पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत दक्षिण एशिया का मीडिया जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों पर क्या बोल रहा है?
Updated on
23-07-2026 09:01 PM
पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के मीडिया ने शिक्षा सुधारों को लेकर भारत में जारी युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) दिल्ली में प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाला एक युवा संगठन है जो नीट के प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा सुधारों की मांग कर रहा है.
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल है.
20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के बाद इस प्रदर्शन को व्यापक पहचान मिली. इस दौरान दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग जुटे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. इन प्रदर्शनकारियों में ज़्यादातर छात्र-छात्राएं और युवा थे.
वांगचुक नीट का पेपर लीक होने के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
इस बीच 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों में शामिल लोगों को "तेज़ और कड़ी सज़ा" दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने की घोषणा की है.
हालांकि, सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की अपनी मांग नहीं छोड़ी है.
पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार डॉन ने 23 जुलाई को लिखा, "भारत में असंतोष दिखाई दे रहा है."
डॉन ने संपादकीय में लिखा, "ऐसा लगता है कि अब डर के सहारे शासन की पकड़ कमज़ोर पड़ रही है, क्योंकि सरकार एक बुनियादी सवाल का जवाब देने में संघर्ष कर रही है कि आम भारतीय युवाओं का भविष्य क्या है?"
लेख में कहा गया कि "सभी प्रदर्शनों का दमन" अब "कठोर' हो गया है.
डॉन ने लिखा, "ऐसे समय में जब अपनी बात रखने के ज़्यादातर रास्ते या तो असुरक्षित हैं या नियंत्रण में हैं, इस आंदोलन ने कुछ हद तक लोगों को डर से मुक्त किया है."
पाकिस्तान के एक अन्य प्रमुख अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है, "कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया भारत के लोकतांत्रिक होने के दावों की वास्तविकता को उजागर कर रही है."
पाकिस्तान के न्यूज़ एंकर शाहज़ेब ख़ानज़ादा ने 21 जुलाई को उर्दू समाचार चैनल जियो न्यूज़ पर कहा कि भारत में छात्रों का प्रदर्शन अब बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले चुका है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र विरोधी तत्व बताया.
इसी तरह एआरवाई न्यूज़ के एंकर कमरान ख़ान ने कहा कि भारत अपने सबसे बड़े युवा नेतृत्व वाले आंदोलनों में से एक का सामना कर रहा है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है.
पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के मीडिया ने शिक्षा सुधारों को लेकर भारत में जारी युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) दिल्ली…
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