'अभी भी महागठबंधन सरकार बन सकती है', 85 प्लस 41 के सहारे राजद नीतीश पर डाल रहा डोरे
Updated on
09-04-2026 04:54 PM
एक तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी मंत्री विजय कुमार चौधरी भले नई सरकार बनने के दृश्य को सिलसिलेवार ढंग से मीडिया के सामने बता रहे हैं। वही दूसरी तरफ
बिहार की सियासत में विपक्ष अब आखिरी दांव के रथ पर सवार हो गया है। और वो भी ऐसे-वैसे नहीं, बल्कि भावनात्मक बहाव से लैस हो कर। शब्द भी 'दिल्ली नहीं जाइए, यहीं सरकार बनाइए।' यह भावनात्मक अपील JDU के किसी कार्यकर्ता की नहीं, बल्कि राजद सुप्रीमो लालू यादव के करीबी और तेजस्वी यादव के प्रमुख रणनीतिकार विधायक और राजद के प्रधान महासचिव रणविजय साहू की है।
बीजेपी नीतीश को कर रही है जबरदस्ती पैक- राजद
राजद के प्रधान महासचिव रणविजय साहू का कहना है कि वो उस जनता के प्रति भावुक हैं जो वर्ष 2025 से तीस ,फिर से नीतीश के साथ खुद के भविष्य की डोर थमा गए हैं। नीतीश कुमार संदर्भित इस स्लोगन के बहाने राजद के महासचिव रणविजय साहू कहते हैं कि जनता ने 202 सीटें जीताकर बिहार को बेहतरी के लिए नीतीश कुमार के हाथ 2030 तक के लिए सौंपा। राजद नेतृत्व भी यह कह चुका है कि जनता ने जब नीतीश कुमार को पांच सालों का मैंडेट दिया है तो यह लगभग तीन माह में ही विदाई क्यों? यह तो मैंडेट का अपमान है। आखिर ऐसा क्या है कि भाजपा नीतीश कुमार को जबरदस्ती दिल्ली पैक कर रही है। क्या भाजपा अब अपने मुद्दा स्थापित करने की पारी खेल रही है? '25 से 30, फिर से नीतीश' क्या नीतीश कुमार को आगे कर सिर्फ मेंडेट हासिल करने का बहाना था।
राजद का ऑफर बिलकुल खुला है
राजनीति में इसे एक तरह से खुला ऑफर माना जा रहा हे। ऐसा नहीं कि नीतीश कुमार और महागठबंधन की साथ मिल कर कभी सरकार नहीं बनी। 2014 के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरण बने। 22 फरवरी 2015 को नीतीश कुमार चौथी बार मुख्यमंत्री बने। उसी वर्ष विधानसभा चुनाव के बाद महागठबंधन को जीत मिली और 20 नवंबर 2015 को नीतीश ने शपथ ली। जुलाई 2017 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़कर फिर से एनडीए का दामन थाम लिया। अगस्त 2022 में उन्होंने फिर गठबंधन बदला और आरजेडी-कांग्रेस के साथ सरकार में मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2024 में उन्होंने फिर से पाला बदल लिया।
राजद को अभी भी नीतीश से आस
इस बार भी राजद के प्रधानसचिव रणविजय साहू ने कहा कि बीजेपी को रोकने के लिए राजद ने हमेशा नीतीश कुमार को साथ दिया है। इस बार भी वैसी परिस्थिति बनती है तो हमारा नेतृत्व विचार करेगा। यह सब वक्त और परिस्थिति के साथ निर्णय किया जाता है। लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में राजद ने भाजपा जैसी सांप्रदायिक पार्टी की ताकत को हमेशा रोकने का काम किया है।
जानिए राजद कैसे बना सकती है नीतीश के साथ आने पर सरकार
राजद के पास 25 विधायक, लेफ्ट-AIMIM-BSP IIP जोड़कर संख्या 41
JDU के पास 85 विधायकों की संख्या, इसी के भरोसे राजद
अगर महागठबंधन के साथ नीतीश आए तो संख्या हो जाएगी 126
जानिए, सत्ता के किस फॉर्मूले के तहत राजद का दांव
यह भावनात्मक अपील भविष्य की राजनीति में उथल पुथल के लिए काफी है। आने वाली सरकार को तो साथी दल की तरफ से सत्ता तो दी जा रही है, पर वह भी सशर्त। नीतीश की पटरी पर ही भविष्य की सरकार की मियाद है। नीतीश की पटरी पर से जिस दिन भाजपा उतरी और नीतियों में भगवाकरण को शामिल किया, हो सकता है कि उस दिन राजद की ये अपील काम आ जाए। ऐसे में हो सकता है कि तब बिहार नए समीकरण और तीसरी बार महागठबंधन की सरकार बनते देख ले। हालांकि ये सब अभी कयास ही हैं। हालांकि राजद को जदयू के 85 विधायक और खुद समेत विपक्ष के 41 विधायक मिलकर 126 विधायकों की बहुमत वाली सरकार के आंकड़े की आस है।
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