12 नवजात बच्चों को बचाने वाले पीर ख़ान नहीं बचा पाए अपनी बच्ची की जान, तेलंगाना के अस्पताल में कैसे लगी आग?
Updated on
23-09-2026 06:27 PM
"मैं अपनी बेटी को नहीं ढूंढ रहा था. मैंने सबसे पहले जिन 12 बच्चों को देखा, उन्हें बाहर निकाला. हमारी पाँच दिन की बच्ची की दम घुटने से मौत हो गई."
ये शब्द पीर ख़ान के हैं, उन्होंने कहा, "क्या वे सब किसी और के बच्चे नहीं थे? मैं उन्हें कैसे छोड़ सकता था?"
अधिकारियों ने बताया कि 21 सितंबर की रात 11:40 बजे आदिलाबाद के आरआईएमएस अस्पताल के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में लगी आग में पीर ख़ान की बेटी समेत पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई. (तीन नवजात शिशुओं की मौत 21 सितंबर को घटना के समय हुई थी और दो की मौत 23 सितंबर को इलाज के दौरान हुई.)
पीर ख़ान इच्चोदा में एक दुकान चलाते हैं. उनके दो बेटे हैं. हाल ही में उनकी एक बेटी का जन्म हुआ था.
तेलंगाना के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा, "प्रारंभिक जांच के अनुसार, एसएनसीयू के एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग और जहरीली गैसें निकलीं."
तेलंगाना के मेडिकल और हेल्थ मिनिस्टर दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा, "शुरुआती जांच के मुताबिक़, एसएनसीयू एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग और ज़हरीली गैसें निकलीं."
मंत्री राजनरसिम्हा ने कहा, "दुर्घटना के समय एसएनसीयू में कुल 27 नवजात थे. बचाए गए बाक़ी बच्चों को आदिलाबाद के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है."
तेलंगाना सरकार ने इस दुर्घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया है.
दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा, "समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी."
'अंदर कुछ नहीं मिला'
जब बीबीसी की टीम दुर्घटनास्थल स्थित एसएनसीयू में पहुंची, तो वहां की दीवारें और फर्श काले पड़ गए थे और धुएं के काले निशान दिख रहे थे.
छोड़े हुए चप्पल, कालिख से सना फ़र्श और चिकित्सा उपकरण इधर-उधर बिखरे पड़े थे.
इंद्रवेली मंडल के गिनेरा के रहने वाले कुमरा दिनेश ने बीबीसी को बताया, "पहले नर्सिंग स्टेशन एरिया में एसी मशीन में आग लग गई. फिर तीन धमाके सुनाई दिए. जब मैं अंदर गया, तो धुएं के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया. मैं हांफ़ते हुए बाहर आया. आधे घंटे बाद, कोई मेरी बेटी को बाहर ले आया."
दिनेश ने बताया कि उनकी पत्नी ने 15 दिन पहले उसी आरआईएमएस अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया था, और एसएनसीयू से बाहर निकाले जाने के कुछ ही घंटों के भीतर उनकी बेटी की मौत हो गई थी.
आरआईएमएस हॉस्पिटल 2008 में आदिलाबाद ज़िले के आदिवासी लोगों को सुपर स्पेशलिटी मेडिकल सर्विस देने के मकसद से खोला गया था. उत्नूर एजेंसी इलाके के आदिवासी लोग ज़्यादातर बेहतर इलाज के लिए यहाँ आते हैं.
इस इलाक़े में प्रेग्नेंट महिलाओं में थैलेसीमिया और एनीमिया आम है.
इस वजह से, मांओं और उनके बच्चों को बच्चे के जन्म के समय कम वज़न, एनीमिया, सांस की दिक्कतें होने की संभावना ज़्यादा होती है और डिलीवरी से पहले और बाद में ज़्यादा जटिलताएं पैदा होती हैं.
आरआईएमएस के डायरेक्टर डॉ. जयसिंह ने बीबीसी को बताया, "नए जन्मे बच्चों की मौत की दर कम करने के लिए, केंद्र सरकार ने इन कॉम्प्लीकेशंस को ध्यान में रखते हुए 'संकल्प प्रोजेक्ट' के तहत देश भर के नौ इलाकों में एसएनसीयू बनाए हैं. आदिलाबाद आरआईएमएस हॉस्पिटल उनमें से एक है.
महाराष्ट्र के किनवट के रहने वाले पेंडुर विक्रम अपने छोटे भाई की बेटी से मिलने आए थे, जिसका आरआईएमएस में इलाज चल रहा था.
विक्रम ने बीबीसी को बताया, "मेरा छोटा भाई अपनी बेटी को देखकर एसएनसीयू से बाहर आया, उसके थोड़ी देर बाद ही धमाके हुए. जब मैं अंदर गया, तो मैंने घना धुआँ देखा. वहाँ एक डॉक्टर की सलाह पर, मैंने फायर एक्सटिंग्विशर से शीशा तोड़ा. फिर मैं बच्चे को लेकर बाहर चला गया. मैं कुछ और लोगों को भी बाहर ले आया."
आदिवासी एसोसिएशन के सदस्य पूसम सचिन ने बीबीसी को बताया, "जब हमें इस मामले के बारे में पता चला, तो सब कुछ अस्त-व्यस्त लग रहा था. हर कोई भाग रहा था. हमारे आदिवासी ठीक से तेलुगु नहीं बोलते हैं. हमारे कई लोगों का यहां इलाज चल रहा है. हमने उनकी मदद की और उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया. यहां तक कि चप्पल पहनकर भी इस वार्ड के पास घूमने की इजाज़त नहीं है क्योंकि उससे इंफेक्शन फैलता है. लेकिन इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है."
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