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गुजराती 'अशिक्षित' और PM मोदी बना रहे 'बेवकूफ', केरल जीतने के उतावलेपन में कांग्रेस का सेल्फगोल

Updated on 06-04-2026 01:41 PM
कांग्रेस पार्टी केरल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने को लेकर उतावलापन दिखा रही है. शायद यही वजह है कि पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरात के लोगों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मंच से कुछ ऐसी बातें कह दी जो कांग्रेस को केरल में कितना फायदा देगी यह तो भविष्य के गर्त में है, लेकिन यह तय है कि पार्टी को पश्चिम बंगाल, असम और आगामी उत्तर प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनावों में नुकसान तो करा ही देगी. आइए पहले जानते हैं कि मल्लिकार्जुन खरगे ने केरल चुनाव प्रचार के दौरान क्या कहा जिसको लेकर कांग्रेस को होने वाले नुकसान की बातें हो रही हैं
पीएम मोदी पर हमलावर मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरातियों को कहा ‘अशिक्षित’

केरल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इडुक्की की एक जनसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात और अन्य जगहों के अशिक्षित लोगों को गुमराह कर सकते हैं, लेकिन केरल की जनता चतुर और शिक्षित है, इसलिए उन्हें मूर्ख नहीं बनाया जा सकता. खरगे ने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर दावे करते हैं कि केवल वही अपने ’56 इंच के सीने’ के कारण देश चलाने में सक्षम हैं. उन्होंने कहा, ‘आपकी छाती का क्या महत्व है? जाएं और दर्जी से कहें, वह आपके लिए ठीक से जैकेट सिल देगा.’
खरगे ने पिनराई विजयन पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनकी कार्यशैली मोदी जैसी है और दोनों नेता सत्ता को केंद्रीकृत रखना चाहते हैं. उन्होंने दावा किया कि एलडीएफ और बीजेपी मिलकर कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि विजयन अब स्वतंत्र नहीं हैं और वह मोदी के प्रभाव में काम कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने बीजेपी को सबसे सांप्रदायिक पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर वह देश को नुकसान पहुंचा रही है.

उन्होंने दावा किया, ‘मैंने लोगों को यह कहते सुना है कि पिनराई विजयन केरल के मोदी हैं और बीजेपी और एलडीएफ ने कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए गुपचुप तरीके से साजिश रची है.’

खरगे के ऐसे बयान के पीछे मायने क्या है 

दरअसल, पिछले डेढ़ दशक से भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय अस्मिता को लेकर काफी बातें होने लगी है. साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने बिहारी अस्मिता का कार्ड खेलकर पीएम मोदी की लहर को रोकने में सफल हुए थे. 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस जब मजबूती से चुनाव लड़ रही थी तब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में गुजराती अस्मिता और खुद के सम्मान की बात कहकर चुनाव को एकतरफा बीजेपी के पक्ष में मोड़ दिया था.

ठीक इसी तरह 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जब बीजेपी आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार कर रही थी तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाली अस्मिता को हवा दे देकर प्रचंड जीत दर्ज की थीं. इस बार के चुनाव में भी सीएम ममता और उनकी पार्टी बंगाली अस्मिता को मुद्दा बनाने की कोशिश में हैं. हालांकि इस बार बीजेपी थोड़ी सतर्क नजर आ रही है. वह पश्चिम बंगाल चुनाव में 2021 से सबक लेते हुए बाहरी नेताओं के बजाय क्षेत्रीय चेहरों के जरिए प्रचार अभियान को आगे बढ़ा रही है.

राजनीति के जानकार मानते हैं कि अस्मिता की राजनीति के शुरू हुए ट्रेंड को मल्लिकार्जुन खरगे केरल में कांग्रेस के पक्ष में भुनाने के प्रयास में दिख रहे हैं. माना जा रहा है कि अस्मिता की सोच को हवा देने के लिए खरगे ने केरल वालों को श्रेष्ठ और गुजरातियों को अशिक्षित कह बैठे.

कांग्रेस के लिए कैसे नुकसादायक होगा खरगे का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र में आने के बाद से देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखा गया है. देशभर के लगभग हर हिस्से में विचारधारा के बजाय पीएम मोदी के चेहरे पर एक बड़ा वोटबैंक बीजेपी के साथ जुड़ा है. पीएम मोदी पर जब कभी पर्सनल अटैक होते हैं तब बीजेपी और ज्यादा मजबूत बनकर सामने आई है. यूं तो इसके कई उदारहण हैं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी को ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया तब बीजेपी अकेले दम पर 300+ सीटें जीतकर सत्ता में आई 
इसी तरह कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से गुजरात चुनाव के दौरान पीएम मोदी को ‘मौत का सौदागर’, मणिशंकर अय्यर की ओर से ‘चाय वाला’ जैसे शब्द प्रयोग किए गए तो बीजेपी और पीएम मोदी ख्याति में अप्रत्याशित बढ़त दिखी. कुछ महीने पहले संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी की मां को लेकर इंडिया गठबंधन के मंच से कहे गए शब्द के बाद एनडीए गठबंधन को 202 सीटें मिली

इससे पहले राहुल गांधी की ओर से मोदी सरनेम वालों को लेकर कहे गए शब्द पर मुकदमा होने के बाद 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का हश्र भी पूरे देश ने देखा है. इसी तरह के कई ऐसे उदाहरण हैं जब पीएम मोदी पर पर्सनल अटैक करने का फायदा के बजाय विपक्ष को नुकसान ही उठाना पड़ा है. यही वजह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी दल पीएम मोदी पर डायरेक्ट अटैक करने से परहेज करते दिखे, जिसके परिणाम स्वरूप बीजेपी 240 सीटों पर सिमट गई.

खरगे के बयान को बीजेपी ने लपका


बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा, ‘पंजाब में उनके मुख्यमंत्री ने एक बार उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को ‘भैया’ कहकर संबोधित किया था. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक)नेता नियमित रूप से उत्तर भारत के लोगों का अपमान करते हैं. यह कैसी मानसिकता है? इससे पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ लोगों को बांटना चाहती है.’

पूनावाला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक वीडियो संदेश में कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर गुजरात और उत्तर भारत के लोगों के खिलाफ चौंकाने वाली टिप्पणी की है. यह कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की नीति को दर्शाता है. उन्होंने गुजरात और उत्तर प्रदेश के लोगों को सिर्फ इसलिए गाली दी क्योंकि वे कांग्रेस को वोट नहीं देते. जब कांग्रेस चुनाव हारती है, तो वह लोगों को गाली देती है.’

उन्होंने सवाल किया कि क्या गुजरात में कांग्रेस के नेता और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेता ऐसी टिप्पणियों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा, ‘क्या गुजरात कांग्रेस इससे सहमत है? क्या अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव इससे सहमत हैं? यह पहली बार नहीं है. डीके सुरेश जैसे कांग्रेस नेताओं ने उत्तर और दक्षिण भारत के विभाजन का आह्वान किया है. उन्होंने उत्तर भारतीयों और उत्तर में रहने वाले अन्य लोगों का अपमान किया है.’

वहीं, प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी आज भी अंग्रेजों की तरह विभाजनकारी राजनीति करती है और देश की एकता के खिलाफ काम करती है.

उन्होंने सोशल मीडिया पेज एक्स पर खरगे के भाषण का वीडियो साझा करते हुए पोस्ट किया, ‘ए. ओ. ह्यूम द्वारा स्थापित कांग्रेस, विभाजनकारी राजनीति का अभ्यास करना जारी रखती है और एक भारतीय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने में रुचि रखती है.’

खरगे के बयान से कांग्रेस को हो सकते हैं ये 5 नुकसान



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