नेपाल की विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित आत्माओं के लिए ब्रह्माकुमारीज़ ने की सामूहिक प्रार्थना
Updated on
28-08-2026 12:46 PM
सुख-शांति भवन में राजयोग ध्यान द्वारा शांति, शक्ति, साहस और सुरक्षा के शुभ संकल्प प्रेषित
भोपाल। नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर के टूटने से आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। अनेक लोगों की मृत्यु हुई है तथा बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय यात्रियों सहित अनेक पर्यटकों के भी प्रभावित होने की खबरों ने इस त्रासदी को और अधिक हृदयविदारक बना दिया है। ऐसी विषम एवं संवेदनशील घड़ी में ब्रह्माकुमारीज़ सुख-शांति भवन मेडिटेशन रिट्रीट सेंटर, नीलबड़, भोपाल द्वारा इसे केवल एक समाचार नहीं, बल्कि मानवता के प्रति अपनी आध्यात्मिक जिम्मेदारी मानते हुए नेपाल के प्रभावित लोगों के लिए सामूहिक राजयोग ध्यान एवं विशेष प्रार्थना की गई।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों ने कुछ समय के लिए सभी बाहरी विचारों से स्वयं को मुक्त कर शांत स्वरूप आत्मा की स्थिति में स्थित होकर परमपिता परमात्मा शिव से अपना संबंध जोड़ा। इसके पश्चात नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों, पीड़ित परिवारों, यात्रियों तथा राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे लोगों के प्रति शांति, शक्ति, प्रेम, साहस और सुरक्षा के शुभ संकल्प प्रेषित किए गए।
दुख की घड़ी में मौन प्रार्थना बनी आध्यात्मिक सेवा
सामूहिक ध्यान के दौरान सभी के मन में एक ही भावना थी—
“जो आत्माएं इस आपदा से प्रभावित हैं, उन्हें परमात्मा से आंतरिक शक्ति मिले; जो सुरक्षित हैं वे सकुशल अपने परिवारों तक पहुंचें; जो लापता हैं उनका शीघ्र पता चले और राहत एवं बचाव कार्यों में लगे प्रत्येक व्यक्ति को शक्ति, साहस एवं सफलता प्राप्त हो।”
ब्रह्माकुमारीज़ के अनुसार, जब अनेक मन एक साथ शुद्ध एवं शक्तिशाली संकल्प करते हैं तो वह वातावरण में सकारात्मकता और शांति का संचार करने वाली आध्यात्मिक सेवा बन जाता है। राजयोग ध्यान में मन को परमात्मा से जोड़कर स्वयं को शांति, प्रेम एवं शक्ति से भरने और फिर इन्हीं शुभ भावनाओं को विश्व की ओर प्रेषित करने का अभ्यास कराया जाता है।
इस दौरान विशेष रूप से यह शुभ संकल्प किया गया—
“नेपाल की सभी प्रभावित आत्माएं परमात्म-स्मृति से शांति और शक्ति का अनुभव करें। जो जहां हैं सुरक्षित रहें। लापता लोगों का शीघ्र पता चले। राहत एवं बचाव कार्य सफल हों। प्रत्येक परिवार को धैर्य, साहस और सहयोग मिले तथा प्रकृति का यह प्रकोप शीघ्र शांत हो।”
हर पीड़ित के साथ संवेदना, हर बचावकर्मी के साथ शुभकामना
सभी ने कुछ समय मौन में स्थित होकर नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों की ओर शुभ संकल्प भेजे। प्रभावित परिवारों के दुःख में संवेदना व्यक्त करते हुए यह भावना रखी गई कि इस कठिन समय में कोई भी व्यक्ति स्वयं को अकेला न महसूस करे।
विशेष रूप से राहत एवं बचाव दलों, सेना, पुलिस, चिकित्सकों, स्थानीय स्वयंसेवकों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी शक्ति और सफलता की प्रार्थना की गई, जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन बचाने के प्रयास में जुटे हैं।
मानवीय संवेदना से आध्यात्मिक एकता तक
ब्रह्माकुमारीज़ का मानना है कि आपदा की घड़ी में सहायता केवल भौतिक साधनों से ही नहीं, बल्कि शुभ भावना, शुभ कामना और आध्यात्मिक शक्ति के माध्यम से भी की जा सकती है। सुख-शांति भवन में की गई यह सामूहिक प्रार्थना इसी मानवीय संवेदना का एक छोटा-सा प्रयास थी—जिसका संदेश है कि दुःख कहीं भी हो, संवेदनशील हृदय उसके साथ खड़ा होता है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर हुई इस आपदा में 160 से अधिक लोगों की मृत्यु की रिपोर्ट सामने आई है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। प्रभावित क्षेत्र में घरों, सड़कों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। अनेक भारतीय नागरिकों, विशेषकर कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े यात्रियों के लापता होने की खबरों ने भारत में भी गहरी चिंता उत्पन्न की है। बचाव एवं राहत अभियान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच लगातार जारी हैं।
अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प किया—
“सर्व आत्माओं के प्रति शुभ भावना… शुभ कामना… और परमात्म शक्ति।”
सभी ने परमपिता परमात्मा से प्रार्थना की कि नेपाल की इस कठिन घड़ी में प्रत्येक प्रभावित आत्मा को शांति मिले, प्रत्येक परिवार को शक्ति मिले, लापता लोगों का शीघ्र पता चले, राहत एवं बचाव कार्य सफल हों और शीघ्र ही परिस्थितियां सामान्य हों।
यही हमारी ओर से नेपाल के लिए आध्यात्मिक सेवा, संवेदना और मानवता को समर्पित एक सामूहिक प्रयास है।
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