शी जिनपिंग: चीन के ताक़तवर नेता बनने से पहले सब कुछ गंवाने वाले 'राजकुमार
Updated on
24-09-2026 12:33 PM
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को जब वॉशिंगटन डीसी पहुंचेंगे, तो यह 11 साल में उनका पहला अमेरिकी राजकीय दौरा होगा.
लेकिन अमेरिका से उनका पहला सामना चीन की कई पीढ़ियों के सबसे ताक़तवर नेता बनने से बहुत पहले हुआ था.
चार दशक पहले शी चीन के उत्तरी हिस्से में ज़िले के एक अधिकारी थे. वह जानकारी जुटाने के लिए अमेरिका के मध्य-पश्चिमी इलाक़े के दौरे पर गए थे.
उन्होंने आयोवा में कई दिन बिताए. इस दौरान उन्होंने खेती के बारे में जाना, खेतों का दौरा किया और एक स्थानीय परिवार के घर में रहे.
शी ने काफ़ी दिन अमेरिका में बिताए
चीन के सरकारी मीडिया ने उस परिवार के घर में शी के रहने और टेरी ब्रैनस्टैड के साथ उनकी दोस्ती को प्रमुखता से दिखाया. ब्रैनस्टैड उस समय आयोवा के गवर्नर थे. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में वह चीन में अमेरिका के राजदूत बने. सरकारी मीडिया ने इसके ज़रिए अमेरिका से शी के निजी संबंधों को दिखाने की कोशिश की
आज अमेरिका और चीन के रिश्ते उस समय से बिल्कुल अलग हैं. दोनों देशों के बीच दुनिया में अपना असर बढ़ाने की होड़ है. एक-दूसरे के जवाब में टैरिफ़ लगाए जा रहे हैं, तकनीक पर पाबंदियां हैं और सैन्य क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा चल रही है.
अब 73 साल के शी कोई छोटे अधिकारी नहीं हैं. चीन के नेता के रूप में लगभग 14 साल के दौरान उन्होंने दुनिया में चीन का रुतबा क़ायम किया है.
सब कुछ गंवाने वाले 'राजकुमार'
उनका जन्म 1953 में बीजिंग में हुआ था. वह कम्युनिस्ट क्रांतिकारी शी झोंगशुन की छठी संतान हैं. उनके पिता ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की स्थापना में मदद की थी. बाद में वह कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और उप प्रधानमंत्री बने.
बचपन में शी ने नामी स्कूलों में पढ़ाई की. उन्हें वे सुविधाएं मिलीं, जो उस समय ज़्यादातर परिवारों को उपलब्ध नहीं थीं.
लेकिन फिर राजनीति उनके परिवार के ख़िलाफ़ हो गई.
1960 के दशक की शुरुआत में शी के पिता पर एक 'पार्टी विरोधी' गुट का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया. उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया और एक फ़ैक्ट्री में काम करने के लिए गांव भेज दिया गया.
साल 2004 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने उस सफ़र को याद करते हुए कहा था, "ट्रेन में हर कोई रो रहा था. सिर्फ़ मैं मुस्कुरा रहा था... अगर मैं वहां से नहीं निकल पाता, तो मैं भी रो रहा होता. अगर मैं वहीं रुक जाता, तो मुझे नहीं पता कि मैं आज ज़िंदा भी होता या नहीं."
वह चीन के पश्चिमी शान्शी प्रांत के पहाड़ी गांव लियांगजियाहे पहुंचे. वहां उन्होंने सात साल एक 'याओदोंग' में बिताए. याओदोंग पहाड़ी के भीतर बनी गुफ़ानुमा रहने की जगह होती है वहां उन्होंने खेती की, खाद उठाई और खाइयां खोदीं.
उन्होंने वहां बिताए समय के बारे में कहा था, "अचार वाली सब्ज़ियां मेरा पसंदीदा खाना बन गई थीं. आज भी मुझे वह समय बहुत याद आता है."
काम का बोझ देखकर वह "हैरान" थे. शुरुआत में उन्हें भूख और पिस्सुओं से भी जूझना पड़ा. दोपहर के खाने से पहले सिगरेट पीने के लिए मिलने वाला छोटा सा समय उन्हें कुछ राहत देता था.
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