Iran War: भारत ही खत्म करवा सकता है मिडिल ईस्ट जंग, UAE के बाद अब ईरान ने भी माना लोहा
Updated on
13-03-2026 04:21 PM
ईरान जंग का अंजाम क्या होगा? आखिर कौन इस विनाशकारी युद्ध को रुकवाएगा? किसके पास है अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग खत्म करवाने की ताकत? अब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. ईरान और इजरायल-अमेरिका जंग को 13 दिन हो चुके हैं. ड्रोन और मिसाइलों की बरसात अब भी जारी है. बम और गोला-बारूद से सबकुछ तबाह हो चुका है. पूरा पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर है, जिसमें चिंगारी भड़क उठी है. समय रहते अगर इस युद्ध की आग पर पानी नहीं डाला गया तो पूरी दुनिया विनाशलीला देखेगी. मगर पश्चिम एशिया की इस तबाही को भारत रोक सकता है. भारत वह देश है, जिसके दोनों पक्षों से बेहतर संबंध हैं. भारत वैसे भी शांति का पक्षधर रहा है.
दरअसल, भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करवा सकता है. बीते दिनों यह बात संयुक्त अरब अमीरात ने कही थी. यूएई का तो यहां तक कहना है कि पीएम मोदी के महज एक फोन कॉल से यह युद्ध रुक सकता है. जी हां, भारत में यूएईए यानी संयुक्त अरब अमीरात के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने कहा था कि पीएम मोदी का सिर्फ एक फोन कॉल इस जंग को खत्म कर सकता है. उन्होंने तर्क दिया था कि पीएम मोदी का खाड़ी देशों में काफी सम्मान है. उन्होंने यह भी कहा था कि यूएई अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी को किसी अन्य के खिलाफ नहीं करने देगा.
अब ईरान ने भी भारत के रुख की तारीफ की है. उसने माना है कि भारत इस जंग को खत्म करने में रचनात्मक भूमिका निभा रहा है. पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच गुरुवार रात को फोन पर बातचीत हुई. उस बातचीत के बाद ईरान ने जो बयान दिया, उसमें ही भारत के लिए तारीफ थी. खुद ईरान का कहना है कि भारत ने ईरान जंग खत्म करने की पूरी कोशिश की है और अब भी कर रहा है. भारत ने रचनात्मक भूमिका निभाई है. इतना ही नहीं, ईरान ने कहा कि भारत ने ने कहा है कि ईरान उसका दोस्त है. ईरान के मुताबिक, जंग में भारत ने संतुलित भूमिका निभाई.
चलिए जानते हैं कि ईरान ने भारत पर कैसे भरोसा जताया है?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फोन पर हुई बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संतुलित और रचनात्मक भूमिका निभाई है और तनाव कम करने की कोशिश की है.
पेजेशकियान ने कहा कि ईरान क्षेत्र में अस्थिरता नहीं चाहता. हालिया हमलों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के बावजूद ईरान भारत और अन्य मित्र देशों के साथ ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों के जरिए सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.
ईरान का यह कहना कि भारत का जंग पर रुख संतुलित है, यह अपने आप में यह भरोसा है कि ईरान और भारत अच्छे दोस्त हैं.
भारत पर कैसे है ईरान का सॉफ्ट कॉर्नर
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल ने अटैक किया. इसके बाद ईरान ने बदला लेने को नई चाल चली. उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया. इसके बाद पूरी दुनिया में खलबली मची. मगर ईरान ने भारत संग दोस्ती निभाई. उसने भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया. यही कारण है कि भारतीय झंडे वाले दो जहाज होर्मुज को पार कर सके. भार और ईरान की दोस्ती का यह नतीजा है कि ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज पार करने की अनुमति दे दी. जबकि दूसरे देशों के जहाज अभी भी अटके हैं.
जयशंकर की डिप्लोमेसी आई काम
सूत्र बताते हैं कि जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अरागची की हालिया कॉल में यह फैसला हुआ. ईरान ने कहा कि भारतीय जहाजों को नोटिफाई करके आने पर सुरक्षित पास मिलेगा. वैसे भी भारत की यह सफलता सिर्फ संयोग नहीं. भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है. पीएम मोदी ने गुरुवार को जब पेजेशकियान से बातचीत की तो उनकी बातचीत का सार भी यही था. पीएम मोदी ने ईरान से शांति की अपील की. ईरान भी जानता है कि पीएम मोदी इस जंग को खत्म करवा सकते हैं. फिलहाल, यह संकट सिर्फ भारत के लिए नहीं, पूरी दुनिया के लिए है. तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ेगी और गैस को लेकर अभी से ही संकट की आहट सुनाई देने लगी है.
ईरान जंग का अंजाम क्या होगा? आखिर कौन इस विनाशकारी युद्ध को रुकवाएगा? किसके पास है अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग खत्म करवाने की ताकत? अब तक इन सवालों के जवाब…
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