होर्मुज़ स्ट्रेट क्या ईरान जंग में ट्रंप के 'गले की फांस' बनता जा रहा है?
Updated on
16-03-2026 10:29 AM
ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग ने दुनिया भर की एनर्जी सिक्योरिटी को संकट में डाल दिया है क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट लगभग बंद है जिससे दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा गुजरता है.
इसकी वजह से कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के आस पास पहुंच गए हैं और कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है. ईरान युद्ध से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले कच्चे तेल के 68 से 70 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहे थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका 'हर हाल में' होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलेगा. उन्होंने कई देशों को अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है.
हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट सिर्फ 'दुश्मन देशों के जहाजों' के लिए बंद है.
शनिवार को भारत सरकार ने बताया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से दो जहाज़ शिवालिक और नंदा देवी, एलपीजी लेकर गुज़र चुके हैं और भारत पहुंचने वाले हैं, जहां इस समय एलपीजी संकट की ख़बरें सुर्खियों में हैं.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, ''ईरान सैन्य ताक़त के मामले में अमेरिका और इसराइल से कमज़ोर है. इसलिए वह पड़ोसी देशों के साथ-साथ समुद्री जहाजों और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है, ताकि ईंधन सप्लाई को बाधित किया जा सके और तेल-गैस बाज़ार अस्थिर हो जाए. ईरान को उम्मीद है कि इससे डोनाल्ड ट्रंप पर लड़ाई खत्म करने का दबाव बढ़ेगा.'
उधर, ट्रंप को अपने देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. पेट्रोल पंपों पर ईंधन की क़ीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं. आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर तेल के दाम इसी रफ़्तार से बढ़े तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को ख़ासा नुकसान पहुंचेगा.
कई राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि ट्रंप ने ईरान की प्रतिक्रिया और उसकी मजबूती का ग़लत आकलन किया. अमेरिकी मीडिया में भी इस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और स्वाभाविक है कि ट्रंप पर दबाव बढ़ गया है.
ट्रंप का ताज़ा बयान इसी संदर्भ में देखा जा रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर 14 मार्च को लिखा, "कई देश, ख़ासकर वे देश जो ईरान की ओर से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश से प्रभावित हैं, इस रास्ते को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर युद्धपोत भेजेंगे."
"हम पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता का 100 प्रतिशत नष्ट कर चुके हैं. लेकिन उनके लिए एक-दो ड्रोन भेजना, कोई समुद्री बारूदी सुरंग लगाना या इस जलमार्ग के किनारे या अंदर कहीं कम दूरी की मिसाइल दागना आसान है, चाहे वे कितने ही बुरी तरह हारे क्यों न हों."
"उम्मीद है कि चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और दूसरे प्रभावित देश भी इस इलाक़े में अपने जहाज भेजेंगे, ताकि होर्मुज़ स्ट्रेट अब ऐसे देश से ख़तरा न बने जिसके पूरे को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया है. हर हाल में हम जल्द ही होर्मुज़ स्ट्रेट को खुला, सुरक्षित और स्वतंत्र बना देंगे."
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, "अमेरिका ने ईरान को सैन्य, आर्थिक और हर तरह से पूरी तरह से परास्त कर दिया है, लेकिन होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल हासिल करने वाले दुनिया के देशों को उस रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और हम इसमें भरपूर सहायता करेंगे. अमेरिका उन देशों के साथ तालमेल भी करेगा ताकि सब कुछ जल्द, सुचारू रूप से हो सके."
इससे पहले अमेरिका और इसराइल ने ईरान के खार्ग द्वीप पर 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया. यह अहम द्वीप उत्तरी खाड़ी में है और ईरान के क़रीब 90 फ़ीसदी तेल निर्यात का केंद्र भी है.
ईरान का कहना है कि यहां उसके तेल ढांचे को कोई नुक़सान नहीं हुआ.
ईरान ने कहा है कि अगर उसके ऊर्जा क्षेत्र पर हमला हुआ तो वह अमेरिका से जुड़े सभी ऊर्जा क्षेत्रों पर हमला करेगा.
शनिवार को यूएई के फ़ुजैरा बंदरगाह पर हमला हुआ. यह जगह ओमान की खाड़ी में स्थित मध्य पूर्व की सबसे बड़ी ऑयल फ़ैसिलिटीज़ में से एक है.
ईरान की जंग तीसरे हफ़्ते में प्रवेश करने जा रही है और ऊर्जा केंद्रों पर बढ़ते हमलों से जंग के जल्द ख़त्म होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं
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