चीन ने ईरान का साथ दिया तो क्या बेअसर होंगे अमेरिका के प्रतिबंध?
Updated on
26-08-2026 01:07 PM
ईरान ने कहा है कि उसे यक़ीन है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के विस्तार का मुक़ाबला कर सकता है.
अमेरिका ने ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग-थलग करने के प्रयास में उसके ख़िलाफ़ "आर्थिक डी-डे" की घोषणा की है.
ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनिज़ादेह ने कहा कि उनका देश प्रतिबंधों के लिए "पूरी तरह से तैयार" है. उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका को 'एक और हार' का सामना करना पड़ेगा.
नए प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान के साथ वित्तीय साझेदारी करने वाले किसी भी देश को अलग-थलग कर दिया जाएगा.
इसके अलावा अगर ईरान के साथ व्यापार करने वाले बैंक और व्यवसाय ईरान के साथ संबंध नहीं तोड़ते हैं तो उन्हें भी अलग-थलग कर दिया जाएगा.
इन क़दमों से पहले व्हाइट हाउस ने संघर्ष ख़त्म करने की कोशिश में कई बार अपना फ़ैसला बदला और समयसीमा बढ़ाई थी.
बेसेंट ने इन क़दमों को ईरान के ख़िलाफ़ "अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला" बताया. उनके मुताबिक इससे "राजस्व के हर संभावित स्रोत को रोक दिया जाएगा."
कुछ अर्थशास्त्रियों ने पूछा है कि क्या ताज़ा प्रतिबंध असरदार होंगे, क्योंकि इनकी सफलता ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर निर्भर है.
इन साझेदारों में चीन भी शामिल है, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा ख़रीदार है. चीन ने पिछले अमेरिकी प्रतिबंधों को नज़रअंदाज़ किया है और ईरान के साथ व्यापार करना जारी रखा है.
पिछले हफ़्ते, ईरान के एक अन्य व्यापारिक साझेदार, संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि वह ईरान के साथ सभी वित्तीय लेनदेन रोक रहा है.
लेकिन अमेरिका की घोषणा के कुछ घंटों बाद, ईरान ने कहा कि उसे विश्वास है कि वह अन्य देशों के साथ व्यापार जारी रखेगा.
मदनिज़ादेह ने कहा कि 'न तो चीन और न ही रूस ने अमेरिकी क़दमों' को स्वीकार किया है. उन्होंने भविष्यवाणी की कि अन्य देश भी अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध करेंगे.
उन्होंने सरकारी टेलीविजन को बताया, "सरकार तैयार है और इन घटनाओं के प्रबंधन के लिए सरकार के पास दो साल की योजना है. हम इन योजनाओं का लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे."
उन्होंने कहा, "हमारे पास अपने तरीक़े भी हैं और हम जानते हैं कि ये खेल कैसे खेला जाता है."
अमेरिका की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने कहा कि वह इसे 'अवैध एकतरफ़ा प्रतिबंध' क़रार देते हुए इसका कड़ा विरोध करता है.
चीन का क्या रुख़ है?
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियांग ने कहा कि आर्थिक दबाव की रणनीति से समस्याओं का समाधान नहीं होगा और बीजिंग अपने हितों की रक्षा करेगा.
इस युद्ध के कारण दुनिया में तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं, और ताज़ा ख़तरे के जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध जारी रहा तो वह इस क्षेत्र से सभी तेल निर्यात बंद कर देगा.
रॉयटर्स के मुताबिक़, ईरान ने जहाज़ों को बिना अनुमति के होर्मुज़ से न गुज़रने की नई चेतावनी भी जारी की है. दुनिया का लगभग 20 फ़ीसदी तेल और गैस इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुज़रता है.
लेकिन फ़रवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने इस प्रवाह में प्रभावी रूप से रुकावट पैदा की है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर तेल की क़ीमतें बढ़ गई हैं.
सोमवार को प्रतिबंधों का एलान करते हुए बेसेंट ने कहा कि अमेरिका "ईरान के वैश्विक स्तर पर वित्तीय संबंधों के ख़िलाफ़ एक आर्थिक हमला" शुरू कर रहा है.
उन्होंने कहा, "ईरान के सामने अब बहुत स्पष्ट विकल्प है, जिसमें केवल दो ही रास्ते हैं: पूरी तरह वैश्विक अलगाव... या वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने के मौक़े के साथ सामान्य स्थिति में वापसी का रास्ता."
वित्त मंत्री ने दावा किया कि अमेरिका "ईरान के ख़तरे की देखरेख नहीं कर रहे हैं, हम इसे समाप्त कर रहे हैं."
बेसेंट ने कहा ईरान प्रतिबंधों से बचने के लिए जिन तरीक़ों का इस्तेमाल करता रहा है उनके मंत्रालय ने उनकी पहचान कर ली है.
उन्होंने कहा कि अमेरिका डिजिटल संपत्ति, प्रौद्योगिकी, सोना, विमानन और शिपिंग के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने लगभग 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाज़ों पर प्रतिबंध भी लगाए हैं.
अमेरिका ने ईरान की सहायता करने या उसके साथ व्यापार करने वाली सरकारों और संस्थाओं को चेतावनी दी है.
उन्होंने कहा कि ट्रंप दुनिया के नेताओं को फ़ोन करके "ईरान के साथ अपने संबंधों को समाप्त करने के लिए ख़ास अनुरोध करेंगे."
उन्होंने कहा कि लोगों को नए प्रतिबंधों को समझने के लिए समय देना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा: "उन्हें पता होना चाहिए कि हम बहुत तेज़ी से कार्रवाई करेंगे और हम इस मामले में गंभीर हैं."
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