छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का सख्त रुख, DMF मनी लांड्रिंग में ₹4.36 करोड़ की FD के बदले संपत्तियां रिहा करने से इनकार
Updated on
31-08-2026 08:53 PM
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मनी लांड्रिंग और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) से जुड़े मामले में छह अचल संपत्तियों को चार करोड़ 36 लाख पांच हजार 780 रुपये की फिक्स्ड डिपाजिट के बदले मुक्त कराने की मांग खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) और उससे जुड़े नियमों में जब्त अचल संपत्ति के बदले समान मूल्य की एफडी स्वीकार करने का कोई सामान्य और असीमित अधिकार संपत्ति मालिक को प्राप्त नहीं है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पीएमएलए की धारा 42 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में वैधानिक अपील का रास्ता उपलब्ध है। ऐसे में केवल अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर कर वैधानिक व्यवस्था को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने रिषभ सोनी और कोमल सोनी की याचिका को मेरिट विहीन मानते हुए खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता रिषभ सोनी, उम्र करीब 39 वर्ष, रायपुर के देवपुरी निवासी हैं। वे शौर्य एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर तथा स्वर्णिम वेंचर्स में पार्टनर हैं। उनकी पत्नी कोमल सोनी, उम्र करीब 38 वर्ष, भी भाव्य एजेंसी की प्रोपराइटर और स्वर्णिम वेंचर्स में पार्टनर हैं। दोनों ने ईडी द्वारा दिसंबर 2024 में की गई संपत्ति कुर्की के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जब्त संपत्ति को साढ़े चार करोड़ के बराबर बताया
ईडी ने 9 दिसंबर 2024 के प्रोविजनल अटैचमेंट आर्डर के तहत दोनों की संयुक्त अथवा व्यक्तिगत स्वामित्व वाली 11 अचल संपत्तियां कुर्क की थीं। इनमें से छह संपत्तियों को छुड़ाने के लिए याचिकाकर्ताओं ने चार करोड़ 36 लाख पांच हजार 780 रुपये की एफडी देने की पेशकश की थी। उनका कहना था कि यह एफडी संबंधित संपत्तियों के आकलित कुल मूल्य के बराबर है और इससे ईडी के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
याचिकाकर्ता बोले- एफआईआर में हमारा नाम नहीं
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 16 अक्टूबर 2019 को ईओडब्ल्यू-एसीबी रायपुर ने डीएमएफ से संबंधित कथित अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि इस एफआईआर में उनका नाम नहीं था और जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई, जिसे सक्षम अदालत ने 8 नवंबर 2023 को स्वीकार कर लिया। हालांकि, ईडी ने जांच के दौरान दोनों से संबंधित संपत्तियों को कथित अपराध से प्राप्त राशि के समतुल्य मूल्य की संपत्ति बताते हुए कुर्क कर लिया। ईडी ने हाई कोर्ट में बताया कि जांच में डीएमएफ की राशि के इस्तेमाल से जुड़े बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच की गई।
प्रावधान है, लेकिन अनिवार्य वैधानिक अधिकार नहीं
कोर्ट ने पीएमएलए की धारा 5, 8, 24 और 42 तथा 2013 के संबंधित नियमों का परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि नियम 5(5) में संयुक्त स्वामित्व वाली अचल संपत्ति के मामले में अधिकृत अधिकारी को संबंधित व्यक्ति के हिस्से के मूल्य के बराबर एफडी स्वीकार करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यह कोई अनिवार्य वैधानिक अधिकार नहीं है।
पीएमएलएटी ने कुर्की के खिलाफ मांग की थी खारिज
अदालत ने पाया कि एडजुडिकेटिंग अथारिटी ने 23 मई 2025 को संपत्तियों की कुर्की की पुष्टि कर दी थी। इसके खिलाफ रिषभ सोनी और कोमल सोनी ने पीएमएलएटी में अलग-अलग अपील दायर की। पीएमएलएटी ने 7 अप्रैल 2026 को उनकी मांग खारिज कर दी थी।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि ट्रिब्यूनल के आदेश में अधिकार क्षेत्र संबंधी त्रुटि, मनमानी, स्पष्ट अवैधानिकता या प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। आर्थिक परेशानी भी संपत्ति बदलने का आधार नहीं बन सकती। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एफडी के बदले छह अचल संपत्तियों की कुर्की हटाने के लिए कोई वैधानिक या प्रवर्तनीय अधिकार स्थापित नहीं कर सके। इसलिए असाधारण अधिकार क्षेत्र के प्रयोग का मामला नहीं बनता
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मनी लांड्रिंग और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) से जुड़े मामले में छह अचल संपत्तियों को चार करोड़ 36 लाख पांच हजार 780 रुपये की फिक्स्ड डिपाजिट…
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