भारत में मीडिया और अल्पसंख्यकों पर डच पीएम की 'चिंता' का मोदी सरकार ने दिया ये जवाब
Updated on
19-05-2026 04:15 PM
भारत ने नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री की उस कथित टिप्पणी को ख़ारिज किया है जिसमें भारत में प्रेस की आज़ादी में गिरावट और धार्मिक व अल्पसंख्यक अधिकारों के कमज़ोर होने का दावा किया गया था.
गौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों के मौजूदा दौरे के तहत नीदरलैंड्स पहुंचे थे, रविवार को वह स्वीडन गए जहां उन्हें 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस' के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया.
एक डच अख़बार डी फोल्क्सक्रांट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार को नीदरलैंड्स पहुंचने से पहले डच प्रधानमंत्री ने कहा कि 'डच सरकार भारत में हो रहे घटनाक्रमों को लेकर चिंतित है और यह चिंता पूरे यूरोप में है.'
पीएम मोदी के नीदरलैंड्स दौरे को लेकर रविवार को भारत के विदेश मंत्रालय की ब्रीफ़िंग में जब नीदरलैंड्स के पीएम की इस टिप्पणी पर एक डच पत्रकार की ओर से सवाल किए गए तो भारत ने कहा कि ये दिखाता है कि भारत के बारे में लोगों में जानकारी की कमी है
भारतीय विदेश मंत्रालय की ब्रीफ़िंग में पीएम मोदी के नीदरलैंड्स दौरे के अंत में दोनों देश के प्रधानमंत्रियों की ओर से संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस न किए जाने पर भी सवाल किए गए.
हालांकि दोनों देशों ने पीएम मोदी के दौरे को ऐतिहासिक बताया है. मोदी की यात्रा से कई ठोस नतीजे निकले. गुजरात में एक चिप मशीन फ़ैक्ट्री निर्माण में चिप बनाने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी एएसएमएल के साथ टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का समझौता हुआ.
इसके अलावा, लीडेन विश्वविद्यालय ने भारत सरकार को औपनिवेशिक ज़माने की विरासत लौटाने की घोषणा की, जिनमें चोल वंश के दौरान की तांबे की वस्तुएं हैं जिन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के समय में बिना अनुमति के नीदरलैंड्स ले जाया गया था
भारत में अल्पसंख्यक समुदायों, ख़ासकर मुसलमानों के अधिकारों पर डच पीएम की चिंता को लेकर किए गए एक डच पत्रकार के सवाल के जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने कहा, "हमें इस तरह के सवाल मूल रूप से इसलिए झेलने पड़ते हैं क्योंकि सवाल पूछने वाले व्यक्ति को जानकारी की कमी होती है."
जॉर्ज ने कहा कि भारत पांच हज़ार साल पुरानी सभ्यता वाला देश है और यहां सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई विविधता मौजूद है.
उन्होंने कहा, "भारत 1.4 अरब लोगों का देश है, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है. यह विविधताओं वाला देश है. यहां संस्कृति की विविधता है, भाषाओं की विविधता है, खानपान की विविधता है, धर्मों की विविधता है."
"दुनिया में ऐसा कोई दूसरा देश नहीं है जहां चार धर्मों की उत्पत्ति हुई हो. हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म. इन धर्मों की उत्पत्ति भारत में हुई और ये आज भी भारत में फल-फूल रहे हैं."
उन्होंने कहा, "यहूदी धर्म भारत में 2500 साल से ज़्यादा समय तक रहा. लगातार सहअस्तित्व में रहा. भारत शायद उन बहुत कम देशों में से एक है जहां यहूदी समुदाय को कभी उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा."
"ईसाई धर्म यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने के तुरंत बाद भारत आया और यहां फलता-फूलता रहा. इस्लाम पैगंबर मोहम्मद के समय में ही भारत आया और यहां विकसित हुआ."
सीबी जॉर्ज ने भारत को 'जीवंत लोकतंत्र' बताते हुए कहा, "हाल ही में हमारे यहां चुनाव हुए, जिसमें मतदान का स्तर 90 प्रतिशत था. यही भारत की ख़ूबसूरती है."
जॉर्ज ने कहा कि भारत ने लोकतांत्रिक सिद्धांतों से समझौता किए बिना आर्थिक सफलता हासिल की है, "हम दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं. यही भारत की ख़ूबसूरती है, जिस पर हमें गर्व है. इसलिए यहां हर अल्पसंख्यक समुदाय फलता फूलता है."
उन्होंने कहा, "जब हम आज़ाद हुए थे तब भारत में अल्पसंख्यक आबादी 11 प्रतिशत थी. अब यह 20 प्रतिशत से ज़्यादा है. ऐसा कौन सा देश है जहां अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ी हो? आपको भारत के अलावा कहीं नहीं मिलेगा."
उन्होंने कहा, "यही भारत की ख़ूबसूरती है. इसलिए मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि भारत के बारे में और जानें ताकि आप भारत और उसकी प्रगति को बेहतर समझ सकें."
डच अख़बार डी फोल्क्सक्रांट के मुताबिक़, शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने से पहले डच पीएम जेटन ने कहा था कि डच सरकार को भी 'भारत में हो रहे घटनाक्रमों' को लेकर चिंता है.
पीएम जेटेन ने कहा, "यह सिर्फ प्रेस की स्वतंत्रता का मामला नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों का भी है, जो वहां गंभीर दबाव में हैं, ख़ास तौर से मुस्लिम समुदाय, लेकिन कई अन्य छोटे समुदायों पर भी यह लागू होता है."
उन्होंने कहा, "चिंता का विषय यह है कि क्या भारत अब भी एक समावेशी समाज बना हुआ है जहां सभी को समान अधिकार हासिल हैं?"
अख़बार के मुताबिक़ जेटेन ने कहा," भारतीय सरकार के समक्ष ये चिंताएं नियमित रूप से उठाई जाती हैं. मुझे यह भी लगता है कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता इन दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करता है..."
उनके मुताबिक़ इससे भारत में मानवाधिकार और लोकतंत्र एवं क़ानून के शासन को मजबूत करने जैसे व्यापक विषयों पर चर्चा करने के मौक़े मिलते हैं.
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