सीनाजोरी कर रहे चीन की भारत ने बोलती कर दी बंद, कहा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बीजिंग ने खुद किया कब्जा
Updated on
25-07-2026 04:38 PM
भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि भारत चीन की संप्रभुता का उल्लंघन करता है। इसके उलट विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग ही भारतीय इलाके पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा किए हुए है और नई दिल्ली के दावे वाले इलाकों में गतिविधियां कर रहा है। ये बयान तब आया जब चीन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बैठक का आधिकारिक ब्योरा जारी किया। इसमें कहा गया कि जयशंकर ने कहा कि ताइवान और तिब्बत पर भारत का रुख पहले जैसा ही है और नई दिल्ली चीन की संप्रभुता का सम्मान करती है।
भारतीय विदेश मंत्रालय बोला-हमारा रुख हमेशा वही
नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने हमेशा चीन की संप्रभुता का सम्मान किया है, लेकिन सीमा पर बीजिंग के कदमों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता।
जायसवाल ने कहा, 'जब संप्रभुता के मुद्दों की बात आती है, तो असल में भारत ही उन्हें उठाता रहा है। भारत किसी भी तरह से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता है और इस मुद्दे पर उसका रुख हमेशा एक जैसा रहा है।'
चीन खुद भारत का हक मानता है, मगर मौजूद है
इसकी तुलना में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली इन इलाकों में बीजिंग की गतिविधियों का लगातार विरोध करती रही है।
जम्मू-कश्मीर में कुछ जगहों पर चल रहे चीन के प्रोजेक्ट
जयसवाल ने कहा, 'चीन 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय इलाके पर गैर-कानूनी कब्जा किए हुए है, जबकि इन इलाकों पर भारत के अधिकार को खुद चीन भी आधिकारिक तौर पर मानता है। जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों में चीन के प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं जो भारत के हैं, और हम इन गतिविधियों का विरोध करते हैं।'
गुरुवार को मनीला में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान जयशंकर और वांग यी के बीच हुई मुलाकात के बाद जयसवाल ने ये बातें कहीं।
चीन मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट कर्नल रिटायर्ड जेएस सोढ़ी बताते हैं कि चीन की 2035 तक पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ दोहरे मोर्चे वाला युद्ध छेड़ना है। पहले वह ताइवान के खिलाफ युद्ध करेगा और फिर उसका अगला निशाना भारत ही होगा। ऐसे में हमें सतर्क रहना होगा।
जयशंकर ने कहा था-LAC पर शांति से ही द्विपक्षीय संबंध
मनीला में बातचीत के दौरान, जयशंकर और वांग यी ने भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया, बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने पर चर्चा की और ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर अपने विचार साझा किए।
जयशंकर ने इस बात को फिर से दोहराया कि द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।
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