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"धरोहर ही नहीं, संस्कार भी बचाओ — भोपाल में निकली जागरूकता रैली”

Updated on 18-04-2026 04:51 PM


“कमलापति महल से उठी विरासत की पुकार — संस्कारों को सहेजने का लिया संकल्प"

“विरासत बचाओ, संस्कृति अपनाओ — रैली के साथ गूंजा आत्मिक संदेश”

“केवल स्मारक नहीं, संस्कार भी हमारी पहचान — जागरूकता रैली ने जगाया समाज”

“विरासत बचेगी तो भविष्य सजेगा — भोपाल में निकली प्रेरणादायी रैली”

भोपाल, 18 अप्रैल। विश्व विरासत दिवस के अवसर पर Brahma Kumaris द्वारा भोपाल के ऐतिहासिक कमलापति महल परिसर में एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
 इस अवसर पर न केवल धरोहर संरक्षण पर विचार साझा किए गए, बल्कि जन-जागरूकता के लिए एक विशाल रैली भी निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश का प्रसार किया।

इस अवसर पर पुरातत्व विभाग से डॉ. मनोज कुमार कुर्मी (अधीक्षक पुरातत्वविद), नीरज वर्मा (उप अधीक्षक पुरातत्वविद), चित्रंजन कुमार (सहायक अधीक्षक) एवं राजेश साहू (सूचना अधिकारी, भारतीय पुरातत्व विभाग, म.प्र.) की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. मनोज कुमार कुर्मी (अधीक्षक पुरातत्वविद) जी ने अपने संबोधन में कहा कि विरासत केवल इतिहास की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी पहचान और जिम्मेदारी है। यदि हम आज सजग नहीं होंगे, तो आने वाली पीढ़ियां इस धरोहर से वंचित रह जाएंगी।
उन्हों ने कमलापति महल के गौरवशाली इतिहास को विस्तार से बताते हुए कहा कि यह महल 18वीं शताब्दी में गोंड रानी कमलापति से जुड़ा हुआ है और भोपाल की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसकी स्थापत्य कला, झील के किनारे स्थित इसकी भव्यता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे विशेष बनाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की धरोहरों के संरक्षण के लिए समाज और प्रशासन दोनों का संयुक्त प्रयास आवश्यक है।
नीरज वर्मा ने कहा कि विरासत संरक्षण केवल सरकारी विभाग का कार्य नहीं, बल्कि यह जन-जन की भागीदारी से ही संभव है।
चित्रंजन कुमार ने धरोहरों के वैज्ञानिक संरक्षण, मरम्मत एवं रखरखाव की प्रक्रियाओं पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
राजेश साहू ने कहा कि सूचना एवं जनजागरूकता के माध्यम से ही समाज को जोड़ा जा सकता है और यही विरासत संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है।राजयोग भवन की प्रभारी बीके नीता दीदी जी ने ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक दृष्टिकोण को रखते हुए कहा —
“वास्तविक विरासत केवल पत्थरों की इमारतें नहीं, बल्कि आत्मा में संचित संस्कार हैं। हर आत्मा अपने साथ शांति, प्रेम और पवित्रता जैसे दिव्य गुणों की विरासत लेकर आती है। राजयोग के अभ्यास द्वारा हम इन मूल संस्कारों को जागृत कर सकते हैं और अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर की विरासत को संभालता है, तभी वह बाहरी धरोहरों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक बनता है। साथ ही उन्होंने साझा किया वास्तव में हमारा यह भारत देश ही सारे विश्व के लिए बहुत बड़ी विरासत है।यह भारत ही देवभूमि कहलाता है जिसकी यादगार आज भी मंदिरों में विद्यमान है, भारतीय संस्कृति ही प्राचीनतम संस्कृति है, भारत अविनाशी खंड है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों पर गौरव करना चाहिए तथा इसकी विरासत को संरक्षित करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए
 वरिष्ठ राजयोगी भ्राता राम कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा —
“हमें विरासत में केवल इमारतें ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कार भी मिलते हैं। यदि हम इन संस्कारों को अपने जीवन में उतार लें, तो समाज स्वतः ही श्रेष्ठ बन जाएगा।”
 कार्यक्रम का मंच संचालन बीके हेमा बहन ने अत्यंत सहज एवं प्रभावशाली शैली में किया, जिससे पूरे कार्यक्रम में ऊर्जा और अनुशासन बना रहा।
 बीके साक्षी बहन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे हम ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने का प्रयास करते हैं, वैसे ही हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों—विशेषकर सरोवरों और जलस्रोतों—को भी सुरक्षित रखना चाहिए। उन्होंने सभी से अपील की कि हम अपने सरोवरों को गंदा न करें, बल्कि उन्हें स्वच्छ, सुरक्षित और आरक्षित रखें।
 बीके पूनम बहन द्वारा सभी उपस्थितजनों को विरासत संरक्षण की सामूहिक प्रतिज्ञा दिलाई गई, जिसमें सभी ने यह संकल्प लिया कि वे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करेंगे।
अंत में *बीके डॉ. प्रियंका बहन* द्वारा कराई गई गहन राजयोग मेडिटेशन कमेंट्री ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और सकारात्मकता से भर दिया।
कार्यक्रम के उपरांत निकाली गई जागरूकता रैली में प्रतिभागियों ने “विरासत बचाओ—भविष्य सजाओ”, “स्वच्छ धरोहर—सुरक्षित कल” जैसे संदेशों के साथ जन-जन को जागरूक किया। रैली के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि यदि हम अपनी धरोहरों की रक्षा करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को एक समृद्ध और गौरवशाली इतिहास सौंप सकेंगे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत की रक्षा करते हुए समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य निरंतर करते रहेंगे

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