नरोत्तम मिश्रा ने बढ़ाई MP की सियासी हलचल, 11 दिन में 7 बड़े नेताओं से मुलाकात; नई जिम्मेदारी को लेकर अटकलें तेज
Updated on
13-09-2026 12:39 PM
नरोत्तम मिश्रा की बढ़ी सक्रियता के बीच BJP के बड़े नेताओं से मुलाकातें चर्चा में, नई जिम्मेदारी की अटकलों ने पकड़ा जोर
दतिया की चुनावी हार और सत्ता-संगठन से फिलहाल दूरी के बावजूद नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक सक्रियता चर्चा में, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर डिप्टी सीएम और मंत्रियों तक की मुलाकातों ने बढ़ाई सियासी जिज्ञासा
मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों पूर्व गृह मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा से नेताओं की लगातार हो रही मुलाकातें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। विधानसभा सदस्यता नहीं, सरकार में कोई पद नहीं और दतिया उपचुनाव में भी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद 1 सितंबर से 11 सितंबर के बीच करीब 11 दिनों में सात बड़े नेताओं का नरोत्तम मिश्रा से मिलना राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है।
इन मुलाकातों में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, कैबिनेट मंत्री विजय शाह और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह सहित पार्टी के कई प्रमुख नेताओं के नाम सामने आए हैं। लगातार हो रही इन मुलाकातों को लेकर अब यह चर्चा तेज है कि क्या बीजेपी संगठन नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को लेकर कोई नई रणनीति तैयार कर रहा है?
दिल्ली दौरे ने बढ़ाई सियासी चर्चा
नरोत्तम मिश्रा का हालिया दिल्ली दौरा भी इसी वजह से राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली में उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। इसके बाद मध्य प्रदेश में उनके साथ नेताओं की बैठकों का सिलसिला चर्चा में आ गया।
हालांकि इन मुलाकातों को लेकर बीजेपी की ओर से किसी नई जिम्मेदारी या संगठनात्मक फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में फिलहाल जो भी चर्चाएं चल रही हैं, वे राजनीतिक गतिविधियों और नेताओं के बीच मुलाकातों के आधार पर लगाए जा रहे कयास हैं।
नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश बीजेपी के उन नेताओं में शामिल रहे हैं, जिनकी संगठन और सरकार दोनों में लंबे समय तक प्रभावी भूमिका रही। यही वजह है कि चुनावी हार के बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का उनसे लगातार संपर्क राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2023 की हार के बाद बदली राजनीतिक भूमिका
2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को दतिया सीट से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उनकी सक्रिय राजनीति और भविष्य की भूमिका को लेकर सवाल उठे। लंबे समय तक मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे मिश्रा इस चुनाव के बाद विधानसभा से बाहर हो गए।
लेकिन चुनावी हार के बावजूद बीजेपी संगठन में उनकी उपयोगिता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ने उन्हें ‘न्यू जॉइनिंग टोली’ का प्रदेश संयोजक बनाया था।
नरोत्तम मिश्रा के अनुसार, उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने दावा किया था कि 2.58 लाख से अधिक लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली, जिनमें करीब 90 प्रतिशत लोग कांग्रेस से जुड़े हुए थे। इस अभियान के जरिए उन्होंने संगठन के भीतर अपनी सक्रिय भूमिका को बनाए रखा।
राज्यसभा से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक चर्चा
नरोत्तम मिश्रा का नाम 2024 में राज्यसभा के संभावित उम्मीदवारों में भी चर्चा में रहा था। हालांकि पार्टी ने अंततः दूसरे नेताओं को मौका दिया।
इसके बाद 2025 में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी उनका नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल रहा। संगठन में लंबे अनुभव और सरकार में लंबे कार्यकाल के कारण उन्हें इस पद के लिए मजबूत चेहरों में माना गया, लेकिन अंततः यह जिम्मेदारी भी उनके हिस्से नहीं आई।
इसके बाद 2026 में दतिया उपचुनाव ने एक बार फिर उनकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए। दतिया सीट से बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाने के बजाय आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। हालांकि बीजेपी को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
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