Select Date:

CrPC की धारा 156(3) के तहत आदेश संज्ञान लेने से पहले का कदम, इस स्टेज पर CrPC की धारा 197 के तहत मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Updated on 25-09-2026 02:02 PM
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 (CrPC, अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3)) की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट का FIR दर्ज करने और जांच का आदेश देना संज्ञान लेने से पहले का कदम है। सरकारी कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए CrPC की धारा 197 (अब BNSS की धारा 218) के तहत पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत सिर्फ़ संज्ञान लेने के स्टेज पर होती है, न कि FIR दर्ज करने या जांच के स्टेज पर।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की प्राइवेट शिकायत पर कुछ पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR रद्द की।

अपीलकर्ता का मामला यह है कि अपने पुराने बिज़नेस पार्टनर के साथ बिज़नेस विवाद के बाद उसे एक क्रिमिनल केस में झूठा फंसाया गया, गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया और पुलिस अधिकारियों ने उसे अपने बिज़नेस के हितों को छोड़ने वाले दस्तावेज़ों पर साइन करने के लिए मजबूर किया। इन घटनाओं के बाद उसने लोकल पुलिस और बाद में डायरेक्टर जनरल (DG) और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (IGP) के पास शिकायतें दर्ज कराईं। इन सभी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बाद में उसने CrPC की धारा 200 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 223) के तहत एक प्राइवेट शिकायत दर्ज कराई। मजिस्ट्रेट ने CrPC की धारा 156(3) के तहत चार पुलिस अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

संबंधित पुलिस अधिकारियों ने FIR रद्द कराने के लिए CrPC की धारा 482 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528) के तहत कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। हाई कोर्ट ने कार्यवाही को इस आधार पर रद्द किया कि सरकारी ड्यूटी के दौरान किए गए काम के लिए प्रॉसिक्यूशन (मुकदमा चलाने) के लिए CrPC की धारा 197 के तहत पहले से मंज़ूरी (सैंक्शन) की ज़रूरत थी। साथ ही अपीलकर्ता (शिकायतकर्ता) ने 'प्रियंका श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में तय गाइडलाइंस का उल्लंघन किया, क्योंकि उन्होंने पुलिस के पास CrPC की धारा 154 के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल किए बिना सीधे मजिस्ट्रेट से संपर्क किया।

हाईकोर्ट के फैसले से नाराज़ होकर शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट गए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 197 के तहत मंज़ूरी के बारे में हाई कोर्ट का नज़रिया "अपने आप में गलत" था। धारा 197(1) का ज़िक्र करते हुए, कोर्ट ने समझाया कि यह प्रावधान तभी लागू होता है जब कोई कोर्ट किसी अपराध का संज्ञान (कॉग्निज़ेंस) लेती है; यह FIR दर्ज करने या जांच करने के चरण में लागू नहीं होता।

अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ और कर्नाटक राज्य बनाम पास्टर पी. राजू मामलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने फिर से कहा:

“इसलिए मंज़ूरी की ज़रूरत केवल संज्ञान लेने के लिए एक ज़रूरी शर्त है, न कि FIR दर्ज करने या जांच करने के लिए। कोई भी ऐसी व्याख्या जो FIR दर्ज करने को पहले से मंज़ूरी पर निर्भर बनाती है, वह इस कानूनी व्यवस्था को उलट देगी और जांच से जुड़े प्रावधानों को बेकार कर देगी।”

बेंच ने कहा कि आपराधिक कानून की प्रक्रिया एक क्रम में चलती है - जैसे संज्ञेय अपराध की जानकारी, FIR दर्ज करना, पुलिस रिपोर्ट दाखिल करना - और उसके बाद ही मंज़ूरी और संज्ञान का सवाल उठता है। चूंकि इस मामले में मजिस्ट्रेट का आदेश CrPC की धारा 156(3) के तहत पारित किया गया और यह संज्ञान लेने के बराबर नहीं था, इसलिए उस चरण में FIR रद्द करने का आधार मंज़ूरी का न होना नहीं हो सकता।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 25 September 2026
महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छह स्टूडेंट्स को निलंबित कर दिया गया.अब ये सभी अपना निलंबन रद्द कराने और अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर वापस लेने…
 25 September 2026
ट्रेड वॉर में संघर्षविराम को केवल कुछ महीनों के लिए बढ़ाया गया यानी नवंबर से जनवरी तक. जब ट्रेड वॉर रोकने की सहमति बनी थी तो दोनों देशों ने एक-दूसरे…
 25 September 2026
नोएडा की डीएम मेधा रूपम के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर अधिवक्ताओं के एक संगठन ने जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के एक ही दिन…
 25 September 2026
अंग्रेजी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में कहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में भारत निर्वाचन आयोग के…
 25 September 2026
अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग लिया है। साथ ही ऐसा नहीं होने पर नए आंदोलन की भी चेतावनी दी है।…
 25 September 2026
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 (CrPC, अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3)) की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट…
 25 September 2026
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 311(1) के तहत संवैधानिक सुरक्षा तभी लागू होती है, जब हटाने वाला अधिकारी, नियुक्ति करने वाले अधिकारी से निचले पद का हो।…
 24 September 2026
बांग्लादेश ने हिलसा मछली के इंपोर्ट परमिट रद्द कर दिए। वह व्यापार रुक गया जिसके तहत देश के मछली व्यापारियों ने पिछले कुछ महीनों में लगभग 550 टन भारतीय हिलसा…
 24 September 2026
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में भीषण आग लग गई. इस हादसे में 9 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कुछ यात्रियों ने कूदकर अपनी जान…
Advt.