NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी का बड़ा बयान: 'पेपर लीक घोर पाप, बच्चों को भड़काएं नहीं, सही रास्ता दिखाएं'
Updated on
21-07-2026 02:12 PM
नीट परीक्षा पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी.
नई दिल्ली। नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक बहस और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेपर लीक 'घोर पाप' है और इससे लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई की, दोषियों को गिरफ्तार किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों से यह भी अपील की कि वे छात्रों को भड़काने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का काम करें। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों और विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
'पेपर लीक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़'
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक होना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के सपनों पर चोट है। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं, उनके साथ इस तरह का अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कराई और दोषियों को कानून के दायरे में लाया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना भी है।
13 लोगों की गिरफ्तारी का दावा
सूत्रों के अनुसार, संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उन्हें कानून के अनुसार सबसे कठोर सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी साजिश रचने का साहस न कर सके।
दोबारा परीक्षा कराने का लिया गया फैसला
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद तुरंत कदम उठाए। जिन परीक्षाओं पर असर पड़ा, वहां दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई ताकि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो।
उन्होंने कहा कि सरकार का पहला उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना था और इसी कारण आवश्यक निर्णय तेजी से लिए गए।
'बच्चों को भड़काएं नहीं, सही रास्ता दिखाएं'
प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों से विशेष रूप से कहा कि छात्रों से जुड़े संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी के साथ व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को भड़काने या भ्रमित करने के बजाय उन्हें सही जानकारी और सही मार्गदर्शन देना अधिक आवश्यक है।
प्रधानमंत्री का मानना है कि परीक्षा से जुड़े विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने सांसदों से छात्रों और अभिभावकों का विश्वास मजबूत करने का भी आग्रह किया।
राज्य सरकारों से सहयोग की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना केवल केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सभी राज्य सरकारों, परीक्षा एजेंसियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभागों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनाने, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता सुनिश्चित करने और डिजिटल निगरानी को मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
देशभर में छात्रों का गुस्सा
नीट पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लाखों छात्र इस परीक्षा के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने का सपना देखते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबर ने परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।
दिल्ली सहित कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। अभिभावकों ने भी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
सरकार का संदेश- भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
प्रधानमंत्री के बयान से सरकार का रुख साफ दिखाई देता है कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेपर लीक में शामिल किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलेगा और सभी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी।
सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए आवश्यक सभी सुधार किए जाएंगे।
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