आषाढ़ी एकादशी पर भक्ति और उल्लास से निकली समग्र मराठी समाज की भव्य दिंडी यात्रा
Updated on
26-07-2026 07:11 PM
17वें वर्ष आयोजित यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, लेझिम, भजन-कीर्तन और संत स्वरूपों ने मोहा मन
भोपाल। आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर समग्र मराठी समाज द्वारा शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ पारंपरिक दिंडी यात्रा का भव्य आयोजन किया गया। यह यात्रा 1100 क्वार्टर से प्रारंभ होकर दत्त मंदिर तक निकाली गई। इस वर्ष दिंडी यात्रा का 17वां आयोजन रहा, जिसमें समाज के सभी आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कोलार महाराष्ट्र मंडल की संयोजिका पूनम कुलकर्णी ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दिंडी यात्रा में समाज के वरिष्ठजनों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभी श्रद्धालु पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सुसज्जित होकर यात्रा में शामिल हुए, जिससे पूरे मार्ग पर भक्तिमय वातावरण निर्मित हो गया।
यात्रा के दौरान महिलाओं ने लेझिम, डांडिया और मंजीरों की मधुर ताल पर "विठ्ठल... विठ्ठल... विठ्ठल... हरि ओम विठ्ठला" के जयघोष और भजनों से वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। महिलाओं को लेझिम का प्रशिक्षण पूनम कुलकर्णी के मार्गदर्शन में अल्पिता घोंघे द्वारा दिया गया था। वहीं युवाओं को श्री रंग नृत्यालय की संचालिका मांडवी अरोणकर ने विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया, जिसके चलते उनके प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य आकर्षण का केंद्र बने।
दिंडी यात्रा में छोटे-छोटे बच्चों ने संतों एवं भगवान के विभिन्न स्वरूपों की वेशभूषा धारण कर सभी का मन मोह लिया। भगवान विठ्ठल, संत तुकाराम, भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी की वेशभूषा में सजे बच्चे आकर्षक बग्गी पर विराजमान थे, जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, जयघोष और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच निकली दिंडी यात्रा ने आषाढ़ी एकादशी के आध्यात्मिक महत्व को जीवंत कर दिया। दत्त मंदिर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भगवान विठ्ठल-रुक्मिणी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि तथा मंगल की कामना की। आयोजन ने मराठी संस्कृति, संत परंपरा और सामूहिक धार्मिक आस्था का सुंदर परिचय प्रस्तुत किया।
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