राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका को "प्रताड़ना" का इनाम दे रहा शिक्षा विभाग
Updated on
13-10-2026 10:43 PM
पुरस्कार के बाद भी संघर्ष: शिक्षिका को रिटायरमेंट से 5 महीने पहले पुराने स्कूल में भेजने पर विवाद
भोपाल। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ शिक्षिका अजीता द्विवेदी की पदस्थापना को लेकर सीधी के शिक्षा विभाग में सवाल उठ रहे हैं। दरअसल जिस विद्यालय में बालिकाओं के साथ हुए गलत व्यवहार का उन्होंने विरोध किया, उसी विद्यालय से जुड़े कुछ लोगों ने उनके खिलाफ झूठी शिकायतें कीं। इससे उन्हें लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ा और अपने हक के लिए न्यायालय तक जाना पड़ा। अब सेवानिवृत्ति में महज पांच महीने शेष रहने पर उन्हें एक बार फिर उन्हें उसी विद्यालय में भेजे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षिका का सवाल है कि जब न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उन्हें उनका अधिकार मिला, तो अब दोबारा ऐसी स्थिति क्यों पैदा की जा रही है?
मामला संदीपनी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीधी से जुड़ा है। अजीता द्विवेदी योग एवं स्काउट की वरिष्ठ शिक्षिका हैं। उनके अनुसार, वे पिछले करीब सात वर्षों से न्यायालय के आदेश के बाद इस विद्यालय में सेवाएं दे रही थीं। उनका कहना है कि बालिकाओं के साथ कथित गलत व्यवहार का विरोध करने के बाद उन्हें शिकायतों और विभागीय कार्रवाई की परेशानियों से गुजरना पड़ा। शिक्षिका का दावा है कि इन शिकायतों के चलते राज्य स्तरीय पुरस्कार मिलने की प्रक्रिया में भी अनावश्यक देरी हुई। यहां तक कि अपने अधिकारों के लिए उन्हें उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जिसमें आर्थिक और मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ी।
पुरस्कार का आदेश 13 जुलाई को, 31 जुलाई को कार्यमुक्त :
मामले में घटनाक्रम की समय-सीमा भी सवाल खड़े कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अजीता द्विवेदी को राज्य स्तरीय पुरस्कार का आदेश 13 जुलाई 2026 को मिला। इसके महज 18 दिन बाद, 31 जुलाई को उन्हें संदीपनी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सीधी से कार्यमुक्त कर करौंदिया स्थित पानी की टंकी के पास के विद्यालय में भेज दिया गया।
शिक्षिका का कहना है कि जिस विद्यालय में उन्हें दोबारा भेजा गया है, उससे संबंधित पूर्व पदस्थापना आदेश को हाईकोर्ट वर्ष 2019 में निरस्त कर चुका है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब न्यायालय के आदेश के बाद उनकी पदस्थापना से जुड़ा मामला तय हुआ था, तो अब उन्हें फिर उसी व्यवस्था में भेजने का आधार क्या है?
पांच महीने बाद रिटायरमेंट, फिर क्यों बदली व्यवस्था? :
अजीता द्विवेदी की सेवानिवृत्ति में लगभग पांच महीने शेष बताए जा रहे हैं। ऐसे में उनकी पदस्थापना में बदलाव को लेकर प्रशासनिक आवश्यकता और निर्णय के आधार पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षिका का आरोप है कि अधिकारी उन्हें वापस संदीपनी विद्यालय में पदस्थ करने के बजाय ऊपर से आदेश होने का हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में उनकी परिस्थितियों, पूर्व न्यायालयीन आदेश और सेवानिवृत्ति की निकटता पर समुचित विचार नहीं किया जा रहा।
शिक्षिका के मुताबिक, स्काउट एवं योग की गतिविधियों के लिए उनका पंजीयन संदीपनी कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है। उनका यह भी कहना है कि विद्यालय में स्काउट की अन्य महिला शिक्षिका उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके स्थान परिवर्तन से छात्राओं की सहशैक्षणिक गतिविधियों की निरंतरता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
गलत लोकेशन और मेडिकल दस्तावेजों को लेकर भी शिकायत :
अजीता द्विवेदी ने पदस्थापना और लोकेशन संबंधी रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी की शिकायत भी की है। उनके अनुसार, गलत विद्यालय से लोकेशन दर्शाए जाने और मेडिकल संबंधी दस्तावेजों को लेकर भी परेशानी बनी हुई है। उनका कहना है कि लगातार बनी अनिश्चितता के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षिका का मामला अब केवल कार्यमुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें पुराने न्यायालयीन आदेश की स्थिति, पुरस्कार प्रक्रिया में हुई देरी, विभागीय अधिकारियों की मनमानी और सेवानिवृत्ति के अंतिम महीनों में पदस्थापना में बदलाव संबंधी निर्णय के औचित्य जैसे सवाल भी शामिल हैं।
सवालों के घेरे मे प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी :
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सीधी पवन सिंह और संदीपनि विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण लाल विश्वकर्मा की भूमिका और डीईओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। दरअसल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा था कि जो शिक्षक किसी अन्य जगह या व्यक्ति के पास अटैच होकर गैर शिक्षकीय कार्य कर रहे हैं उनको कार्यमुक्त कर वापस पढ़ाने के कार्य में लगाया जाए पर सीधी के डीईओ और सांदीपनि के प्राचार्य ने ऐसा करने की जगह सांदीपनि विद्यालय में शिक्षण कार्य में लगी राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ शिक्षिका अजीता द्विवेदी को ही कार्यमुक्त कर दिया। जबकि अभी भी दर्जन से ऊपर शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्य कर डीईओ ऑफिस और अन्य जगह अटैच हैं।
बड़ा सवाल यह है कि अजीता द्विवेदी की सेवानिवृत्ति में महज पांच महीने शेष रहने पर पदस्थापना बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी? उन्हें अनावश्यक परेशान कर जिला शिक्षा अधिकारी और प्राचार्य क्या साबित करना चाहते हैं? क्या यही मप्र सरकार का महिला सशक्तिकरण अभियान है।
सम्मान के बाद भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष?:
राज्य स्तरीय पुरस्कार किसी शिक्षक के वर्षों के समर्पण और योगदान का सम्मान होता है। ऐसे में पुरस्कार प्राप्त करने वाली वरिष्ठ शिक्षिका अजीता द्विवेदी को यदि अपने कार्यस्थल और पदस्थापना को लेकर लगातार सवाल उठाने पड़ रहे हैं, तो विभाग की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर शिक्षिका की शिकायतों पर समयबद्ध निर्णय लें। यदि किसी स्तर पर न्यायालयीन आदेश या सेवा संबंधी नियमों की अनदेखी हुई है, तो जिम्मेदारी तय की जाए।
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