सीजेपी का आरोप- देश भर से जंतर-मंतर आ रहे समर्थकों को हिरासत में लिया गया
Updated on
09-10-2026 09:51 PM
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आरोप लगाया है कि देशभर से उसके 10 हज़ार सपोर्टर्स को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया है कि ये लोग कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक, अलग-अलग छात्र संगठनों, किसान, दलित संगठनों और राजनीतिक दलों से ताल्लुक रखते हैं.
उन्होंने लिखा, यह इमरजेंसी है.
इसके साथ ही आशुतोष रांका की पोस्ट को शेयर करते हुए सीजेपी के सह-संस्थापक सौरव दास ने एक्स पर लिखा, "भारत में इमरजेंसी लगा दी गई है."
दरअसल 10 अक्तूबर को सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है.
ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और सीजेपी ने एसआईआर के ज़रिए वोटरों से उनके वोटिंग अधिकार छीनने का आरोप लगाया है.
बीते दिनों अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग में अन्य दो चुनाव आयुक्तों की अनदेखी करते हुए एसआईआर से जुड़े कई फ़ैसले लिए थे.
इस रिपोर्ट के बाद भारत में सियासी तौर पर काफ़ी हंगामा मचा हुआ है. हालांकि चुनाव आयोग ने बाद में इस मुद्दे पर सफ़ाई भी दी, लेकिन ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विपक्ष के आरोप लगातार जारी हैं.
सीजेपी के सह-संस्थापक सौरव दास ने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि राजस्थान पुलिस उनके सह प्रभारी दीपक बालियान को पकड़ कर अज्ञात जगह पर ले गई है.
सौरव दास ने लिखा, "हमें उनकी जान को लेकर चिंता हो रही है. बीजेपी एक माफ़िया डॉन पार्टी की तरह बर्ताव कर रही है. हालांकि यह हमें नहीं रोक सकता है. आप कितने को हिरासत में लेंगे. अब पूरे भारत को सड़कों पर निकलना होगा."
जयपुर से बीबीसी के सहयोगी पत्रकार मोहर सिंह मीणा से बातचीत में सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि राजस्थान में सीजेपी के राष्ट्रीय सह-प्रभारी दीपक बालियान, कोर टीम सदस्य गीगराज जोडली समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हाउस अरेस्ट किया है.
उन्होंने कहा, "प्रदेश के कई इलाक़ों में सीजेपी कार्यकर्ताओं के घर पुलिस पहुंची है और उन्हें प्रोटेस्ट में जाने से मना किया गया है."
सीजेपी के एक कार्यकर्ता के पिता ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बीबीसी से कहा है, "पुलिसवाले हमारे घर आकर हमारे बेटे को दिल्ली नहीं जाने देने के लिए कह कर गए हैं."
मोहर सिंह मीणा के मुताबिक़ इससे पहले गुरुवार रात अलवर के कठूमर में सीजेपी के राष्ट्रीय सह-प्रभारी दीपक बालियान को पुलिस ने घर से हिरासत में लिया.
इसके बाद सीजेपी प्रवक्ता और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर बालियान के हिरास्त में लिए जाने पर जल्द रिहा करने की मांग की. इसके कई घंटे बाद देर रात बालियान को पुलिस ने छोड़ दिया.
पूरे मामले पर सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बीबीसी से फोन पर बातचीत में कहा, "हमारे कई पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हाउस अरेस्ट करने के साथ ही कार्यकर्ताओं को घरों पर जा कर धमकाया भी है. ऐसे मामलों की बड़ी संख्या है."
इस मामले में मोहर सिंह मीणा ने पुलिस का पक्ष जानने के लिए राजस्थान पुलिस के महानिदेशक राजीव शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया है. हालांकि, फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो सका है.
अभिजीत दीपके ने लगाया तानाशाही का आरोप
मध्यप्रदेश के इटारसी स्टेशन पर दिल्ली जा रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 16 कार्यकर्ताओं को गोवा एक्सप्रेस से उतारा गया है.
दावा किया जा रहा है कि ये सभी 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे. इनमें 11 युवक और 5 युवतियां शामिल हैं.
भोपाल में बीबीसी के सहयोगी पत्रकार शुरैह नियाज़ी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने से बचती रही है लेकिन इटारसी थाना प्रभारी सौरभ पांडे ने केवल इतना बताया, "16 युवक-युवतियों को ट्रेन से उतारा गया है. यह लोग पुणे से दिल्ली जा रहे थे. उन्हें इटारसी के एक रिसॉर्ट में रखा गया है."
शुरैह नियाज़ी के मुताबिक़ पुलिस ने इन युवाओं को उतारने की वजह नहीं बताई है.
वहीं स्थानीय मीडिया का दावा है कि जीआरपी और स्थानीय पुलिस गोवा एक्सप्रेस के जनरल कोच में घुसी थी और जांच के बाद सीजेपी के 15-16 कार्यकर्ताओं को ट्रेन से उतार दिया. सभी कार्यकर्ता काले रंग के टी-शर्ट पहने थे, उसमें कई तरह के स्लोगन लिखे हुए थे.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया, "तेलंगाना के सीजेपी कार्यकर्ताओं को भोपाल में डिटेन कर लिया गया है. मध्य प्रदेश पुलिस ने उन्हें ट्रेन से डिटेन किया है. यह स्पष्ट तौर पर दिखाता है कि मोदी एक तानाशाह हैं.
'दिल्ली में मस्जिद पहुंचकर पुलिस ने की अपील'
गुरुवार को ही सीजेपी के सह-संस्थापक सौरव दास ने एक्स पर सुधीर सांगवान नाम के एक यूज़र की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, "तानाशाह की ओर से एक और ग़ैरक़ानूनी कार्रवाई."
सुधीर सांगवान ने अपनी पोस्ट में एक वीडियो शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि रात 11:30 बजे सीजेपी के एक कार्यकर्ता रोशन के घर पर कई पुलिस वाले पहुंचे थे.
सौरव दास ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में लिखा, "रात के 1 बजे हैं और दिल्ली पुलिस साउथ एक्सटेंशन में हमारे नॉर्थ ज़ोन कोऑर्डिनेटर मोहन यादव के घर में अवैध रूप से घुस रही है. वे उनकी पत्नी के साथ भी दुर्व्यवहार कर रहे हैं. उनके दो छोटे बच्चे हैं, जो इस समय गहरे सदमे में हैं."
सौरव दास ने लिखा, "यह इमरजेंसी जैसी स्थिति है. सरकार पूरी तरह से अपना आपा खो चुकी है. लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे. कॉकरोच आ रहे हैं."
उन्होंने एक्स पर एक अन्य यूज़र की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा ''वाह". दरअसल यूज़र ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें पुलिस वाले लोगों से कह रहे हैं कि वो अपना ध्यान रखें और बच्चों को किसी तरह के प्रदर्शन में न जाने दें.
हालांकि बीबीसी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे इन वीडियोज़ की सत्यता की पुष्टि नहीं करता.
गुजरात में भी पुलिस पर लगे आरोप
बीबीसी गुजराती संवाददाता रॉक्सी गागडेकर छारा ने बताया है कि रात क़रीब 11 बजे साबरकांठा पुलिस की एक टीम राज्य की एसएफ़आई (स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया) नेता सत्येशा लेउवा के घर पहुंची.
वह साबरकांठा ज़िले के वडवासा गांव की सरपंच भी हैं.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जब पुलिस उनके घर पहुंची, तो टीम में कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी.
उन्होंने कहा, "पुलिसकर्मियों ने मुझसे पूछा कि क्या मैं शनिवार को दिल्ली जाऊंगी या नहीं. मैंने मना कर दिया. इसके बावजूद वे मेरे घर से नहीं गए और मेरे घर के पास पुलिसकर्मियों की एक टीम तैनात कर दी गई."
पुलिस की टीम मेरे पीछे-पीछे हर जगह जाती रही और आख़िर में पुलिस के जबरन घर में घुसने की घटना से जुड़े मेरे सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट करने के लिए मुझे मजबूर किया."
उन्होंने बताया कि पुलिस शुक्रवार दोपहर तक उनका पीछा करती रही. हालांकि, उनके वकील नीतीश के हस्तक्षेप के बाद उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई.
एसएफ़आई के एक अन्य नेता और वकील नीतीश ने बीबीसी को बताया कि सिविल ड्रेस में कुछ लोग उनका पीछा कर रहे थे.
बीबीसी से बात करते हुए पुलिस इंस्पेक्टर डीआर पाधेरिया ने कहा कि पुलिस की टीम ने न तो उन्हें हिरासत में लिया और न ही उनका पीछा किया.
उन्होंने कहा, "हमने केवल उनके पास जाकर पूछा था कि क्या वह दिल्ली जा रही हैं या नहीं. इसके बाद पुलिस की टीम उनके घर से चली गई. उन्होंने पुलिस पर जो अन्य आरोप लगाए हैं, वे सभी निराधार हैं."
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