असम में 84.42% वोटिंग ने तोड़ दिए पुराने सारे रिकॉर्ड, क्या हिमंता की 'साख' बचेगी या गोगोई करेंगे 'कमाल'?
Updated on
09-04-2026 10:57 PM
असम की 126 विधानसभा सीटों पर हुए वोटिंग ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शाम 5 बजे तक राज्य में 84.42% मतदान हो चुका है। चूंकि अभी भी कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अंतिम मतदान प्रतिशत 88% से 90% के करीब पहुंच सकता है। यह आंकड़ा असम के चुनावी इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है. असम में हमेशा से भारी मतदान की परंपरा रही है, लेकिन इस बार के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. 2021 विधानसभा चुनाव में भी वोटिंग प्रतिशत 82.42% रहा था.
मतदान खत्म होने से पहले ही इस बार पिछले चुनाव का रिकॉर्ड टूट गया है। जानकारों का मानना है कि जब कतारों में लगे वोटरों का अंतिम डेटा आएगा, तो यह वृद्धि 5-7% तक हो सकती है.
हिमंता बनाम गौरव में कौन मारेगी बाजी?
असम का यह चुनाव सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस के युवा चेहरे गौरव गोगोई के बीच साख की लड़ाई बन गया है। हिमंता बिस्वा सरमा असम में ‘ओरुनोदोई’ योजना, जो महिला लाभार्थियों के लिए आर्थिक मदद और ‘डबल इंजन’ विकास के भरोसे हैं। भारी मतदान को भाजपा अपना समर्थन मान रही है, विशेषकर महिला और स्वदेशी वोटरों के बीच गजब का उत्साह देखने को मिला.
गोगई क्या करेंगे कमाल?
वहीं, जोरहाट से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने वाले गौरव गोगोई ने इस बार ‘महंगाई’ और ‘भ्रष्टाचार’ को मुद्दा बनाया है। विपक्ष का तर्क है कि भारी मतदान सत्ता विरोधी लहर Anti-incumbency का प्रतीक है, जहां जनता बदलाव के लिए घर से बाहर निकली है।
क्या गद्दी बचेगी या सत्ता पलटेगी?
इतिहास गवाह है कि असम में भारी मतदान अक्सर मौजूदा सरकार के लिए चुनौती लेकर आता है, लेकिन हिमंता बिस्वा सरमा की सांगठनिक पकड़ और ‘लाभार्थी’ वर्ग इस थ्योरी को पलट भी सकता है। सीएए और परिसीमन (Delimitation) का सीधा फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है। इसके साथ ही युवा वोटर 18-19 साल के नए मतदाताओं की बड़ी संख्या गौरव गोगोई की ओर आकर्षित हुई है, जो चुनाव का पासा पलट सकते हैं।
क्या हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेकर इतिहास रचेंगे, या गौरव गोगोई अपने पिता तरुण गोगोई की विरासत को वापस लाएंगे? 84.42% की यह गूंज किसके पक्ष में है, इसका फैसला 4 मई 2026 को मतगणना के दिन होगा। फिलहाल, असम की जनता ने अपना फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है.
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