ट्रंप-ईरान के सोशल मीडिया डिप्लोमेटिक वॉर ने कैसे फेल करा दिया आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ का गेम?
Updated on
27-04-2026 12:14 PM
कूटनीति में जितनी बातें बताई जाती हैं, उससे ज्यादा छुपाई जाती हैं... चाणक्य के दौर से ये गूढ़ मंत्र रहा है. लेकिन अमेरिका-ईरान की बातचीत में इससे एकदम उलटा नजारा दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सीक्रेट बातचीत को भी सबसे पहले सोशल मीडिया पर डालने की होड़ में दिख रहे हैं, तो उनका जवाब देने के लिए ईरान भी सोशल मीडिया पर जवाबी कार्रवाई में उतर गया है. इसके अलावा पाकिस्तान की मध्यस्थता भी कम खेल नहीं कर रही. आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ जैसे मध्यस्थतों के रहते बातचीत सफल भी कैसे हो सकती थी. तो इस्लामाबाद के सेरेना होटल में पीसमेकिंग के दूसरे दौर के लिए लगा तंबू उखड़ने लगा है. अराघची अमेरिका से टूटी उम्मीदों को लेकर रूस पहुंच गए हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी के बीच पाकिस्तान ने खुद को एक बड़े मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की थी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने कूटनीति के जरिए बातचीत की राह खोलने की कोशिश भी की. आसिम मुनीर ईरानी अधिकारियों से बात करने के लिए तेहरान भी पहुंचे थे. लेकिन यह पूरा प्रयास कमजोर पड़ गया. इसके पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सोशल मीडिया पर बदलता बयान भी एक बड़ी वजह है.
दरअसल, ट्रंप ने टेबल पर बातचीत के बजाय सोशल मीडिया और पब्लिक स्टेटमेंट के जरिए मैसेज देना शुरू कर दिया. कभी उन्होंने बातचीत के लिए खुलेपन की तरफ इशारा किया, तो कभी सख्त शर्तें रखीं. ट्रंप ने ईरान के सामने न्यूक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह से त्यागने की बात रखी. इस तरह की बयानबाजी ने समझौते की उम्मीद को बहुत हद तक कमजोर किया
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि बातचीत 'फोन पर भी हो सकती है' और पाकिस्तान में होने वाली मीटिंग के लिए अमेरिकी डेलिगेशन भेजने से भी पीछे हट गए. ट्रंप का यह फैसला मौजूदा संकट से जुड़ी अहम कड़ी को उजागर करता है. इससे इस्लामाबाद में तैयार किया गया पूरा डिप्लोमैटिक सेटअप कमजोर पड़ गया.
ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट और डगमगाता सीजफायर
'द गार्डियन' ने अपनी रिपोर्ट में ट्रंप के अनियमित और भड़काऊ बयानों को कूटनीति के लिए एक बड़ी बाधा बताया और यह भी कहा है कि ऐसे बयान चल रही बातचीत को कमज़ोर कर सकते हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स की तरफ से इस बात का इशारा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया का इस्तेमाल नीति-निर्माण के एक साधन के तौर पर करते हैं और अक्सर रियल-टाइम में ही फ़ैसलों का ऐलान करते हैं.
वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया है कि ट्रंप के मैसेजों ने कई बार आधिकारिक कूटनीतिक स्थितियों को जटिल बना दिया है. बीबीस ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि इस तरह के बयान बाज़ारों में हलचल मचा सकते हैं और वैश्विक कूटनीति को प्रभावित कर सकते हैं.
यूएस-ईरान के बीच शुरुआती सीजफायर की बातचीत चल रही थी. इसके बाद ट्रंप ने 'सख्त शर्तों' वाला पोस्ट किया. सीजफायर के तुरंत बाद ट्रंप ने पोस्ट कर दिया था कि ईरान को पूरी तरह परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा. इसके बाद बातचीत की नर्म लहजे वाली शुरुआत कठोरता में बदल गई और ईरान का भरोसा कमजोर हुआ
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेकर बयान जारी करते हुए कहा कि कई साल की सभ्यता खत्म हो सकती है. लेकिन कुछ ही वक्त बाद उन्होंने अचानक सीजफायर का ऐलान कर दिया. इसके बाद उन्होंने न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ने की सख्त शर्त रखी और होर्मुज़ स्ट्रेट पर सैन्य दबाव जारी रखने के संकेत दिए.
जब पाकिस्तान की तरफ से आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की कोशिशें तेज हुईं, तभी ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर वे (ईरान) बात करना चाहते हैं, तो कॉल करिए." इसके साथ ही अमेरिकी डेलिगेशन का इस्लामाबाद दौरा भी टाल दिया गया.
कूटनीति में जितनी बातें बताई जाती हैं, उससे ज्यादा छुपाई जाती हैं... चाणक्य के दौर से ये गूढ़ मंत्र रहा है. लेकिन अमेरिका-ईरान की बातचीत में इससे एकदम उलटा नजारा…
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