'हर राज्य मनमानी करेगा तो देश कैसे चलेगा', नवोदय विद्यालय पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को हड़काया
Updated on
18-09-2026 12:39 PM
नवोदय विद्यालय को लेकर तमिलनाडु सरकार के अड़ियल रुख पर सुप्रीम कोर्ट का पारा चढ़ गया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राज्य सरकार को अपनी सोच बदलने की हिदायत दी. अदालत ने दो टूक कहा कि अगर हर राज्य केंद्र की नीतियां नकारने लगेगा तो देश का संघीय ढांचा बिखर जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए जमीन तलाशने का सख्त आदेश दिया है. राज्य सरकार ने पूर्व में दिए गए आदेश को वापस लेने की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.कोर्ट ने तमिलनाडु को जमीन की पहचान पूरी करने के लिए तीन महीने की मोहलत दी है. यह विवाद मद्रास हाई कोर्ट के 2017 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसे राज्य ने चुनौती दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने संघीय ढांचे पर तमिलनाडु को क्या खरी-खरी सुनाई?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने देश के फेडरल स्ट्रक्चर को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की. पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘कल अगर केंद्र सरकार समवर्ती सूची में कोई नीति लेकर आती है और अगर हर राज्य यह कहना शुरू कर देता है कि मैं आपकी नीति को स्वीकार नहीं करता हूं, तो हमारे संघीय ढांचे का क्या होगा?’
जस्टिस नागरत्ना ने राज्य को याद दिलाया कि लोकतंत्र में को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म यानी सहकारी संघवाद का पालन बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य को केंद्र से खुद को अलग-थलग नहीं समझना चाहिए. चेन्नई और दिल्ली के बीच संवाद का मजबूत पुल होना चाहिए. अदालत ने जोर दिया कि राज्य के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के आधुनिक स्कूलों से दूर रखना सही नहीं है.
दिसंबर के आदेश को वापस लेने की अर्जी पर बेंच ने क्या कहा ?
तमिलनाडु की तरफ से पेश सीनियर वकील जयदीप गुप्ता ने दलील दी कि 15 दिसंबर 2025 के आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन दिया गया है. उस आदेश में राज्य के हर जिले में छह हफ्ते के भीतर जमीन तलाशने को कहा गया था. पीठ ने इस मांग को तुरंत खारिज कर दिया. पीठ ने कहा, ‘हम उस आदेश को वापस नहीं ले रहे हैं.’
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि आदेश पारित होने के बाद से राज्य में सियासी बदलाव हो चुका है. पीठ ने कहा कि सरकार बदलने से अदालती आदेश का प्रभाव खत्म नहीं होता है. चाहे सियासी हालात कुछ भी हों, राज्य को तय समय में जमीन चिन्हित करनी ही होगी. हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कवायद स्पेशल लीव पिटीशन के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी
हिंदी विरोध और त्रि-भाषा नीति के विवाद पर अदालत का क्या रुख था?
तमिलनाडु में नवोदय विद्यालयों का सबसे बड़ा विरोध त्रि-भाषा फार्मूले को लेकर होता रहा है. राज्य सरकार का तर्क रहा है कि इसके जरिए उन पर हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘सबसे पहले आपकी सोच बदलनी होगी. अगर आप यह कहते हैं कि मैं नवोदय विद्यालय नहीं चाहता क्योंकि मैं तमिलनाडु की धरती पर हिंदी पढ़ाया जाना नहीं चाहता…’
इस पर राज्य के वकील ने सफाई देते हुए कहा कि राज्य हिंदी का विरोधी नहीं है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि तमिलनाडु के कई स्कूलों में पहले से ही हिंदी पढ़ाई जा रही है. इस पर अदालत ने कहा कि नवोदय विद्यालय आने से तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मानकों को मजबूती ही मिलेगी. इससे वहां की शिक्षा व्यवस्था किसी भी तरह कमजोर नहीं होगी.
सेंटर और स्टेट के इस विवाद को सुलझाने का नया फॉर्मूला क्या है?
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को आश्वस्त किया कि राज्य पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार को सिर्फ स्कूल के लिए जमीन मुहैया करानी है. इसके अलावा निर्माण और संचालन का सारा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी. भाषा नीति से जुड़े संशय को भी आपसी बातचीत से हल किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी तालमेल से रास्ता निकालने की सलाह दी. बेंच ने कहा कि चेन्नई के लोगों को दिल्ली से और दिल्ली को चेन्नई से अलगाव महसूस नहीं होना चाहिए. पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों को मिलकर गतिरोध समाप्त करना चाहिए. शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है.
नवोदय विद्यालय को लेकर तमिलनाडु सरकार के अड़ियल रुख पर सुप्रीम कोर्ट का पारा चढ़ गया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राज्य सरकार…
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