पीएम मोदी से सवाल के बाद फिर चर्चा में प्रेस फ़्रीडम, नॉर्वे कैसे बना दुनिया में नंबर वन?
Updated on
20-05-2026 01:42 PM
नॉर्वे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने से शुरू हुआ विवाद दोनों देशों के बीच प्रेस स्वतंत्रता की रैंकिंग की तुलना तक पहुंच गया.
दरअसल नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास स्टोर से मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वहां की एक पत्रकार हेला लेंग को अपने सवाल पर कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने एक्स पर इसका वीडियो पोस्ट कर दिया.
हेला लिंग ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया. मुझे इसकी उम्मीद भी नहीं थी. वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे पहले स्थान पर है और भारत 157वें स्थान पर है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की यात्रा पर हैं और इससे पहले वो नीदरलैंड्स भी गए थे, जहां उनके पहुंचने से पहले डच पीएम रॉब जेटेन ने भारत में प्रेस स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी.
इसका जवाब भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने दिया और भारत महान देश है बताते हुए भारत में मीडिया और अल्पसंख्यकों पर डच पीएम की 'चिंता' को जानकारी के अभाव का परिणाम बताकर ख़ारिज कर दिया था.
लेकिन सोमवार को जब नॉर्वे में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस कांफ़्रेंस में पीएम मोदी से सवाल पूछने का मुद्दा नोकझोंक में बदल गया तो इसकी चर्चा होने लगी कि आख़िर नॉर्वे में क्या ख़ास है जो उसे प्रेस की आज़ादी में अव्वल बनाता है.
पेरिस स्थित रिपोर्टर्स सां फ़्रोंतिए (आरएसएफ़) एक नॉन-प्रॉफ़िट संगठन है जो दुनियाभर के पत्रकारों और पत्रकारिता पर होने वाले हमलों को डॉक्यूमेंट करने और उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का काम करता है.
बीते 10 सालों से प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे लगातार शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि भारत की स्थिति लगातार फिसल रही है और वह बीते पांच सालों में 15 अंक नीचे खिसक कर 157वें स्थान पर पहुंच गया है.
इस रिपोर्ट में नॉर्वे के नंबर वन होने की वजह बताते हुए कहा गया है, "प्रेस की आज़ादी की सुरक्षा के लिए नॉर्वे का क़ानूनी ढांचा काफ़ी मज़बूत माना जाता है."
"वहां का मीडिया बाज़ार सक्रिय है, जिसमें मज़बूत पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर के साथ विविध निजी क्षेत्र भी शामिल है. साथ ही प्रकाशन कंपनियां व्यापक संपादकीय स्वतंत्रता बनाए रखती हैं."
नॉर्वे पांच में से चार इंडिकेटर्स में दुनिया के 180 देशों में नंबर वन है. सिर्फ़ सामाजिक इंडिकेटर में वह दूसरे स्थान पर है लेकिन वह भी मामूली अंतर से.
नॉर्वे के लोग दुनिया में सबसे ज़्यादा अख़बार पढ़ने वालों में गिने जाते हैं.
बीबीसी की 2023 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, नॉर्वे दुनिया के सबसे अधिक इंटरनेट से जुड़े देशों में शामिल है.
जुलाई 2022 तक वहां लगभग 54 लाख इंटरनेट यूज़र थे, जो कुल आबादी का 98 फ़ीसदी हिस्सा है. सोशल मीडिया ट्रैफ़िक में फ़ेसबुक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है.
पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनआरके नॉर्वे में सबसे ज़्यादा पहुंच और भरोसे वाला मीडिया संगठन माना जाता है. उसके प्रमुख टीवी और रेडियो चैनल बाज़ार में अग्रणी हैं.
2022 तक उसकी 94 फ़ीसदी फ़ंडिंग टीवी मालिकों से ली जाने वाली अनिवार्य लाइसेंस फ़ीस से आती थी. इसके बाद से उसे राज्य बजट से एक अलग एनआरके टैक्स के ज़रिए फ़ंडिंग मिल रही है.
व्यावसायिक मीडिया क्षेत्र पर ओस्लो स्थित अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह शिब्स्टेड (Schibsted) का दबदबा है. यह समूह प्रमुख राष्ट्रीय अख़बार और क्षेत्रीय अख़बारों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का प्रकाशक है.
इसके साथ ही कोपेनहेगन स्थित 'एगमोंट फ़ोंडेन' के स्वामित्व वाला टीवी2 ग्रुप भी प्रमुख है, जो देश के सबसे बड़े व्यावसायिक टीवी चैनल का संचालन करता है.
हाल के सालों में प्रिंट संस्करणों के पाठकों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है, जबकि ऑनलाइन अख़बारों की सदस्यता लेने वालों की संख्या बढ़ी है.
आरएसएफ़ की रिपोर्ट से पता चलता है कि प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे समेत नॉर्डिक देशों का प्रदर्शन साल दर साल उम्दा रहा है और वे इस रैंकिंग में टॉप-10 में बने हुए हैं.
डेनमार्क चौथे नंबर पर है, स्वीडन पांचवें और फ़िनलैंड छठे नंबर पर है. अपवाद स्वरूप आईसलैंड 12वें स्थान पर है.
ग्लोबल इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज़म नेटवर्क की एक रिपोर्ट के अनुसार, "नॉर्वे में मीडिया उपभोग की दर काफ़ी ज़्यादा है और वहां के लोग अच्छी पत्रकारिता के लिए भुगतान करने को तैयार रहते हैं. देश में 42 फ़ीसदी लोग ख़बरों के लिए पैसे चुकाते हैं."
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