धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मोदी सरकार के लिए झटका है या एक बड़ा मौक़ा?
Updated on
26-07-2026 07:14 PM
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उनके ख़िलाफ़ एक महीने के ज़्यादा समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन चल रहा था. साथ ही देशभर में युवाओं का आंदोलन शुरू हो गया था.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मोदी सरकार के लिए एक बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि यह पहला मौक़ा है जब किसी आंदोलन की वजह से उनके किसी मंत्री को पद छोड़ना पड़ा है.
इससे पहले भी कई मौक़े आए जब विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और इसके मंत्रियों को लेकर अलग-अलग मामलों में दबाव बनाया है, लेकिन उसका ज़्यादा असर देखने को नहीं मिला.
इस मामले में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान की अक्सर चर्चा होती है कि 'मोदी सरकार में इस्तीफ़े नहीं होते.'
दूसरी ओर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक्स पर पोस्ट कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तारीफ़ की.
नितिन नबीन ने एक्स पर लिखा, "केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) को सफलतापूर्वक लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा भी उन्होंने कई अहम पहलों को आगे बढ़ाया."
'स्टूडेंट्स के आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता'
साल 2014 के बाद से ऐसे कई मौक़े आए जब मोदी सरकार की नीतियों या किसी मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार का घेराव किया.
नोटबंदी, जीएसटी, रोज़गार और भर्ती परीक्षाओं, सीएए-एनआरसी और एसआईआर जैसे कई मुद्दों पर विपक्षी दलों से लेकर युवाओं ने मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर मोर्चा खोला था.
लेकिन ऐसे विरोध या आंदोलनों का सरकार पर बहुत ज़्यादा असर होता नहीं दिखा. पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी एक के बाद एक कई चुनावों में जीत हासिल करती रही और उनके ख़िलाफ़ हर मुद्दा धराशायी होता रहा.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स का प्रदर्शन 20 जून से चल रहा था.
हालाँकि 17 जुलाई तक इन प्रदर्शनों का बहुत ज़्यादा असर नहीं दिख रहा था. लेकिन 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर के अनशन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया.
इसी घटना के बाद स्टूडेंट्स की मांगों को बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन मिला. इसके बाद 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च पर पुलिस की कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने शेयर किए.
इसके बाद सरकार पर राजनीति, खेल, फ़िल्म, कला और अन्य कई क्षेत्रों से दबाव बढ़ने लगा, जिसका नतीजा 25 जुलाई, शनिवार के दिन देखने को मिला, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा.
शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त…
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