हूती कौन हैं जिन्होंने सऊदी अरब को कर रखा है परेशान
Updated on
22-09-2026 02:49 PM
विमान हवा में उड़ते हुए दूसरे सैन्य विमान को ईंधन देता है, ताकि वह लंबे समय तक हवा में रह सके और उसे बार-बार एयरबेस लौटकर ईंधन भरने की जरूरत न पड़े
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती लड़ाकों के बीच गृह युद्ध चल रहा है. इस युद्ध में पड़ोसी देश सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है.
हाल के दिनों में हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और लाल सागर से लगे इलाक़ों में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं.
सऊदी अरब ने बीते दिनों आरोप लगाया कि हूती लड़ाकों ने पवित्र शहर मक्का पर हमला करने की कोशिश की. हालांकि, सऊदी अरब के मुताबिक़ उसके एयर डिफ़ेंस सिस्टम ने मक्का के बाहरी इलाक़े में ही हूती हमलों को रोककर नष्ट कर दिया.
इस कथित हमले की दुनिया के कई मुस्लिम देशों और नेताओं ने आलोचना की.
हालांकि, हूती गुट और उसके समर्थकों ने सऊदी अरब के इस आरोप को ग़लत बताया है. यमन में सऊदी अरब के ख़िलाफ़ हज़ारों हूती समर्थकों ने प्रदर्शन भी किए.
शामिल था.
इसके बाद यमन में हूती लड़ाकों के साथ संघर्ष कुछ समय के लिए शांत रहा. लेकिन बीते कुछ हफ़्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ा है. हूतियों ने यमन के कई इलाक़ों में अपनी पकड़ मज़बूत की है.
इनमें लाल सागर से होकर गुजरने वाले अहम शिपिंग रूट भी शामिल हैं. ये समुद्री रास्ते वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं.
हाल ही में हूतियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा और पेरिम द्वीप पर क़ब्ज़ा कर लिया. पेरिम द्वीप लाल सागर के प्रवेश द्वार पर स्थित है.
यह इलाक़ा सऊदी अरब के लिए इस्तेमाल होने वाले एक अहम शिपिंग रूट का हिस्सा है.
हूती लड़ाकों ने अचानक हमले करके कई जगहों से सरकारी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है. उन्होंने यमन के लाल सागर से लगे लगभग पूरे तटीय इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
इस इलाक़े में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट भी शामिल है. यह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है.
इसराइल और अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट के लगभग पूरी तरह बंद रहने या वहां शिपिंग प्रभावित होने की आशंका के बीच बाब अल-मंदेब का समुद्री रास्ता और भी अहम हो गया है.
सऊदी अरब के ज़्यादातर ऊर्जा कारोबार के लिए भी इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल होता है. अब इस पर हूतियों के क़ब्ज़े से सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है.
पर लड़ाई अचानक बढ़ने से बीते कुछ दिनों में एक लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं.
सऊदी अरब और हूतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में 2022 में हुआ युद्धविराम पहले से ही अस्थिर था. हाल के महीनों में यह पूरी तरह टूट गया है. दोनों पक्ष मिसाइलों, ड्रोन और हवाई हमलों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है. उसने इस समतल तटीय इलाक़े में सैकड़ों हवाई हमले किए हैं.
वहीं, हूती इस इलाक़े में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहे हैं. उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के शहरों और बुनियादी ढांचे पर भी सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं.
इस संघर्ष के चलते लाल सागर के दूसरी तरफ़ मौजूद छोटे से अफ़्रीकी देश जिबूती की अहमियत भी अचानक बढ़ गई है. जिबूती बाब अल-मंदेब के ठीक सामने स्थित है.
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