पिता ने 10 लाख में खरीदा था NEET का पेपर, बेटा दे पाया सिर्फ 107 नंबर का ही जवाब
Updated on
15-05-2026 01:25 PM
NEET UG-2026 पेपर लीक केस में CBI जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. आरोपी दिनेश बिवाल ने बेटे के लिए 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा, लेकिन बेटा ऋषि ऋषि परीक्षा में सिर्फ 107 नंबर का ही सवाल सही कर पाया. जांच में टेलीग्राफ पीडीएफ, WhatsApp चैट, सीकर फ्लैट, 150 संदिग्ध छात्रों और करोड़ों के नेटवर्क की बात सामने आई
NEET 2026 पेपर लीक केस की जांच में अब ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलते जा रहे हैं. CBI की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल ने माना है कि उसने अपने बेटे के लिए 10 लाख रुपये खर्च कर पेपर लिया था, लेकिन इसके बावजूद उसका बेटा परीक्षा में केवल 107 नंबर ही ला सका.
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दिनेश बिवाल ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने बेटे ऋषि को लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था. दावा है कि करीब 10 लाख रुपये की डील के जरिए पेपर हासिल किया गया, लेकिन परीक्षा में अपेक्षित फायदा नहीं मिला. सूत्रों का कहना है कि 600 नंबर का पेपर लाने के बावजूद उसका बेटा सिर्फ 107 अंक तक ही पहुंच पाया. CBI अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसमें पेपर लीक, टैलीग्राम पर PDF शेयरिंग, छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने और लाखों रुपये के लेन-देन की बात सामने आ रही है.
सीकर फ्लैट बना जांच का बड़ा लिंक
जांच एजेंसियों के मुताबिक मंगीलाल और दिनेश इस पूरे नेटवर्क में कोरियर की भूमिका निभा रहे थे. आरोप है कि ये लोग कथित लीक प्रश्नपत्र को अलग-अलग छात्रों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे. सूत्रों के अनुसार दिनेश बिवाल ने राजस्थान के सीकर में एक फ्लैट लिया हुआ था, जहां उसका बेटा रहता था. दिनेश का वहां लगातार आना-जाना भी था. जांच एजेंसियों को शक है कि इसी फ्लैट से कई छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाए गए. सीकर पहले से ही देश के बड़े कोचिंग हब के तौर पर जाना जाता ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह नेटवर्क कोचिंग सर्किल तक भी फैला हुआ था.
CBI रिमांड पेपर में बड़े दावे
NEET केस में गिरफ्तार पांच आरोपियों के रिमांड पेपर की कॉपी आज तक/इंडिया टुडे के पास है. इन्हीं दलीलों के आधार पर अदालत ने पांचों आरोपियों को 7 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है. CBI ने अदालत से कहा कि आरोपियों से गहन पूछताछ जरूरी है, क्योंकि मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है. एजेंसी का कहना है कि इसके तार बड़े नेटवर्क और संभावित अंदरूनी मदद तक जा सकते हैं. CBI ने कोर्ट को बताया कि पूछताछ इसलिए जरूरी है ताकि पेपर लीक जैसे अपराध दोबारा न हों, पूरे नेटवर्क में शामिल बाकी आरोपियों की पहचान हो सके, मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस की जांच की जा पैसों के लेन-देन का ट्रेल सामने आ सके, सबूत मिटाने और गवाहों को प्रभावित करने से रोका जा सके, प्रश्नपत्र लीक होने के असल स्रोत तक पहुंचा जा सके और NTA और अन्य विभागों के संभावित संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की जांच हो सके.
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