहिए। समूह का कहना है कि सार्वजनिक रूप से जाति का प्रदर्शन या उल्लेख समाप्त किया जाए।
तीसरी मांग में सरकारी आवेदन पत्रों, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, नौकरी के आवेदन और अन्य सार्वजनिक प्रक्रियाओं में जाति का उल्लेख अनिवार्य नहीं रखने की बात कही गई है।
चौथी मांग के तहत समूह का दीर्घकालिक लक्ष्य "वन नेशन, वन आइडेंटिटी – इंडियन" बताया गया है। उनका कहना है कि नागरिकों की पहचान केवल भारतीय के रूप में होनी चाहिए।
पांचवीं मांग के रूप में अभियान ने अपना नारा दिया है—"आरक्षण हटाओ, जाति हटाओ", जिसे वह सामाजिक समानता की दिशा में आवश्यक कदम बता रहा है।
भाजपा और राजनीति पर क्या कहा?
आरएचए ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया है कि उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। समूह का कहना है कि शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि सरकार बदलने के बाद आरक्षण व्यवस्था में बड़े सुधार किए जाएंगे, लेकिन उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ।
समूह का दावा है कि भाजपा सरकार भी आरक्षण नीति में व्यापक बदलाव नहीं कर सकी और समय के साथ आरक्षण व्यवस्था का विस्तार ही हुआ। इसलिए उनका कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि नीति का विषय है और उनका अभियान केवल नीति में बदलाव की मांग पर केंद्रित है।
सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक अभियानों का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है। आरएचए भी पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। इंस्टाग्राम पोस्ट, वीडियो, रील और ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से समूह अपनी मांगों को प्रचारित कर रहा है।
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