महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?
Updated on
18-04-2026 04:56 PM
महिला आरक्षण क़ानून और डीलिमिटेशन से जुड़ा 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में गिर गया.
पिछले 12 साल में ये पहली बार है जब सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार की तरफ़ से पेश कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में गिरा हो.
सदन में दो दिन की बहस के बाद शुक्रवार शाम मतदान हुआ. संसद में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने वाले क़ानून में संशोधन और डीलिमिटेशन से जुड़े बिलों के समर्थन में 298 मत पड़े जबकि इसके विरोध में 230 मत पड़े.
संसदीय लोकसभा क्षेत्रों की संख्या फिर से निर्धारित करने के लिए लाया जा रहा परिसीमन या डीलिमिटेशन विधेयक भी इसके साथ जुड़ा हुआ था.
सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश क़ानून (संशोधन) विधेयक भी इन दोनों विधेयकों के साथ पेश किया था. इस विधेयक का मक़सद केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन‑क़ानून व आरक्षण‑व्यवस्था को नए परिसीमन और लोकसभा‑विस्तार ढांचे से जोड़ना है.
सदन की कार्यवाही के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया संवैधानिक संशोधन विधेयक के साथ ही दो अन्य विधेयक भी जुड़े थे, ऐसे में अब इन विधेयकों पर मतदान नहीं होगा.
किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण से जुड़े संशोशन विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया गया है.
विधेयक गिरने के बाद एनडीए के सांसदों ने सदन के बाहर विरोध भी किया और विपक्ष पर महिला विरोधी होने के आरोप भी लगाए.
संवैधानिक संशोधन विधेयक लाये जाने से पहले सदन में ज़बरदस्त बहस भी हुई
विपक्ष ने इन विधेयकों को लेकर सरकार के एजेंडे पर भी सवाल उठाए.
तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने सदन में बोलते हुए तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री को जब लगता है कि वो चुनाव हार जाएंगे तो वो नियम ही बदल देते हैं, ये विधेयक सिर्फ़ राजनीतिक मक़सद से लाए जा रहे हैं.”
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सदन के बाहर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ये समझने की ज़रूरत है कि महिला आरक्षण विधेयक साल 2023 में ही पारित हो चुका है और हमने उसका समर्थन किया है, आज सदन में परिसीमन के ज़रिए दक्षिण भारतीय राज्यों का हक़ मारने की साज़िश की हार हुई है.”
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ये देश के लोकतंत्र की बात थी, देश की अखंडता की बात थी, हम महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने से कभी सहमत नहीं हो सकते, ये मुमकिन ही नहीं था कि ये बिल पारित हो.”
वहीं, सदन में मतदान के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “विपक्ष ने ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची, सरकार उस लक्ष्मण रेखा के पार नहीं आ पाई.”
भारतीय जनता पार्टी ने महिला आरक्षण विधेयक को महिलाओं को हक़ देने की दिशा में एक बड़े और ऐतिहासिक क़दम के रूप में सदन में पेश किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “महिला आरक्षण बिल, ये सिर्फ एक बिल नहीं है, ये देश की दिशा और दशा बदलने वाला बिल है.”
उन्होंने कहा, “महिलाओं को आरक्षण देना समय की मांग है, और जो इसका विरोध करेगा वह लंबे समय तक इसकी क़ीमत चुकाएगा.”
वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “महिला आरक्षण बिल देश की नारी शक्ति को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक क़दम है.”
सदन में विपक्ष को जवाब देते हुए अपने भाषण में अमित शाह ने कहा, “जो लोग कह रहे हैं कि ये बिल सत्ता की लालसा से लाया गया है, वो हमारी ताक़त बहुत ज़्यादा मान रहे हैं.”
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