जहां लगती थी माओवादियों की जन अदालत, अब वहां लोकतंत्र की पंचायत, शीर्ष माओवादी पापाराव के गांव में लोगों से मिल रहे SP और कलेक्टर
Updated on
15-03-2026 02:49 PM
घने जंगलों के बीच से गुजरती कच्ची सड़क पर सुबह की धूप छनकर गिर रही है। यह वही रास्ता है, जो कभी बारूद की गंध और खामोशी से भरा रहता था। गांव के चौक पर जहां पहले माओवादियों की जन अदालत लगती थी,आज ग्रामीणों का एक छोटा सा जमावड़ा है। प्रशासनिक अधिकारी उनके बीच बैठकर विकास योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
साल 2012 में कभी सुकमा जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर केरलापाल में तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन का अपहरण हुआ था। लेकिन अब 90 किमी दूर शीर्ष माओवादी पापाराव के गांव नीलामड़गू में कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण ग्रामीणों के बीच बैठकर विकास कार्यों की जानकारी दे रहे हैं।
यह दृश्य कुछ वर्ष पहले तक असंभव माना जाता था
यह दृश्य कुछ वर्ष पहले तक असंभव माना जाता था। कोंटा विकासखंड के कई गांव चार दशकों तक माओवादी हिंसा के प्रभाव में रहे। हालात ऐसे थे कि बिना माओवादियों की अनुमति गांव में कोई निर्माण कार्य नहीं हो सकता था। सुरक्षा बलों के कैंप खुलने के बाद धीरे-धीरे प्रशासन की पहुंच इन गांवों तक बढ़ी है।
सड़क निर्माण शुरू हुआ है, बसों का संचालन होने लगा है और सरकारी योजनाओं का असर गांवों में दिखाई देने लगा है। प्रशासन की टीम लगातार ऐसे गांवों का दौरा कर रही है, जहां पहले जाना जोखिम भरा माना जाता था
कलेक्टर अमित कुमार का कहना है कि इन इलाकों में सबसे पहले भरोसा लौटाना जरूरी था। सुरक्षा कैंपों के साथ सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है, ताकि विकास सीधे गांवों तक पहुंचे और लोग बदलाव महसूस करें।
पहले यहां दिनदहाड़े माओवादी आते थे
नीलामड़गू गांव के बुजुर्ग विज्जा बताते हैं कि पहले यहां दिनदहाड़े माओवादी आते थे, जबकि अब अधिकारी गांव में बैठकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। इन जंगलों में जहां कभी बंदूक के साए में फैसले होते थे, वहां अब विकास और लोकतंत्र की बात हो रही है।
आदिवासी युवा रामेश्वर कहते हैं कि पहले यहां माओवादियों के स्कूल चलते थे, जहां बंदूक और हिंसा की बातें होती थीं। मगर अब सरकार द्वारा स्कूल खोले जा रहे हैं, जहां शिक्षा की बात होती है, सड़कें बन रही हैं और नौकरी की जानकारी मिल रही है।
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अब हो रही विकास और लोकतंत्र की बात
ग्रामीणों की समस्या सुनने बाइक से पहुंचे कलेक्टर दंतेवाड़ा जिले में भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यहां के सुदूर गांव पुरंगेल में कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव बाइक से पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि अब इन इलाकों तक विकास पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पुरंगेल तक सड़क निर्माण का प्राक्कलन तैयार करने, पेयजल के लिए कुआं और हैंडपंप की व्यवस्था करने तथा ग्रामीणों को बकरी और सूअर पालन जैसी आजीविका योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।
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