'हमें बच्चों को पढ़ाने दो... बाबूगिरी मत कराओ', छत्तीसगढ़ में गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से परेशान शिक्षकों की प्रशासन से गुहार
Updated on
07-08-2026 02:14 PM
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 30 हजार से अधिक शिक्षक पद रिक्त होने के बावजूद कार्यरत शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर बस्तर जिले के तीन प्रमुख शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने बुधवार शाम स्कूल की छुट्टी के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर आकाश छिकारा को ज्ञापन सौंपा और अपनी समस्याओं से अवगत कराया
कलेक्टर के निर्देश पर अपर कलेक्टर सीपी बघेल के साथ विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि यदि गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम नहीं किया गया तो शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम प्रभावित होने के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
'बच्चों को पढ़ाने दें'
शिक्षक संगठनों ने कहा कि उनका मूल दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और ऑनलाइन कार्यों के कारण शिक्षण प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि उन्हें बाबूगिरी से मुक्त कर केवल पढ़ाने का अवसर दिया जाए।
बस्तर संभाग में 10 हजार से अधिक पद खाली
छग अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के जिला संयोजक गजेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि केवल बस्तर संभाग में ही शिक्षकों के 10 हजार से अधिक पद रिक्त हैं। वहीं करीब 1300 स्कूल एकल शिक्षकीय हैं, जहां एक ही शिक्षक पूरे स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद शिक्षकों को मोबाइल एप पर 27 प्रकार की जानकारियां दर्ज करने, अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करने और कई विभागों से जुड़े ऑनलाइन कार्य करने पड़ते हैं। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
प्राथमिक और मिडिल स्कूलों पर सबसे अधिक असर
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रवीण श्रीवास्तव ने बताया कि गैर-शैक्षणिक कार्यों का सबसे अधिक दबाव प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के शिक्षकों पर है। बस्तर संभाग में ऐसे 9462 स्कूल हैं। इनमें कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां नेटवर्क की सुविधा नहीं है। ऐसे में शिक्षकों का पूरा दिन नेटवर्क वाले स्थान पर जाकर ऑनलाइन जानकारी भेजने में निकल जाता है।
एक शिक्षक को निभानी पड़ रही कई जिम्मेदारियां
समग्र शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष देवराज खूंटे ने बताया कि एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षक सुबह स्कूल पहुंचते ही वीएसके एप पर उपस्थिति दर्ज करने से लेकर कई ऑनलाइन कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में बिनोवा एप पर जानकारी भेजने का कार्य बंद हो चुका है, लेकिन बस्तर में यह प्रक्रिया अब भी जारी है। इसके अलावा प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियों की फोटो अपलोड करना भी अनिवार्य है।
प्रमाण पत्र से लेकर सर्वे तक की जिम्मेदारी
शिक्षक संगठनों ने बताया कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के जन्म, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाने में सहयोग करने के साथ-साथ अपार आईडी, छात्रवृत्ति ऑनलाइन प्रक्रिया, यू-डाइस फीडिंग, एफएलएन और उल्लास एप सहित कई अन्य कार्य भी करने पड़ते हैं। उनका कहना है कि अनावश्यक गैर-शैक्षणिक और ऑनलाइन कार्य तत्काल बंद किए जाने चाहिए। अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने शिक्षक संगठनों को आश्वस्त किया कि शिक्षा अधिकारियों की बैठक में उनकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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