32 हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई को लेकर घमासान, CM फडणवीस बोले- '28 करोड़ पेड़ जितना प्रदूषण कम करेगा प्रोजेक्ट'
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26-10-2026 05:39 PM
महाराष्ट्र में 32 हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। रायगढ़ जिले के कर्जत के पास टोरेंट कंपनी के 3,000 मेगावाट के बिजली प्रोजेक्ट के लिए 253 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए हजारों पेड़ काटे जाने हैं। कांग्रेस से लेकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना, शरद पवार की एनसीपी और राज ठाकरे की एमएनएस ने इसका विरोध किया है। वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि यह प्रोजेक्ट स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी है और इससे पर्यावरण को फायदा होगा। सरकार का दावा है कि जितने पेड़ काटे जाएंगे, उसके मुकाबले तीन गुना पेड़ लगाए जाएंगे। आखिर क्या है पूरा मामला, देखिए यह रिपोर्ट।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
मुंबई से दूर रायगढ़ जिले के कर्जत के पास स्थित जंगल में बिजली प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी है। यह इलाका पुणे और रायगढ़ के बीच पड़ता है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग से करीब 20 किलोमीटर और भीमाशंकर जंगल से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है। टोरेंट कंपनी के इस प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग की 253 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। दावा है कि यहां 3,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। लेकिन इस प्रोजेक्ट के लिए 32 हजार से ज्यादा पेड़ काटे जाने है इस बात के सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया है।
विपक्षी दल हुए एकजुट
पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर अब विपक्षी दल सरकार के खिलाफ एकजुट होते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, शरद पवार की एनसीपी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस प्रोजेक्ट को लेकर विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर हरे-भरे जंगलों को काटना सही नहीं है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि अगर प्रोजेक्ट बनाना जरूरी है, तो इसके लिए ऐसी जगह चुनी जाए जहां जंगल और पेड़ों को नुकसान कम हो।
वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी इस प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने कहा है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले फैसलों का विरोध होना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की है। राज ठाकरे 28 अक्टूबर को प्रोजेक्ट साइट का दौरा करेंगे। इस दौरान वह स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात करेंगे और एक सभा को भी संबोधित करेंगे।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने भी इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है। विपक्ष का सवाल है कि जब देश में पर्यावरण संरक्षण और पेड़ लगाने की बात की जाती है, तो फिर हजारों पेड़ों की कटाई की अनुमति क्यों दी जा रही है? विपक्षी दलों का कहना है कि प्रोजेक्ट की जरूरत और उसके पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की समीक्षा होनी चाहिए। साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सीएम फडणवीस ने क्या कहा?
वहीं, इस पूरे विवाद पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि विपक्ष इस प्रोजेक्ट को लेकर गलत जानकारी फैला रहा है। सरकार के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का दावा है कि इस प्रोजेक्ट से 3,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इससे उद्योगों और आम लोगों को बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। फडणवीस ने कहा कि अगर इतनी बिजली का उत्पादन कोयले से किया जाए, तो उससे होने वाला प्रदूषण काफी ज्यादा होगा। सरकार का तर्क है कि पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट के जरिए ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के साथ प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है। सीएम फड़णवीस ने 3 प्वाइंट्स में प्रोजेक्ट के फायदे के बारे में बताया है-:
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