पहले मोदी को वोट किया हो। वो सिर्फ यह चाहते हैं कि हेराफेरी ठीक नहीं, यह नहीं चलेगा। ये जो लोग हैं इनकी जो भावना है वह इस आंदोलन का केंद्रीय मंतव्य होना चाहिए। मेरी इच्छा उससे 50 गुना ज्यादा फालतू हो सकती है उससे क्या फर्क पड़ता है।
हालांकि, एक सवाल के जवाब में योगेंद्र यादव ने कहा कि रेजीम चेंज के दो अर्थ होते हैं, सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट। लेकिन किसी ने यहां दूसरे अर्थ में बात नहीं की है। उन्होंने कहा, 'रेजीम चेंज की बात करना कोई गुनाह नहीं क्योंकि इसके दो अर्थ होता है। इसका एक अर्थ होता है सत्ता परिवर्तन और एक कभी-कभी होता है तख्तापलट। 1977 में जो हुआ उसे रेजीम चेंज कहा गया उसको लेकर खुलकर चर्चा हुई। 2014 में चुनाव के जरिए रेजीम चेंज हुआ। आज यदि विपक्ष रेजीम चेंज चाहता है तो इसमें कुछ भी गलत, गैर कानूनी, खतरनाक या बगावती नहीं है। रेजीम चेंज का एक दूसरा अर्थ भी होता है इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए। दूसरा अर्थ होता है तख्तापलट जो श्रीलंका में हुआ, बांग्लादेश और नेपाल में। जहां यह है कि आप चुनाव नहीं सड़क से सरकार का तख्तापलट करना चाहते हैं। ऐसी बात किसी ने नहीं की। ऐसी बात प्रशांत भूषण ने नहीं की। कांग्रेस ने तो बकायदा स्पष्ट किया। जो व्यक्ति हिंसा की बात करे और कहे कि सड़क पर हम चुनाव के बिना रेजीम चेंज कराएंगे तब तो ऐसी बात होती है। लेकिन प्रशांत भूषण ने ऐसा कुछ नहीं कहा।' उन्होंने भाजपा पर बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप भी लगाया