पूर्व सांसद अतीक़ अहमद की हत्या के केस में अब तक क्या हुआ
Updated on
21-09-2026 12:47 PM
साल 2008 की बात है, केंद्र में यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर डील पर संसद में विश्वास मत का सामना कर रही थी.
फूलपुर संसदीय क्षेत्र से उस वक्त अतीक़ अहमद समाजवादी पार्टी से सांसद थे. समाजवादी पार्टी ने मनमोहन सरकार का समर्थन किया, लेकिन अतीक़ अहमद ने विरोध में मत दिया.
हालांकि इसका कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई मुक़दमों में घिरे होने की वजह से अतीक़ अहमद उस वक़्त शायद बीएसपी की प्रदेश सरकार को नाराज़ नहीं करना चाहते थे.
साल 2008 में प्रकाशित इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, उस समय अतीक़ अहमद के ख़िलाफ़ 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे और गिरफ्तारी के समय 35 मामलों का ट्रायल अलग-अलग अदालतों में चल रहा था.
अतीक़ अहमद का मामला फिर चर्चा में क्यों?
अतीक़ अहमद पर हत्या, अपहरण, धमकी, जबरन वसूली, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले शामिल थे
प्रमुख मामलों में तत्कालीन बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या, उसके गवाह उमेश पाल का अपहरण और नीलामी में हिस्सा लेने वाले लोगों को धमकाने, उनके अपहरण की कथित योजना से जुड़ा मामला शामिल था.
सीबीआई ने 2002 में आईपीसी और गैंगस्टर एक्ट के तहत एक और साल 2003 में आर्म्स एक्ट के तहत दो मामले भी दर्ज किए थे.
इसके करीब 15 साल बाद, 2023 में अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की हत्या हो गई. ये मामला प्रयागराज की अदालत में लंबित है.
अब, तीन साल बाद अतीक़ की हत्या का केस इसलिए सुर्ख़ियों में आ गया है, क्योंकि उनके छोटे बेटे आबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है.
अतीक़ अहमद के सबसे छोटे बेटे 21 वर्षीय आबान अहमद की छह अगस्त 2026 को झांसी में एक सड़क दुर्घटना में मौत हुई.
वह चार अन्य लोगों के साथ कार से प्रयागराज से झांसी जा रहे थे. उन्हें झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलना था.
झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूंछ थाना क्षेत्र में उनकी कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई. हादसे में आबान और उनके साथ मौजूद सोनू की मौत हो गई, जबकि कार में सवार तीन अन्य लोग घायल हुए.
पुलिस की शुरुआती जांच में तेज़ रफ़्तार और कार का नियंत्रण से बाहर होना हादसे की संभावित वजह बताई गई.
अतीक़ अहमद और उनके भाई अशरफ़ की हत्या साल 2023 में हुई थी और ये मामला प्रयागराज की अदालत में लंबित है.
अतीक़ अहमद की हत्या का मामला प्रयागराज के शाहगंज थाने में दर्ज किया गया था.
इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
धूमनगंज के एसएचओ राजेश कुमार मौर्य की शिकायत के आधार पर शाहगंज पुलिस स्टेशन में तीन हमलावरों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी.
यह एफ़आईआर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई है, इनमें 302 (हत्या), 307 (हत्या की कोशिश), 120-बी (साज़िश), 419 (किसी और का रूप धारण कर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जाली दस्तावेज़ बनाना), 468 (धोखाधड़ी के लिए जाली दस्तावेज़ बनाना) शामिल हैं.
इसके साथ ही, आर्म्स एक्ट (3/25/27) और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट (7 सीएलए) की धाराएं भी लगाई गई हैं.
जिन तीन अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था, उनका नाम लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और मोहित सिंह उर्फ़ सनी सिंह है.
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