पीएम मोदी की सरकार आख़िर यूपीआई पेमेंट पर चार्ज क्यों लगा रही है?
Updated on
17-09-2026 07:10 PM
लोकसभा ने पिछले महीने उस बिल को मंज़ूरी दी थी, जो बैंकों और अन्य पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देश के इंस्टैंट पेमेंट नेटवर्क के ज़रिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है.
इस बिल का मक़सद उस क़ानूनी प्रावधान को हटाना था, जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने से रोकता थे.
एमडीआर एक छोटा शुल्क है. जब भी कोई ग्राहक डिजिटल भुगतान करता है, तो बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दुकानदार एमडीआर देते हैं.
फ़िनटेक कंपनियां लंबे समय से एमडीआर की मांग कर रही थीं.
इन कंपनियों का तर्क रहा है कि लेनदेन की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी के साथ बिना किसी मर्चेंट फीस के यूपीआई भुगतान को प्रोसेस करना आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह गया है.
वहीं, भारत सरकार का कहना है कि वह यूपीआई को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहती है, इसलिए एमडीआर लगाने का फ़ैसला किया.
यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से चेतावनी देती रही है कि यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफे़स यानी यूपीआई के लिए हर साल तय की जाने वाली सब्सिडी, इसे चलाने की वास्तविक लागत को पूरा करने के लिए कभी पर्याप्त नहीं रही. वित्त मामलों की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी में भी इस बात की चर्चा होती रही है.
भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस एमडीआर का स्वागत किया है.
केंद्रीय बैंक ने एक्स पर लिखा, "ईकोसिस्टम में शामिल सभी पक्षों के बीच एमडीआर का उचित और संतुलित बँटवारा तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और पेमेंट स्वीकार करने वाले नेटवर्क में लगातार निवेश को बढ़ावा देगा. इससे यूपीआई को ज़्यादा जगहों पर स्वीकार किए जाने में मदद मिल सकती है, ग्राहकों का आधार बढ़ सकता है और लेनदेन की संख्या में लगातार वृद्धि को समर्थन मिल सकता है."
स्टेट ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव यानी यूएसटीआर की रिपोर्ट के आने के बाद किया है. यूएसटीआर की रिपोर्ट में भारत की मुफ़्त डिजिटल भुगतान नीति को व्यापारिक बाधा बताया गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों को नुक़सान होता है, क्योंकि वे हर लेनदेन पर शुल्क लेती हैं. यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यूपीआई के 80 फ़ीसदी लेनदेन गूगल पे और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाले फ़ोनपे के ज़रिए प्रोसेस होते हैं.
लगेगा. एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले भुगतान और रोज़मर्रा के ज़्यादातर छोटे व्यापारी भुगतान पहले की तरह मुफ़्त रहेंगे.
यूपीआई नेटवर्क का संचालन करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कहा कि इस शुल्क से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर की मज़बूती, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, इनोवेशन और ग्राहक सेवा में निवेश के लिए किया जाएगा.
एनपीसीआई ने कहा, "एमडीआर से मिलने वाला राजस्व केवल यूपीआई ईकोसिस्टम के भीतर ही वितरित किया जाएगा ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर की मज़बूती, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा और ग्राहक सेवा में आगे निवेश किया जा सके."
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