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मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग

Updated on 22-10-2026 09:32 PM
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच प्रदशनकारियों को एक ऐसी सलाह दी है, जिसको लेकर उन्होंने खुद को गालियां दिए जाने की आशंका भी व्यक्त की और कहा कि ऐसा हो भी रहा है। स्वराज इंडिया के प्रमुख और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा या रेजीम चेंज की बात करने वालों को नसीहत दी कि यह अभी इस आंदोलन की मांग नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी जनआंदोलन नेता की इच्छा पर नहीं, इसमें शामिल लोगों की इच्छा पर सफल होता है।

एसआईआर और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य संगठनों के साथ कदम ताल करते हुए दिखने वाले योगेंद्र यादव ने माना कि इस आंदोलन को जो आम लोग समर्थन दे रहे हैं वह मोदी सरकार का इस्तीफा या सत्ता परिवर्तन की मांग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अभी सिर्फ निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। यादव ने वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम को दिए इंटरव्यू में कहा, 'इस आंदोलन के माध्यम से यह मांग करना कि मोदी सरकार इस्तीफा दे, यह अभी इस आंदोलन की मांग नहीं हो सकती है। क्योंकि जो हजारों लोग आए हैं, जो लाखों लोग समर्थन कर रहे हैं और जिन करोड़ों लोगों की थोड़ी सहानुभूति है वह एक न्यूनतम चीज चाहते हैं, वहीं तक हमें सीमित रहना चाहिए।  मैं जानता हूं कि यह कहने के बाद बहुत गालियां पड़ेंगी, क्योंकि इस देश में असहमति की भाषा तो हमें आती नहीं है। मूल्यांकन की असहमति हम कर नहीं सकते हैं तो गाली की भाषा हमारे देश में उपलब्ध है। लेकिन मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं इस गंभीर बात को लोगों के सामने रखूं।'

मैंने पहले भी कहा तो गालियां पड़ीं: यादव

योगेंद्र यादव ने 'रेजीम चेंज' की उठाई जा रही मांग और इससे आंदोलन को पहुंच चोट को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि इन शब्दों के इस्तेमाल में कोई अपराध नहीं है। लेकिन अभी यह आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, 'आज हमारी प्राथमिकता, राजनीतिक समझदारी क्या होनी चाहिए, वह मैं बताता हूं। मेरे विचार से यह जो आंदोलन है उसका तात्कालिक लक्ष्य या मांग रेजीम चेंज नहीं है, नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक अर्थ में भी जो बिल्कुल सकारात्मक है, लोकतंत्र के माध्यम से सत्ता परिवर्तन। मैं समझता हूं कि यह आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं है। यह आंदोलन चुनावी सुधार ही नहीं फ्री एंड फेयर चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है। यह बात मैंने कही तो इसमें कई लोग गुस्सा भी हो गए। हमारे देश में राजनीतिक समझदारी की ऐसी अवस्था आ गई है कि तुम मेरी भाषा को मेरे शब्द में नहीं बोलेगे तो तुम आरएसएस के दलाल हो। मैंने पहले भी कहा तो गालियां पड़ीं और फिर जोखिम लेकर कह रहा हूं।'

उन्होंने आगे कहा, 'कोई भी आंदोलन खासकर जनआंदोलन इस बात से नहीं चलता कि उसका नेतृत्व करने वाले की इच्छा क्या है। कोई भी आंदोलन, गणित में जो एलसीएम कहते हैं, जो तमाम लोग शामिल हैं, उनकी न्यूनतम साझा राय क्या है। इस आंदोलन में मुझ जैसे लोग शामिल हैं जो मोदी सरकार के घोर आलोचक रहे हैं, इसमें ऐसे लोग हैं जो विपक्षी दलों के हैं और उनकी इच्छा होगी कि एक दिन मोदी को हटाकर वो सत्ता में आएं, इस आंदोलन में वो क्रांतिकारी शामिल हैं जो चाहते हैं कि इस पूरी पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ दिया जाए। इस आंदोलन में वो लोग भी शामिल हैं जिनकी इस तीन में से कोई इच्छा ना हो। हो सकता है उन्होंने या उनके माता-पिता ने  

पहले मोदी को वोट किया हो। वो सिर्फ यह चाहते हैं कि हेराफेरी ठीक नहीं, यह नहीं चलेगा। ये जो लोग हैं इनकी जो भावना है वह इस आंदोलन का केंद्रीय मंतव्य होना चाहिए। मेरी इच्छा उससे 50 गुना ज्यादा फालतू हो सकती है उससे क्या फर्क पड़ता है।


रेजीम चेंज के दो अर्थ: योगेंद्र यादव


हालांकि, एक सवाल के जवाब में योगेंद्र यादव ने कहा कि रेजीम चेंज के दो अर्थ होते हैं, सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट। लेकिन किसी ने यहां दूसरे अर्थ में बात नहीं की है। उन्होंने कहा, 'रेजीम चेंज की बात करना कोई गुनाह नहीं क्योंकि इसके दो अर्थ होता है। इसका एक अर्थ होता है सत्ता परिवर्तन और एक कभी-कभी होता है तख्तापलट।  1977 में जो हुआ उसे रेजीम चेंज कहा गया उसको लेकर खुलकर चर्चा हुई। 2014 में चुनाव के जरिए रेजीम चेंज हुआ। आज यदि विपक्ष रेजीम चेंज चाहता है तो इसमें कुछ भी गलत, गैर कानूनी, खतरनाक या बगावती नहीं है। रेजीम चेंज का एक दूसरा अर्थ भी होता है इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए। दूसरा अर्थ होता है तख्तापलट जो श्रीलंका में हुआ, बांग्लादेश और नेपाल में। जहां यह है कि आप चुनाव नहीं सड़क से सरकार का तख्तापलट करना चाहते हैं। ऐसी बात किसी ने नहीं की। ऐसी बात प्रशांत भूषण ने नहीं की। कांग्रेस ने तो बकायदा स्पष्ट किया। जो व्यक्ति हिंसा की बात करे और कहे कि सड़क पर हम चुनाव के बिना रेजीम चेंज कराएंगे तब तो ऐसी बात होती है। लेकिन प्रशांत भूषण ने ऐसा कुछ नहीं कहा।' उन्होंने भाजपा पर बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप भी लगाया


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