'पीएम मोदी से सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं', बालेन शाह ने भारत आने के न्योते पर रखी 'शर्तें', विदेश मंत्री खनाल का बयान
Updated on
12-04-2026 03:08 PM
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के नये प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को नई दिल्ली आने का न्योता भेजा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को भारत आने का न्योता दिया है और दोनों पक्ष इस यात्रा से ठोस नतीजे सुनिश्चित करने का लक्ष्य रख रहे हैं। मॉरीशस से 'द काठमांडू पोस्ट' से बात करते हुए खनाल ने कहा कि मोदी ने 27 मार्च को शाह के पदभार ग्रहण करते ही अपने बधाई संदेश में यह न्योता दिया था।
आपको बता दें कि विदेश मंत्री खनाल इस समय भारत के विदेश मंत्रालय, मॉरीशस सरकार और इंडिया फाउंडेशन की तरफ से आयोजित नौवें हिंद महासागर सम्मेलन में शामिल होने के लिए मॉरीशस में हैं। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भी पहुंचे हैं। इस दौरान नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि 'यह सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां चल रही हैं कि यह यात्रा परिणाम-उन्मुख हो
नेपाल के प्रधानमंत्री को मोदी ने दिया भारत आने का न्योता
खनाल ने कहा "प्रधानमंत्री बालेन शाह ने न्योता स्वीकार कर लिया है लेकिन यह यात्रा तभी होगी जब दोनों पक्ष तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर अपना 'होमवर्क' पूरा कर लेंगे ताकि इससे ठोस नतीजे मिल सकें।" वहीं इस घटनाक्रम से परिचित अधिकारियों ने काठमांडू पोस्ट को बताया है कि एक 'रूटीन' उच्च-स्तरीय यात्रा से बचने का स्पष्ट इरादा है और काठमांडू और नई दिल्ली दोनों ही ठोस परिणाम देने वाली परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि दोनों ही देश सिर्फ औपचारिक दौरों से हटकर, सिर्फ प्रतीकात्मक दौरों से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं।
इससे पहले शुक्रवार को IOC सम्मेलन से इतर खनाल और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस बात पर सहमत हुए कि उच्च-स्तरीय यात्राएं तभी आयोजित की जाएंगी जब नेपाल की अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक परियोजनाओं और कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी। खनाल ने गुरुवार को 'द पोस्ट' से कहा था "हम सभी द्विपक्षीय तंत्रों को सक्रिय करने पर सहमत हुए हैं। हम प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री स्तर सहित उच्च-स्तरीय यात्राओं और बैठकों से पहले दोनों देशों की तरफ से तय की गई प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे और सहयोग के नए रास्ते तलाशेंगे।"
'नेपाल तय कर रहा है स्पष्ट प्राथमिकताएं'
अधिकारियों ने कहा है कि एक बार जब काठमांडू में तकनीकी और राजनीतिक नेतृत्व एक ठोस रूपरेखा तैयार कर लेगा और स्पष्ट प्राथमिकताएं तय कर लेगा तो इसे आगे की बातचीत और विचार-विमर्श के लिए भारतीय पक्ष के साथ साझा किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक खनाल और जयशंकर मौजूदा परियोजनाओं और कार्यक्रमों के औचित्य की समीक्षा करने और सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशने पर भी सहमत हुए हैं। इसके बाद नेपाल औपचारिक रूप से भारत से अनुरोध करेगा कि वह आगे की बातचीत के लिए अपने विदेश सचिव को भेजे।
जब काठमांडू अपनी आंतरिक तैयारियां पूरी कर लेगा तो वह चर्चा के अगले दौर के बारे में भारतीय पक्ष को सूचित करेगा। इसके बाद भारतीय विदेश सचिव के नेपाल आने की उम्मीद है। भारत और नेपाल के बीच लगभग तीन दर्जन तंत्र मौजूद हैं जो जिला स्तर से लेकर विदेश मंत्री स्तर तक फैले हुए हैं। इनमें सुरक्षा, जल संसाधन, सिंचाई, सीमा प्रबंधन, सीमा संबंधी मुद्दे, व्यापार, वाणिज्य और कृषि जैसे अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इनमें से कुछ तंत्र नियमित रूप से मिलते हैं जबकि कुछ की बैठकें वर्षों से नहीं हुई हैं।
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