छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव से निकलकर बना रैप की दुनिया का 'राजा', बस्तरिया स्वैग से हिप-हॉप को दी थी छत्तीसगढ़िया पहचान
Updated on
26-06-2026 08:17 PM
भारतीय हिप-हॉप और रैप संगीत के फलक पर जब भी चर्चा होती है, तो अमूमन दिल्ली, पंजाब या मुंबई के 'गली बॉयज' का नाम जेहन में आता है। लेकिन इस चमक-दमक से अलग, मध्य भारत की आदिवासी संस्कृति, हरे-भरे जंगलों और लोक-परंपराओं को हिप-हॉप के वैश्विक मंच पर स्थापित करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले रैपर चेतन चांडक उर्फ 'एप्पी राजा' का रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद असमय निधन हो गया। महज 32 वर्ष की उम्र में उनके इस दुनिया से जाने से छत्तीसगढ़ के संगीत जगत और युवाओं में शोक की लहर है।
एप्पी राजा ने पारंपरिक छत्तीसगढ़ी बोली को रैप के साथ इस कदर पिरोया कि उन्होंने क्षेत्रीय संगीत के मायने ही बदल दिए।
चुनौतियों से भरा रहा शुरुआती सफर
एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे एप्पी राजा का जीवन किसी संघर्षमयी सिनेमाई कहानी जैसा था। जब उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा, तब छत्तीसगढ़ के लोग पंडवानी, भरथरी और कर्मा जैसे पारंपरिक लोकगीतों के रस में डूबे थे और 'हिप-हॉप' जैसी पश्चिमी विधा से पूरी तरह अनजान थे। ऐसे माहौल में ठेठ छत्तीसगढ़ी भाषा में रैप तैयार करना एक बड़ा कूटनीतिक और कलात्मक जोखिम था। शुरुआत में उन्हें समाज और अपनों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि लोगों को लगता था कि इस क्षेत्रीय भाषा में रैप कभी कामयाब नहीं हो सकता।
बिना संसाधनों के मोबाइल से शुरू की रिकॉर्डिंग
साधनों की कमी एप्पी राजा के जुनून के आगे कभी दीवार नहीं बन सकी। महंगे रिकॉर्डिंग स्टूडियो और हाई-टेक उपकरणों के अभाव में उन्होंने अपने मोबाइल और साधारण ईयरफोन की मदद से ही गानों की कंपोजिंग और रिकॉर्डिंग शुरू की। उन्होंने रायपुर और बस्तर की जमीनी हकीकत को करीब से देखा और स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी, सुख-दुख और छत्तीसगढ़िया अस्मिता को अपने शब्दों के जरिए सुर दिए।
'बस्तरिया स्वैग' से मिली इंटरनेट पर शोहरत
एप्पी राजा को असल कामयाबी तब मिली जब बस्तर की अनूठी संस्कृति और लोक-रंग को समेटे उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। उनके रैप की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे अन्य रैपरों की तरह अश्लीलता या पैसों के दिखावे से दूर रहते थे। वे अपने गानों में किसानों के मुद्दों, मिट्टी की खुशबू और लोक-कला को प्राथमिकता देते थे। उनके इस 'बस्तरिया स्वैग' ने ऐसा जादू बिखेरा कि जो भाषा कभी गांवों तक सीमित मानी जाती थी, वह बड़े-बड़े म्यूजिक कॉन्सर्ट और क्लबों में गूंजने लगी।
आर्थिक तंगहाली के बीच रखी 'रैप कल्चर' की नींव
नाम और शोहरत मिलने के बाद भी एक स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) कलाकार होने के नाते उनका वित्तीय संघर्ष कभी खत्म नहीं हुआ। क्षेत्रीय स्तर पर मुख्यधारा के म्यूजिक कॉपोर्रेट्स से आर्थिक सहयोग न मिल पाने के कारण उनके कई बड़े प्रोजेक्ट्स फंड्स की कमी से जूझते रहे। इस मानसिक और आर्थिक तनाव के बावजूद उन्होंने कभी संगीत से मुंह नहीं मोड़ा।
आज भले ही एप्पी राजा का सफर असमय थम गया हो, लेकिन छत्तीसगढ़ में आज जो रैप कल्चर फल-फूल रहा है, उसकी मजबूत नींव एप्पी ने अपने संघर्षों से ही रखी थी। उन्होंने प्रदेश के युवाओं को अपनी मातृभाषा पर गर्व करना सिखाया और वे हमेशा छत्तीसगढ़ के 'रैप किंग' के रूप में याद किए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड का ग्राम पंचायत करीगुंडम, जो कभी नक्सली गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चित रहा, अब विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रहा…
रायपुर पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गांजा तस्कर हेमराज राव और उसके परिवार की दो करोड़ 32 लाख 11 हजार रुपये की संपत्ति जब्त…
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक युवती ने शादी के मंडप में ऐसा फैसला लिया, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। शादी की रस्मों के दौरान जब दूल्हा…
राज्य के शासकीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं की सेहत और पोषण स्तर को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया है।…
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहारा इंडिया के विभिन्न कोआपरेटिव सोसायटियों में फंसे जमाकर्ताओं की याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट…
अंबिकापुर शहर के बौरीपारा विदेशी कम्पोजिट मदिरा दुकान में निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर शराब बेचने के आरोप पर आबकारी आयुक्त ने अंबिकापुर के आबकारी उप निरीक्षक अनिल गुप्ता…
मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन कारोबारी के अकाउंटेंट से हुई 10 लाख रुपये की लूट का मास्टरमाइंड कंपनी का ही कर्मचारी दिनेश राव निकला। मजदूरों के भुगतान के लिए…