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इस्तीफे की मांग के बीच चुनाव आयुक्तों से मिले ज्ञानेश कुमार, SIR डेडलाइन बढ़ाने समेत कई

Updated on 26-09-2026 07:41 PM
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और इलेक्शन कमीश्नर्स सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में बैठक की। यह मीटिंग ऐसे समय हुई, जब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि संधू और जोशी ने मतदाता सूची के SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति जताई थी। बैठक के बाद निर्वाचन आयोग ने एसआईआर और आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर कई फैसलों की जानकारी दी। आयोग ने कैबिनेट सचिव को संधू और जोशी की ओर से भेजे गए पत्र पर भी अपना पक्ष रखा। चुनाव आयुक्तों की आज की बैठक को लेकर एक प्रेस रिलीज जारी की गई। इसमें तीनों निर्वाचन आयुक्तों की साथ में तस्वीर भी लगाई गई है।

दिल्ली में मतदाता सूची के SIR को लेकर चुनाव आयोग ने आज की बैठक में बड़ा फैसला लिया। आयोग ने एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की डेडलाइन 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। वहीं, नोटिस पाने वाले मतदाताओं को अब हर मामले में चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) के दफ्तर जाकर सुनवाई में शामिल नहीं होना पड़ेगा।

नोटिस के निपटारे की समयसीमा बढ़ाई

चुनाव आयोग ने दिल्ली में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी अपना पक्ष रखा। आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची के SIR समेत अहम फैसले पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। दिल्ली में नोटिस के निपटारे और दावे-आपत्तियों पर फैसला लेने की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। महाराष्ट्र में भी आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी है। नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 होगी।

एक बार फिर से घर-घर जाएंगे BLO

आयोग के मुताबिक, जिन लोगों को मतदाता सूची में नाम मैप नहीं होने या तार्किक गड़बड़ियों के कारण नोटिस दिया गया है, उनके घर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) जाएंगे। बीएलओ मतदाता के दस्तावेज जुटाकर उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे। इसके बाद ईआरओ यह फैसला करेगा कि मतदाता सूची में नाम रखने के लिए संबंधित व्यक्ति पात्र है या नहीं। ऐसे लोगों को सामान्य तौर पर ERO या सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (AERO) के दफ्तर में सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में सुनवाई जरूरी हो सकती है। आयोग ने कहा कि ऐसे अपवाद वाले मामलों में सुनवाई हो सकेगी और उसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराने की व्यवस्था की जाएगी

पर्याप्त संख्या में बनाई जाएगी हेल्प डेस्क

चुनाव आयोग ने बताया कि जिला चुनाव अधिकारी (DEO) रात में आश्रय स्थलों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त संख्या में मदद डेस्क बनाएंगे या विशेष शिविर लगाएंगे। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत करने की बात कही है। अगर किसी मामले में सुनवाई जरूरी होती है, तो मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। इस तरह संबंधित व्यक्ति की जगह परिवार का वयस्क सदस्य सुनवाई में हिस्सा ले सकेगा।

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