CJP प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, हटाएं सारे बैरिकेड्स, इंटरनेट भी हो बहाल
Updated on
11-10-2026 03:26 PM
दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट को लेकर हुए विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने पूरे शहर में लगाए गए बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट सेवा सामान्य रूप से बहाल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य समय सारणी के मुताबिक चलनी चाहिए और शहर में लोगों की आवाजाही पूरी तरह बहाल की जानी चाहिए. यह व्यवस्था सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों के अधीन रहेगी. 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियों को लेकर कई याचिकाएं दायर हुई थीं. इनमें आरोप लगाया गया कि मेट्रो और रेलवे सेवाएं प्रभावित हुईं. लोगों को हिरासत में लिया गया और शहर में आवाजाही मुश्किल हो गई.इसी मामले में 9 अक्टूबर के अपने पहले आदेश के कथित उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दिल्ली में करीब 7 हजार लोगों को हिरासत में लिए जाने का आरोप है. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि कई लोगों को उस क्षेत्र से बाहर भी हिरासत में लिया गया जहां निषेधाज्ञा लागू थी. हालांकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन आरोपों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो सामान्य रूप से चल रही थी लेकिन 303 में से 45 स्टेशनों के कुछ प्रवेश और एंट्री और एग्जिट पर पाबंदी लगाई गई थी. मेहता ने यह भी बताया कि शनिवार रात 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशनों के गेट खोल दिए गए थे और इंटरनेट सेवा भी बहाल कर दी गई थी. अदालत ने केंद्र को सभी याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी वकील को अपने पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोका जाना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या निर्देश दिए?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूरे शहर में लगाए गए बैरिकेड्स हटाए जाएं. इंटरनेट सेवा सामान्य रूप से बहाल की जाए और लोगों की आवाजाही को पूरी तरह से बहाल किया जाए. अदालत ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य समय सारणी के अनुसार चलती रहनी चाहिए. हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था की गंभीर स्थिति में प्रशासन कानून के मुताबिक कदम उठा सकता है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं पहुंचाई जानी चाहिए. अदालत ने केंद्र को सभी याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. सुनवाई के दौरान रेलवे सेवाओं से जुड़ी एडवाइजरी के बारे में भी सवाल किया गया.
9 अक्टूबर के आदेश के उल्लंघन का आरोप
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसी अर्जियां आई हैं जिनमें 9 अक्टूबर 2026 के आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ताओं का दावा था कि मेट्रो सेवाएं बंद रहीं और नई दिल्ली तथा हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन भी प्रभावित हुए. अदालत को यह भी बताया गया कि बड़ी संख्या में ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गईं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इंटरनेट पूरी तरह बंद था और परिवहन सेवाओं पर रोक से शहर में कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई थी. ये आरोप हैं. इन पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है.
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