बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती के एक लीटर पानी में दो ग्राम मिट्टी, ग्रामीणों ने जताई चिंता
Updated on
18-08-2026 02:06 PM
इंद्रावती बचाओ अभियान समिति ने इंद्रावती नदी के तटों के संरक्षण की जरूरत जताते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को बताया कि वर्ष 2020 में प्रकाशित जल आयोग की रिपोर्ट में तट कटाव के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्षा ऋतु में इंद्रावती नदी के एक लीटर जल में लगभग 2 ग्राम मिट्टी पाई गई। जो नदी तटों पर मृदा कटाव की गंभीरता को दर्शाता है
प्रतिनिधिमंडल ने नदी के संरक्षण, नदी तटों पर हो रहे मृदा कटाव को रोकने तथा बस्तर जिले में हरित आवरण बढ़ाने की मांग की। समिति ने इंद्रावती नदी के दोनों तटों पर लगभग 80,000 पौधों के वृहद् पौधारोपण अभियान को स्वीकृति प्रदान कर क्रियान्वित करने की मांग की है।
64 पंचायतों में होगा पौधारोपण
ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में किए गए सर्वेक्षण एवं चिन्हांकन के अनुसार बस्तर जिले के पांच जनपद पंचायत क्षेत्रों की लगभग 64 ग्राम पंचायतों में पौधारोपण के लिए स्थल चिन्हित किए गए हैं। सदस्यों ने कहा कि इन्द्रावती बस्तर अंचल की जीवनरेखा है। नदी के तटों पर बढ़ता मृदा कटाव, गाद जमाव, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण तथा अन्य मानवीय गतिविधियां नदी एवं उसके पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं।
तट पर हरी सुरक्षा पट्टी जरूरी
नदी के दोनों किनारों पर हरित सुरक्षा पट्टी विकसित करने से मृदा कटाव को नियंत्रित करने तथा नदी तटीय जैव विविधता को संरक्षण देने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। समिति ने इस समस्या के दीर्घकालीन समाधान के लिए वैज्ञानिक एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पौधारोपण को आवश्यक बताया। प्रतिनिधिमंडल मेंं दशरथ कश्यप, किशोर पारख, वृक्ष मित्र सम्पत झा व इंद्रावती बचाओ अभियान के विभिन्न सदस्य शामिल थे।
बस्तर की जीवनरेखा है इंद्रावती
इंद्रावती नदी को बस्तर संभाग की जीवनरेखा कहा जाता है, क्योंकि यह इस क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रीढ़ है। ओडिशा के कालाहांडी जिले से निकलकर यह नदी छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रवेश करती है और अंततः गोदावरी नदी में मिल जाती है। यह नदी क्षेत्र के कृषि विकास, मत्स्य पालन और पेयजल का प्रमुख आधार है। इसके तटों पर बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराएं पनपी हैं। इसके अलावा, विश्वप्रसिद्ध चित्रकूट जलप्रपात (भारत का नियाग्रा) इसी नदी पर स्थित है, जो वैश्विक स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देता है। इंद्रावती बस्तर के निवासियों के लिए केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि उनकी आस्था और आजीविका का मुख्य प्राण है।
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