रूसी तेल पर डोनाल्ड ट्रंप का '100% टैरिफ बम', भारत ने दम दिखाया तो 3 जगहों पर फंस सकता है अमेरिका!
Updated on
20-09-2026 01:55 PM
रूस से तेल खरीदने की वजह से अमेरिका अब भारत समेत चीन, अजरबैजान, तुर्की जैसे देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा सकता है। सबसे ज्यादा खतरा भारत को लेकर है लेकिन नई दिल्ली अभी घबराई हुई नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए कानून पर दस्तखत किए हैं। इसके तहत उन्हें उन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से सबसे ज़्यादा तेल और गैस खरीदते हैं। भारत ने दो टूक कहा है कि अगर टैरिफ लगाया जाता है तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर होगा।
नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बात करते हुए कुछ जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स ने कहा कि भारत को सख्त रूख पिछले वर्ष से ही अपनाना चाहिए थे। लेकिन सरकार ने इस बार वॉशिंगटन को पर्दे के पीछे से भी कुछ सख्त संदेश भेजे हैं। अमेरिका के साथ परमाणु डील में अहम भूमिका निभा चुके और भारत-अमेरिका कारोबार के एक्सपर्ट रोबिंदर सचदेव ने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से कहा 'अमेरिका भारत पर कितना टैरिफ लगाएगा ये अब पूरी तरह से डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर करता है।'
उन्होंने एक मोटा मोटी गणित समझाते हुए कहा कि एक प्रतिशत टैरिफ का असर करीब एक अरब डॉलर के कारोबार को प्रभावित करता है। इस हिसाब से 50 फीसदी टैरिफ 50 अरब डॉलर के कारोबार पर असर डालेगा। उन्होंने कहा कि ये अब एक डिप्लोमेटिक लड़ाई है। रोबिंदर सचदेव ने कहा आर्थिक असर का डर इसलिए बड़ा है क्योंकि अगर अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जाती है तो यह सिर्फ भारत द्वारा खरीदे गए रूसी तेल पर ही नहीं बल्कि अमेरिका आने वाले भारतीय सामान पर भी लागू होगी। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर होगा।
अमेरिका ने जो बिल पास किया है वो क्या है?
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट ने शुक्रवार को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026' पास किया था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और अब ये कानून बन गया है। इसके तहत ट्रंप 100 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं। रोबिंदर सचदेव ने कहा कि किस देश पर कितना टैरिफ लगाना है ये ट्रंप पर निर्भर करेगा।
भारत के लिए सबसे अहम प्रावधान वह अधिकार है जिसके तहत कानून में बताई गई शर्तों को पूरा करने वाले देशों के सामान पर 100% तक अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जा सकती है।
यह कानून खुद भारत पर 100% टैरिफ नहीं लगाता है और न ही कानून के आखिरी टेक्स्ट में भारत का नाम है। इसके बजाय यह एक ऐसा सिस्टम बनाता है जिसके तहत देश अतिरिक्त ड्यूटी के दायरे में आ सकते हैं अगर वे रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीद या प्रतिबंधों से बचने से जुड़ी कानूनी शर्तों को पूरा करते हैं।
यह कानून उन देशों के सामान पर 100% तक अतिरिक्त ड्यूटी लगाने की इजाजत देता है जो कानून लागू होने के 30 दिन या उसके बाद जानबूझकर रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की नई खरीद करते हैं और जो पिछले 12 महीनों के दौरान रूसी तेल या गैस के वॉल्यूम के हिसाब से पांच सबसे बड़े इंपोर्टर्स में शामिल थे
भारत पर टैरिफ लगने की संभावना कितनी?
हाउस के एक पुराने संशोधन में भारत को खास तौर से शामिल करने का प्रस्ताव था जिसमें 100% शुल्क के लिए भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की पहचान करने की बात कही गई थी। हालांकि भारत से जुड़ी वह बात अंतिम कानून का हिस्सा नहीं बनी। फिर भी भारत पर इसका असर पड़ सकता है क्योंकि यह रूसी कच्चे तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। ट्रंप के कानून पर हस्ताक्षर करने के बाद आई रिपोर्टों में भारत और चीन की पहचान उन देशों के तौर पर की गई जिन पर संभावित टैरिफ (शुल्क) लगने की सबसे ज्यादा संभावना है।
भारतीय कारोबार पर कितने असर की आशंका?- 2025 में भारत से अमेरिका में होने वाले सामान का आयात लगभग 103.8 बिलियन डॉलर का था। इस स्तर पर 100% अतिरिक्त शुल्क से लगभग 104 बिलियन डॉलर सालाना का व्यापार प्रभावित होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को अपने-आप 104 बिलियन डॉलर का नुकसान हो जाएगा या उसकी GDP उतनी कम हो जाएगी।
भारतीय निर्यात को कितने नुकसान की आशंका?- टैरिफ अमेरिका में इंपोर्टर्स से वसूला जाएगा जबकि इसका आर्थिक बोझ US इंपोर्टर्स, कंज्यूमर्स और भारतीय एक्सपोर्टर्स के बीच बंट सकता है। यह बोझ ज्यादा कीमतों, कम मार्जिन, सप्लायर्स बदलने और कम ट्रेड के जरिए पड़ सकता है। उदाहरण के लिए अगर अमेरिका को होने वाले भारतीय सामान के एक्सपोर्ट में 40% की कमी आती है तो 2025 के स्तर पर अमेरिकी बाजार में सालाना बिक्री में लगभग 42 बिलियन डॉलर का नुकसान होगा। 80% की कमी का मतलब लगभग 83 बिलियन डॉलर का नुकसान होगा। ये सिर्फ अनुमानित स्थितियां हैं भविष्यवाणियां नहीं।
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