चीन के CPEC को भारत का करारा जवाब, 4 देशों को कनेक्ट करेगा 1300 KM लंबा हाईवे, झुनझुना बजाएगा बांग्लादेश
Updated on
05-06-2026 01:21 PM
सौ बात की एक बात ये कि दुनिया में तेजी से इतना कुछ बदल रहा है और देशों के नेताओं का एक दूसरे के यहां आना-जाना लगा हुआ है कि कुछ दौरों में लिए गए फैसलों पर पब्लिक का उतना ध्यान नहीं जा पाता जितनी उनकी अहमियत है. सबका सारा ध्यान ईरान जंग पर ऐसा लगा हुआ है कि इधर अपने ही देश में क्या रणनीति बन रही है उसपर ध्यान नहीं जाता ज्यादातर पब्लिक का. अभी म्यांमार के राष्ट्रपति अपने पहले विदेश दौरे पर कहां गए देखा आपने? वो भारत आए. और भारत में अलग-अलग मुद्दों पर जो चर्चाएं हुईं उनमें एक ऐसे मुद्दे पर बात आगे बढ़ी जो काफी टाइम से अटका पड़ा है. लेकिन वो इतना अहम है कि इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकता है. ये भारत की ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी है जिसपर जोर लगाने की कोशिश तो कई बार शुरू की गई लेकिन बात कई बार अटक भी गई. अब जब ईरान युद्ध के बाद दुनिया का हर देश अपने लिए हर क्षेत्र में अलग-अलग पार्टनर देख रहा है तो भारत के पूर्व दिशा वाले पड़ोस पर फिर फोकस जा रहा है.
भारत की लुक ईस्ट की नीति में बांग्लादेश तो एक बड़ी कड़ी है ही और वहां नई सरकार के साथ रिश्ते धीरे-धीरे समान्य करने की कोशिश हो भी रही है. और बांग्लादेश इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि भारत के पूर्वोत्तर के राज्य चारों तरफ़ से घिरे हुए हैं, समुद्र की कनेक्टिविटी नहीं है वहां से, इसलिए वहां से व्यापार में अड़चनें आती हैं. एक सिलिगुड़ी के रास्ते संकरा-सा कॉरिडोर है जहां से होकर कोलकाता आना पड़ता है और तब जाकर पूर्वोत्तर के राज्यों को समुद्र का रास्ता मिलता है, क्योंकि बीच में बांग्लादेश है. लेकिन दुनिया तो आगे भी है. पूर्व में नक्शा तो देखिए भारत का. पूर्वोत्तर के राज्यों के इस तरफ बांग्लादेश है वो तो सही बात है. लेकिन उस तरफ भी तो रास्ता है. म्यांमार है. और म्यांमार के आगे थाईलैंड है. तो चीन अगर अपने शिनजियांग को समुद्र से जोड़ने के लिए पाकिस्तान से रोड निकाल सकता है, जिसको CPEC के नाम से पब्लिक जानती ही है, तो हम उस तरफ यानी पूरब की तरफ आगे रोड ना बना लें? रोड से आगे म्यांमार चले जाएं, और उससे आगे थाईलैंड चले जाएं? ऐसा भी तो हो सकता है. नहीं हो सकता? बिलकुल हो सकता है और भारत इस तरह की रणनीति में चीन से पीछे भी नहीं था.
भारत का बड़ा प्लान
भारत ने ये प्लैन बहुत पहले ही शुरु कर दिया था. जी हां. भारत भी थाईलैंड तक रोड बना रहा है. और म्यांमार के राष्ट्रपति अपने इस दौरे में उसपर पूरी बात भी कर के गए हैं. अगर आपने खबरों पर ध्यान दिया हो तो वो IMT हाइवे पर भारत में बात कर के गए हैं. IMT, यानी इंडिया म्यांमार थाइलैंड हाईवे. प्लैन तो असल में बहुत पहले ही बन गया था. 2002 में ही. 24 साल पहले ही. 2002 में, जब दुनिया चीन की सड़कों और बेल्ट ऐंड रोड पहल की बात कर रही थी, भारत ने भी एक बड़ा प्लैन बना लिया था. कि एक हाईवे बनाएंगे भारत से म्यांमार और म्यांमार से थाईलैंड. इसको कोलकाता-बैंकॉक एक्सप्रेसवे भी कहते हैं. सीधा कोलकाता से गाड़ी में बैठिए और पहुंच जाइए थाइलैंड. मतलब कोलकाता से आइए मणिपुर और मणिपुर से म्यांमार और फिर वहां से आगे थाईलैंड. ये कोई साधारण सड़क नहीं है. बल्कि 1,360 किलोमीटर लंबा एक ऐसा रास्ता है जो भारत के मणिपुर के मोरेह से शुरू होकर म्यांमार के जंगलों और पहाड़ों से गुजरता हुआ थाईलैंड के माए सोट तक जाता है. और ये थाईलैंड में भी रुकने वाला नहीं, हमारा प्लैन इसे आगे कंबोडिया, फिर लाओस और आगे वियतनाम तक ले जाने का है.
IMT हाईवे: भारत की ‘लुक ईस्ट’ नीति को नई रफ्तार
भारत-म्यांमार-थाईलैंड (IMT) हाईवे परियोजना: म्यांमार के राष्ट्रपति ने अपने पहले विदेश दौरे के लिए भारत को चुना और दोनों देशों के बीच 1,360 किलोमीटर लंबे इंडिया-म्यांमार-थाईलैंड (IMT) हाईवे को तेज गति से पूरा करने पर चर्चा हुई. यह परियोजना भारत की ‘लुक ईस्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है.
कोलकाता से थाईलैंड तक सड़क संपर्क का सपना: यह हाईवे मणिपुर के मोरेह से शुरू होकर म्यांमार के तामू, कालेवा, मांडले और म्यावाडी होते हुए थाईलैंड के माए सोट तक पहुंचेगा. भविष्य में इसे कंबोडिया, लाओस और वियतनाम तक विस्तार देने की योजना है, जिससे भारत सीधे दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ सकेगा.
म्यांमार की राजनीतिक अस्थिरता बनी सबसे बड़ी बाधा: परियोजना पर काम 2004 में शुरू हुआ था, लेकिन 2021 में म्यांमार में सैन्य सत्ता परिवर्तन और आंतरिक संघर्षों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ. खासकर कालेवा-यागी सड़क खंड और कई पुलों के निर्माण में देरी हुई. हालांकि करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है.
पूर्वोत्तर भारत और व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ: हाईवे के पूरा होने से पूर्वोत्तर राज्यों की समुद्री और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी. इससे भारत-आसियान व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि, पर्यटन को बढ़ावा और मणिपुर, मिजोरम समेत कई राज्यों को क्षेत्रीय व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित होने का अवसर मिलेगा.
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की रणनीतिक पहल: चीन जहां म्यांमार और बांग्लादेश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, वहीं IMT हाईवे भारत के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है. भारत, म्यांमार और थाईलैंड अब 2027-28 तक इस परियोजना को पूरा करने की दिशा में काम तेज करने पर जोर दे रहे हैं
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