हूतियों की बढ़ती ताकत से परेशान सऊदी, लंबी खिंचेगी लड़ाई... एक्सपर्ट की चेतावनी
Updated on
17-10-2026 04:12 PM
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में अपनी सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया है. उन्होंने सऊदी अरब के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सैकड़ों किलोमीटर दूर से बार-बार हमले किए हैं. साथ ही यमन के अंदर एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग के पास क्षेत्र पर कब्जा भी किया है.
पिछले एक दशक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल ने इन विद्रोहियों पर कई हवाई हमले किए. लेकिन विद्रोही और मजबूत होते गए. सऊदी अरब अमेरिकी हथियारों से लैस होने के बावजूद नवीनतम हमलों का मुकाबला करने में मुश्किल महसूस कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार ईरान तथा उसके लेबनान और इराक के सहयोगी हूतियों को विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और आधुनिक हथियार उपलब्ध कराते हैं. एक रिपोर्ट में बताया गया कि हूतियों ने चीनी आपूर्तिकर्ताओं से ऐसे पार्ट्स हासिल करने की कोशिश की जो लगभग 2000 किलोमीटर रेंज वाले सटीक बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होते हैं.
ईरान हूतियों को हथियार देने से इनकार करता है क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध का उल्लंघन होगा. चीन ने इस रिपोर्ट पर सीधा जवाब नहीं दिया लेकिन कहा कि वह सैन्य निर्यात में सतर्क और जिम्मेदार रुख अपनाता है. कई यमन जाने वाले जहाजों से ईरानी हथियार और पार्ट्स जब्त किए जा चुके हैं. 2024 की संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की रिपोर्ट में हूतियों, ईरान और उसके अन्य सहयोगियों के बीच व्यापक सैन्य संबंध बताए गए थे.
हूतियों के पास आधुनिक हथियारों का जखीरा
हूतियों के पास पहले से ही बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन का बड़ा जखीरा है. इनमें से कई ईरानी मॉडल से मिलते-जुलते हैं. ये हथियार खाड़ी देशों के साथ-साथ इजरायल तक पहुंच सकते हैं. उन्होंने लाल सागर में जहाजों पर हमला करने के लिए आधुनिक एंटी-शिप मिसाइल और नौसैनिक ड्रोन भी इस्तेमाल किए हैं.
इससे एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग खतरे में पड़ गया है. 2024 की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में जहां हूतियों के पास सिर्फ 30 हजार लड़ाके थे, वहीं 2024 तक उनकी संख्या 3 लाख 50 हजार तक पहुंच गई. सऊदी अरब ने 2015 में यमन के गृहयुद्ध में हूतियों के खिलाफ हस्तक्षेप किया था और नौसैनिक नाकाबंदी लगाई थी.
हूती अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से सऊदी अरब की सीमा पार तेल और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकते हैं. समुद्र में टैंकरों पर भी हमला कर सकते हैं. माना जाता है कि ईरान गाइडेंस सिस्टम जैसे आधुनिक पार्ट्स उपलब्ध कराता है. लेकिन हूती अपने कई हथियार घरेलू स्तर पर बहुत कम लागत में बना सकते हैं.
सऊदी अरब के पास अमेरिकी हथियारों का बड़ा भंडार है. इसमें आधुनिक विमान और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली शामिल हैं. पिछले वसंत में ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान इनका इस्तेमाल हुआ था. लेकिन उच्च स्तर के इंटरसेप्टर की आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है. इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि सऊदी अरब कब तक हमलों को रोक पाएगा.
हूतियों के अलावा इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर भी आरोप हैं जिन्होंने एक महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर हमला कर उसे कुछ समय के लिए बंद कर दिया. हाल के दिनों में हूतियों ने राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बार-बार हमले किए. इससे उड़ानों में बड़े पैमाने पर रद्दीकरण हुआ.
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