CJI सूर्यकांत का बेंगलुरु में बड़ा बयान, बोले- कुछ बाहरी ताकतों की वजह से..
Updated on
17-10-2026 09:06 PM
सीजेआई और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के चांसलर, जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि कुछ बाहरी ताकतों की वजह से अनजाने और दुर्भाग्यपूर्ण हालात ने 34वें सालाना कॉन्वोकेशन को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि यह मौका शायद वैसा न हो जैसा हमने उम्मीद की थी।
बेंगलुरु में कॉन्वोकेशन में ग्रेजुएट हो रहे स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "कुछ बाहरी ताकतों की वजह से कुछ अनचाही और दुर्भाग्यपूर्ण हालात अपने साथ अनिश्चितता की भावना लेकर आए और कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि यह मौका शायद वैसा न हो जैसा हमने उम्मीद की थी।" सीजेआई की यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में संस्थान के आस-पास चल रही उथल-पुथल के बीच आई है। अनिश्चितता के बावजूद 34वां सालाना कॉन्वोकेशन तय समय पर हुआ। फैकल्टी मेंबर्स, जाने-माने लोगों और ग्रेजुएट्स के परिवारों की मौजूदगी में डिग्री दी गईं।
इस अवसर पर सीजेआई ने कहा, "मैं अक्सर सोचता हूं कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इसके लिए न सिर्फ कानूनों और मिसालों पर महारत चाहिए, बल्कि जो सही है उसे बचाने की हिम्मत और उन आवाजों को सुनने की विनम्रता भी चाहिए जिन्हें अक्सर सुना नहीं जाता। मेरे प्यारे युवा ग्रेजुएट्स, यह दिमागी आजादी निडरता भी मांगती है। फैसला करने से पहले सुनना, किसी व्यक्ति को उसकी स्थिति से अलग पहचानना, और दूसरे व्यक्ति की इज़्ज़त को नुकसान पहुंचाए बिना असहमत होना।''
उन्होंने आगे कहा कि कानून, जैसा कि आप जल्द ही अपने जीते-जागते रूप में देखेंगे, रुका हुआ नहीं है। यह सांस लेता है, और इसे मानने वालों के दिमाग और कामों से विकसित होता है। आप जिन मामलों में बहस करते हैं, जो कॉन्ट्रैक्ट आप बनाते हैं, जो सलाह आप देते हैं, और जो फैसले आप लिखते हैं, वे सभी हमारे देश में न्याय के बड़े ढांचे में योगदान देंगे।
सुविधा के लिए सिद्धांतों से समझौता मत करें: CJI
सीजेआई ने छात्रों को आगाह किया कि वे अपनी सुविधा के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता न करें और पेशेवर जीवन में सफलता पाने के लिए आसान रास्ते न अपनाएं। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे इस संस्थान में सीखे गए मूल्यों को हमेशा अपने जीवन में बनाए रखें और उन्हीं के अनुसार काम करें। कानूनी पेशे के जरिए समाज की सेवा करने से मिलने वाले संतोष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वकीलों को अन्याय दूर करने, लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने से संतुष्टि मिल सकती है।
जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों से देश के प्रति अपनी व्यापक जिम्मेदारी समझने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र उनसे केवल वकील के रूप में काम करने की ही नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान देने की भी अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा, ''जब आप इस संस्थान से निकलकर दुनिया में कदम रखेंगे, तो याद रखिएगा कि देश आपको केवल कानून के पेशेवरों के रूप में नहीं, बल्कि उम्मीद की किरण के रूप में देखता है।''
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