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पृथ्वी को बचाने का रास्ता भीतर से गुजरता है” — ब्रह्माकुमारीज का अनोखा संदेश

Updated on 22-04-2026 07:03 PM
"सर्व के सहयोग से ही संभव है पृथ्वी की सुरक्षा"

 पवित्र विचार, सुंदर संसार” — पृथ्वी दिवस पर संकल्प और सृजन का संगम

"चित्रों में नहीं, जीवन में उतारनी होगी सुंदर पृथ्वी”

पृथ्वी दिवस पर ब्रह्माकुमारीज के सेवा केंद्रों में जागरूकता व संकल्प कार्यक्रम
भोपाल, 22 अप्रैल। Earth Day के उपलक्ष्य में Brahma Kumaris के विभिन्न सेवा केंद्रों—सुख शांति भवन, ईदगाह हिल्स, पंचवटी सेंटर, जवाहर चौक केंद्र, एक्जोटिका सेवाकेंद समेत अन्य कई सेवाकेंद्रो—पर प्रेरणादायी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया, बल्कि आंतरिक शुद्धता और सकारात्मक सोच के माध्यम से पृथ्वी को पवित्र बनाने का संकल्प भी दिलाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में पृथ्वी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आर्किटेक्ट बीके दुर्गा जी ने चिंतन साझा करते हुए कहा कि पिछले लगभग 50–55 वर्षों से यह दिवस निरंतर मनाया जा रहा है, फिर भी पृथ्वी की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण बाहरी संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि मन का प्रदूषण है। जब मनुष्य अपने ही विचारों, इच्छाओं, समस्याओं और उलझनों में फंसा रहता है, तब वह सही ज्ञान और सही विधियों को जानते हुए भी जीवन में लागू नहीं कर पाता।
इसका आध्यात्मिक समाधान बताते हुए उन्होंने बताया कि जब तक मन शुद्ध, शांत और संतुलित नहीं होगा, तब तक बाहरी प्रयास भी सीमित परिणाम ही देंगे। इसलिए आवश्यक है कि हम अपने अंदर के विचारों को सकारात्मक, पवित्र और शक्तिशाली बनाएं—तभी प्रकृति में भी वास्तविक परिवर्तन संभव है।

वहीं, वरिष्ठ राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आराधना दीदी ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि “पृथ्वी केवल भौतिक संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि हमारी चेतना का प्रतिबिंब है। जब मनुष्य के विचार शुद्ध और सकारात्मक होते हैं, तब प्रकृति भी संतुलित और सहयोगी बनती है।” उन्होंने आगे कहा कि राजयोग ध्यान के माध्यम से हम परमशक्ति से जुड़कर पवित्र शुद्ध प्रकंपनों का संचार करते हैं, जो न केवल हमारे जीवन बल्कि पूरे विश्व को सकारात्मक दिशा देते हैं। उन्होंने सभी को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना अपनाने के लिए प्रेरित किया।
बीके हेमा बहन ने अपने संबोधन में पृथ्वी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में सतत विकास (Sustainable Development) और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव—जैसे जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग एवं हरित निर्माण—पृथ्वी को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके पश्चात बीके साक्षी बहन द्वारा सभी को सामूहिक राजयोग ध्यान कराया गया, जिसमें उपस्थित भाई-बहनों को आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का अभ्यास कराया गया। इस दौरान “पवित्र शुद्ध प्रकंपन प्रकल्प” के अंतर्गत सभी ने यह अनुभव किया कि शुद्ध और सकारात्मक विचारों से निकलने वाले दिव्य प्रकंपन पूरे वातावरण को ऊर्जावान और पवित्र बना सकते हैं। सभी ने अपने विचारों, शब्दों और कर्मों को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लिया, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।
इस अवसर पर एक विशेष रचनात्मक गतिविधि भी बीके पूनम बहन द्वारा आयोजित की गई, जिसमें बच्चों एवं उपस्थित सभी भाई-बहनों ने “हम कैसी पृथ्वी देखना चाहते हैं” विषय पर सुंदर-सुंदर पेंटिंग्स बनाई। इन पेंटिंग्स में स्वच्छ, हरित, प्रदूषण-मुक्त और शांतिपूर्ण पृथ्वी की झलक दिखाई दी। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे इन चित्रों को अपने घरों में लगाकर प्रतिदिन उसी श्रेष्ठ संकल्प को स्मृति में रखेंगे और अपने विचारों व कर्मों के माध्यम से ऐसी ही सुंदर पृथ्वी के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे।

कार्यक्रम के अंत में बीके डॉ प्रियंका द्वारा सभी उपस्थित जनों ने ब्रह्माकुमारीज की शिक्षाओं के अनुरूप पृथ्वी संरक्षण हेतु निम्न संकल्प लिए—
• मैं अपने विचारों को शुद्ध रखकर वातावरण में सकारात्मक प्रकंपन फैलाऊँगा/फैलाऊँगी।
• मैं जल, वायु, भूमि जैसे प्राकृतिक तत्वों का सम्मान करते हुए उनका दुरुपयोग नहीं करूँगा/करूँगी।
• मैं प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग कर स्वच्छता और हरित जीवनशैली अपनाऊँगा/अपनाऊँगी।
• मैं प्रतिवर्ष कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाऊँगा/लगाऊँगी और उसकी देखभाल करूँगा/करूँगी।
• मैं ऊर्जा की बचत कर प्रकृति के संसाधनों का संतुलित उपयोग करूँगा/करूँगी।
• मैं क्रोध, नकारात्मकता और अशुद्ध विचारों से मुक्त रहकर शांति, प्रेम और सहयोग के संस्कार अपनाऊँगा/अपनाऊँगी।
• मैं अपने परिवार और समाज में भी पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश फैलाऊँगा/फैलाऊँगी।
इस प्रकार, ब्रह्माकुमारीज के सेवा केंद्रों पर आयोजित ये कार्यक्रम केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर, एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक जन-जागरण अभियान के रूप में समाज को नई दिशा देने का संदेश दे गए, जहाँ बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ अंतरात्मा की पवित्रता और शुद्ध प्रकंपनों को भी उतना ही महत्व दिया गया।

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