हथियार छूटे, हुनर जागा! कांकेर में आत्मसमर्पित नक्सलियों का रक्षाबंधन, जवानों ने लिया सुरक्षा का संकल्प
Updated on
28-08-2026 10:06 PM
जिले के बीहड़ क्षेत्र से रक्षाबंधन पर भाईचारे और बदलाव की भावुक तस्वीर सामने आई। भानुप्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों ने जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के जवानों की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाया। कभी हथियारों के साथ आमने-सामने रहे लोगों का रक्षासूत्र के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ना संघर्ष से शांति और हथियार से हुनर की ओर बढ़ते बदलाव का प्रतीक बना।
आत्मसमर्पित माओवादी शांति कवाची ने बताया कि उन्होंने जीवन में पहली बार रक्षाबंधन का पर्व मनाया। मुख्यमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण के तहत उन्होंने राखियां बनाना सीखा। अपने हाथों से तैयार राखी जब उन्होंने डीआरजी जवान की कलाई पर बांधी तो यह उनके लिए बेहद भावुक और खास पल था। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद अब उन्हें महसूस हो रहा है कि वे समाज की मुख्यधारा में लौट रही हैं।
शांति कवाची ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नक्सल पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया। पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित लोगों को सिलाई, काष्ठ शिल्प, राखी निर्माण सहित विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें कौशल के माध्यम से सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकें।
कभी बंदूक, आज राखी :
डीआरजी जवान टेकेश्वर हिचामी ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब दोनों पक्ष जंगलों में हथियार लेकर आमने-सामने खड़े होते थे। परिस्थितियां ऐसी थीं कि सामने वाला एक-दूसरे के लिए खतरा था। आज वही हाथ जवानों की कलाई पर राखी बांध रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित माओवादी द्वारा बांधी गई राखी लंबी उम्र, सुख और शांति की कामना का प्रतीक है। यह बदलाव उनके लिए भी भावुक और अविस्मरणीय अनुभव है।
हथियार की जगह हुनर :
पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पण करने वालों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है। सिलाई, काष्ठ शिल्प और राखी निर्माण जैसे कार्यों का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे आत्मसमर्पित लोगों को अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रक्षाबंधन पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक त्योहार का आयोजन नहीं रहा, बल्कि आपसी विश्वास और सामाजिक पुनर्वास का संदेश भी देता नजर आया। जिन लोगों का अतीत संघर्ष से जुड़ा रहा, वे अब हुनर सीखकर नई शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं। राखी के इस छोटे से आयोजन ने यह संदेश दिया कि संवाद, विश्वास और रोजगार के अवसरों के माध्यम से हिंसा से प्रभावित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
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