कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा विदेशी मीडिया में भी, जानिए इसे वहाँ कैसे देखा जा रहा है?
Updated on
22-05-2026 06:36 PM
भारत में राजनीतिक पार्टियों का जन्म सामान्य तौर पर आंदोलनों से होता है. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म 16 मई को सोशल मीडिया पर अचानक से हुआ था.
इसका जन्म कटाक्ष करने वाले ऑनलाइन प्रोजेक्ट के रूप में हुआ था.
दरअसल, 15 मई को भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, "समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.''
जस्टिस सूर्यकांत की इस टिप्पणी की बहुत आलोचना हुई. हालांकि इस आलोचना के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण दिया और कहा कि उनकी टिप्पणी को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है.
उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल (15 मई को) एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है. ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं."
लेकिन तब तक कॉकरोच भारत की राजनीतिक बहस में शामिल हो चुका था. 16 मई को 30 साल के अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक गूगल फॉर्म पोस्ट किया, जिसमें लोगों को कॉकरोच जनता पार्टी में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित किया.
कुछ ही घंटों में अभिजीत को 5,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन मिल गए और इंटरनेट पर शुरू हुआ एक मज़ाक धीरे-धीरे सार्वजनिक असंतोष, हास्य और राजनीतिक हताशा को अभिव्यक्त करने वाले एक अनौपचारिक संगठन में बदल गया.
अभिजीत इस समय अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं. उन्होंने अपनी पार्टी को लेकर कहा, ''कॉकरोच युवाओं की उस असहमति के भाव को व्यक्त करती है, जो माननीय मुख्य न्यायाधीश के उस बयान के ख़िलाफ़ है, जिसमें उन्होंने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी कहा था. भारत जैसे लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं था, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षक माना जाता है. उन्होंने आलोचना करने के कारण युवाओं को अपमानित किया."
इंस्टा पर दुनिया की 'सबसे बड़ी पार्टी' बीजेपी पिछड़ी
देखते ही देखते भारत में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स लाखों में हो गए. इंस्टाग्राम पर तो कॉकरोच जनता पार्टी के फॉलोवर्स दो करोड़ के क़रीब हो गए हैं जो सत्ताधारी बीजेपी के फॉलोवर्स से दोगुने हैं.
सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच पार्टी की चर्चा भारत में आम लोगों की बातचीत में भी शुरू हो गई है. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस पर अच्छी ख़ासी चर्चा हो रही है.
ब्रिटिश न्यूज़ वेबसाइट द गार्डियन ने 21 मई को कॉकरोच जनता पार्टी पर विस्तार से एक कहानी प्रकाशित की है.
गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''कॉकरोच जनता पार्टी को लाखों भारतीय युवा अपनी हताशा और ग़ुस्से को व्यक्त करने के माध्यम के रूप में अपना रहे हैं. कॉकरोच को चुनाव चिह्न बनाने वाली एक पैरोडी राजनीतिक पार्टी ने हास्यास्पद और व्यंग्यात्मक हास्य को विरोध के माध्यम में बदलते हुए भारतीय सोशल मीडिया पर विस्फोटक लोकप्रियता हासिल कर ली है.''
अभिजीत दीपके
''भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनीतिक अव्यवस्था का मज़ाक उड़ाने वाले मीम्स और छोटे वीडियो सोशल मीडिया पर भर गए हैं. लाखों यूज़र्स अब कॉकरोच, एक ऐसा कीड़ा जो कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता के लिए जाना जाता है, को संघर्ष और टिके रहने के प्रतीक के रूप में व्यंग्यात्मक अंदाज़ में अपना रहे हैं. इस ऑनलाइन आंदोलन का विस्तार असाधारण रूप से रहा है.
द गर्डियन से सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा , "यह सब जानबूझकर नहीं हुआ. इसमें लोगों की दिलचस्पी युवाओं के भीतर बढ़ती हताशा को दर्शाती है. असल में युवा बहुत निराश हैं. उनके पास अपनी बात कहने का कोई माध्यम नहीं है. वे सरकार से बेहद नाराज़ हैं."
गार्डियन ने लिखा है, ''दीपके पहले आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं. आम आदमी पार्टी 2012 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी थी. दीपके कहते हैं, हमें समझना होगा कि पाँच साल पहले तक कोई भी मोदी या सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने को तैयार नहीं था लेकिन अब समय बदल रहा है."
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